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हाईकोर्ट का फैसला, अब एक बच्चे के बाद जुड़वां बच्चे होने पर भी लड़ सकते हैं चुनाव

Sun, 07 Jul 2019 10:39 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुद्रपुर Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 07 Jul 2019 10:39 AM IST
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Uttarakhand High court Order for Panchayat chunav decision on childrens 
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तराखंड में अब एक बच्चे के बाद जुड़वां बच्चे होने पर निकाय या पंचायत चुनाव में प्रत्याशी बनने पर कोई बाधा नहीं आएगी। हाईकोर्ट ने भाजपा नेता भारत भूषण चुघ की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को अपवादिक विलक्षण परिस्थिति माना है।

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कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उत्तर प्रदेश म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अधिनियम 1959 के संशोधित अधिनियम के तहत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य नहीं माना है। कोर्ट ने कहा है कि इन परिस्थितियों पर याचिकाकर्ता का कोई नियंत्रण नहीं था। 
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दरअसल भाजपा नेता भारत भूषण चुघ निवासी भूरारानी पिछले साल निकाय चुनाव लड़ने के इच्छुक थे लेकिन नगर निगम अधिनियम में प्रदेश सरकार के नोटिफिकेशन द्वारा संशोधन के बाद जोड़ी गई धारा 25 (आई) (वी) के तहत निगम और पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो से अधिक बच्चों के होने पर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना गया था। 

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संशोधन में जोड़ी धारा में जुड़वां दो या तीन बच्चों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से असमंजस की स्थिति बनी थी। याचिकाकर्ता का एक पुत्र और फिर जुड़वां पुत्र हुए थे। भारत ने यूनिटी लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केएस राठौर से चर्चा के बाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता कुर्बान अली के माध्यम से एक याचिका निकाय चुनाव से ठीक पहले दाखिल की थी। 

अधिवक्ता कुर्बान अली ने कोर्ट के समक्ष जावेद अहमद और अन्य बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य मामले रखे थे। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय दिया कि नगर निगम अधिनियम की संशोधित धारा से याचिकाकर्ता भारत भूषण को अयोग्य नहीं माना जाएगा।

जुड़वां बच्चे होने की स्थितियों में याचिकाकर्ता का कोई नियंत्रण नहीं था। कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर और उत्तराखंड सरकार द्वारा संशोधित अधिनियम की धारा को वैध ठहराते हुए याचिकाकर्ता के मामले को अपवादिक परिस्थिति माना और उसे चुनाव लड़ने के लिए योग्य ठहराया है।

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