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कोर्ट ने 859 पोर्न साइट्स को बंद करने का दिया आदेश, न मानने पर लाइसेंस होगा निरस्त

Fri, 28 Sep 2018 06:47 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल Updated Fri, 28 Sep 2018 06:47 AM IST
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Uttarakhand high court order for close 859 Porn sites soon
uttarakhand high court

हाईकोर्ट ने सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को अश्लीलता फैला रही पोर्न साइट्स को बंद करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने केंद्र की 2015 की अधिसूचना का पालन करते हुए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में किसी भी रूप में प्रचारित होने वाली अश्लील सामग्री, पोर्न के प्रसार को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि इस संबंध में जारी अधिसूचना का मोबाइल कंपनियों ने अनुपालन किया या नहीं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 11 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिया और कहा कि आईएसपी लाइसेंस धारक अगर आदेश का पालन नहीं करते हैं तो केंद्र सरकार उनके लाइसेंस निरस्त करे। 
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कोर्ट के सामने यह तथ्य भी आया कि देहरादून के भाऊवाला में किशोर के साथ सामूहिक दुष्कर्म को मामले में आरोपियों ने पोर्न देखना स्वीकार किया है। न्यायमित्र अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ ने कोर्ट को बताया कि इन पोर्न साइट्स के सर्वर विदेशों में हैं, लेकिन मोबाइल कंपनी बीएसएनएल, एमटीएनएल व अन्य इनकी सेवा प्रदाता हैं।

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बोर्डिंग स्कूल प्रकरण का संज्ञान लेते हुए दिए आदेश

केंद्र सरकार ने 2015 में अधिसूचना जारी कर कंपनियों से आईटी एक्ट के तहत इन साइट्स को बंद करने को कहा था। कंपनियों ने इन साइट्स को ब्लॉक नहीं किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर लाइसेंस धारकों को 31 जुलाई 2015 की केंद्र की अधिसूचना का पालन करने और पोर्न साइट्स ब्लॉक करने का आदेश जारी किया।

कोर्ट ने कहा कि 2015 की अधिसूचना पर्याप्त न हो तो आईटी एक्ट 2000 का सहारा लिया जाए। कोर्ट ने कहा कि यदि इंटरनेट सर्विस लाइसेंस होल्डर 31 जुलाई 2015 की अधिसूचना का पालन नहीं करते हैं तो केंद्र सरकार उनका लाइसेंस निरस्त करे। इसी के साथ कोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा है कि वह किशोरी से दुष्कर्म के मामले की जांच आठ सप्ताह में पूरी कराए। 
 

जांच पूरी कर रिपोर्ट के आदेश

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, हम इस बात का ज्यूडिशियल नोटिस ले सकते हैं कि नाबालिगों के प्रति यौन अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। बच्चे शिक्षण संस्थाओं तक में सुरक्षित नहीं हैं। एक याचिका के तहत हमने हल्द्वानी में एक स्कूल वैन में मासूम के साथ दुष्कर्म के मामले का भी संज्ञान लिया है।
     
जांच पूरी कर रिपोर्ट के आदेश
हाईकोर्ट ने दून अस्पताल में जच्चा बच्चा की असमय मौत के मामले का भी स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को मामले की जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।

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