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उत्तराखंड: हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, सरकार को वेतन में कटौती का अधिकार नहीं

Tue, 20 Jul 2021 10:01 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 20 Jul 2021 10:01 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों का वेतन रोकने का कोई अधिकार नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 14,19, 21 सहित मानवाधिकार का भी उल्लंघन है।

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Uttarakhand High Court instructions to take decision on  distribution of corporation assets between UP-Uttarakhand
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने रोडवेज कर्मचारियों को पिछले छह माह से वेतन नहीं दिए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार को कोई अधिकार नहीं कि वह कर्मचारियों के वेतन में कटौती करे। कोर्ट ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों का वेतन रोकने का कोई अधिकार नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 14,19, 21 सहित मानवाधिकार का भी उल्लंघन है। कोर्ट ने यह टिप्पणी निगम की ओर से आर्थिक स्थिति ठीक होने तक कर्मचारियों को 50 प्रतिशत वेतन दिए जाने के प्रस्ताव पर की।

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हाईकोर्ट ने भविष्य में कर्मचारियों को नियमित वेतन दिए जाने की व्यवस्था के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट की आगामी बैठक में रखने के निर्देश भी दिए ताकि यह समस्या बार-बार न आए। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कोर्ट के पूर्व में निर्देश के बावजूद केंद्र सरकार के परिवहन मंत्रालय ने  परिसंपत्तियों के बंटवारे के लिए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्य सचिवों के साथ बैठक नहीं की।
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कोर्ट ने कहा कि तीन माह के भीतर दोनों प्रदेशों के मुख्य सचिवों की बैठक कर इस मामले में निर्णय लिया जाए। कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बने 21 साल होने वाले हैं, लेकिन अभी तक परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हो पाया है, जबकि अभी केंद्र और दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकार है, ऐसे में यह निपटारा करना आसान है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि चार अगस्त नियत की है। सुनवाई में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्य सचिव, वित्त सचिव, परिवहन सचिव, महानिदेशक परिवहन कोर्ट में पेश हुए। 
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने परिवहन सचिव से पूछा कि 34 करोड़ रुपये आपको मिले या नहीं, इस जिस पर उन्होंने बताया कि अभी तक नहीं मिले। सरकार ने 34 करोड़ रुपये जारी करने का जीओ पास कर दिया है। इस पर कोर्ट ने  कल (बुधवार) तक सरकार से 34 करोड़ रुपये अवमुक्त करने के  निर्देश दिए है।

न वेतन, न बकाया और  विरोध करने पर एस्मा की धमकी

उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार हड़ताल करने पर उनके खिलाफ एस्मा लगाने जा रही है। याचिका में कहा गया कि सरकार कर्मचारियों को हड़ताल करने पर मजबूर करती आई है। सरकार न तो संविदा कर्मचारियों को नियमित कर रही है और ना ही उनको नियमित वेतन दिया जा रहा है। उनको पिछले चार साल से ओवर टाइम भी नहीं दिया जा रहा है।

रिटायर कर्मचारियों के देयकों का भुगतान भी नहीं किया गया है। यूनियन का सरकार और निगम के साथ कई बार मांगों को लेकर समझौता हो चुका है। इसके बावजूद सरकार एस्मा लगाने के लिए तैयार है। सरकार ने निगम को 45 करोड़ रुपया बकाया देना है। वहीं, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भी निगम को 700 करोड़ रुपये देने हैं। न तो राज्य सरकार निगम को उनका 45 करोड़ रुपये दे रही है और ना ही राज्य सरकार उत्तर प्रदेश सरकार से 700 करोड़ रुपये मांग रही है। इस वजह से निगम न तो नई बसें खरीद पा रहा है और ना ही बस में यात्रियों की सुविधाओं के लिए सीसीटीवी सहित अन्य सुविधाएं दे पा रहा है। इधर उनको फरवरी से वेतन तक नहीं दिया गया है।

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