फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand High court decision on ordinance to give exemptions on the expenses of former chief ministers facilities today

उत्तराखंड: हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को दिया झटका, अब बाजार मूल्य से चुकाना होगा किराया

Tue, 09 Jun 2020 11:53 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 09 Jun 2020 11:53 PM IST
सार

  • हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधाएं देने वाले अधिनियम को असांविधानिक घोषित किया
  • अदालत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों से वसूली के लिए राज्य सरकार उत्तरदायी होगी
  • 15 करोड़ रुपये के करीब बकाया है सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों पर

विज्ञापन
Uttarakhand High court decision on ordinance to give exemptions on the expenses of former chief ministers facilities today
nainital high court - फोटो : File Photo

विस्तार

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को अपने निर्णय में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा देने वाले अधिनियम-2019 को असांविधानिक घोषित करते हुए उसे निरस्त कर दिया है। सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब बाजार भाव के किराया चुकाना होगा।

विज्ञापन


याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन मानते हुए यह निर्णय दिया। बकौल अधिवक्ता कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हैं। न्यायालय ने अधिनियम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 202 से 207 के उल्लंघन में पाया है। अब सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को बाजार मूल्य से किराए का भुगतान करना होगा।
विज्ञापन



कोर्ट ने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों के रूप में उन्हें दी गई अन्य सभी सुविधाओं के लिए खर्च किए गए धन की गणना करने और उसकी वसूली के लिए राज्य उत्तरदायी होगा। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान शक्तियों को अलग करने के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने 23 मार्च को मामले में सभी पक्षकारों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद मंगलवार को निर्णय सुनाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मामले के अनुसार, देहरादून की रुलक संस्था ने राज्य सरकार के उस अध्यादेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी, जिसके द्वारा राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के किराए को बाजार रेट के आधार पर भुगतान करने से छूट दे दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सभी पूर्व सीएम पर करीब 15 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा, किराया करीब पौने तीन करोड़ है, जिसकी वसूली के आदेश कोर्ट ने पिछले वर्ष छह माह में करने के आदेश दिए थे।

बकाया माफ करने को सरकार ने बनाया था अधिनियम

रूलक सामाजिक संस्था के चेयरपर्सन अवधेश कौशल की ओर से हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बकाया वसूलने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश के खिलाफ पूर्व सीएम व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने हाईकोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी नहीं सुनी और उन्हें पुराना बकाया चुकाने का आदेश जारी रखा।

इसमें भगत सिंह कोश्यारी ने बकाया चुकाने की हैसियत न होने की बात कही तो फिर कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि क्यों न उनकी संपत्ति की जांच करा ली जाए। हाईकोर्ट में जब सरकार तथ्यों और तर्कों के आधार पर कुछ न कर पाई तो भगत सिंह कोश्यारी के लिए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों का बकाया माफ करने और सुविधाएं जारी रखने के लिए अध्यादेश ले आए। अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि कैबिनेट में गुपचुप निर्णय करके अध्यादेश को मंजूरी के लिए राजभवन भेज दिया गया था। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला सहित अन्य सुविधाएं देने के मामले में सरकार ने राज्य का एक्ट नहीं बनाया।

सरकार ने उत्तर प्रदेश का एक्ट लागू करना स्वीकार किया लेकिन उसे संशोधित नहीं किया। पिछले वर्ष कोर्ट में दिए गए हलफनामे में लागू एक्ट में लखनऊ का उल्लेख कर दिया, जबकि उत्तर प्रदेश के अधिनियम में साफ तौर पर अंकित था कि सुविधा सिर्फ लखनऊ में दी जा सकती है। इसलिए राज्य सरकार को यह स्वीकार करना पड़ा कि उत्तराखंड में इस संबंध में कोई अधिनियम प्रभावी नहीं है।

राज्य बनने पर उत्तराखंड में निष्प्रभावी हो गया था यूपी का अधिनियम

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि 1981 में यूपी में बने अधिनियम में साफ उल्लेख था कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों को पद पर बने रहने तक सरकारी आवास मुफ्त मिलेगा। पद से हटने के 15 दिन में उन्हें आवास खाली करना होगा। 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नियम में बदलाव कर कहा कि अब पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास आवंटित किया जाएगा।

एक्ट में यह भी उल्लेख था कि आवास सिर्फ लखनऊ में ही दिया जाएगा, बाहर नहीं। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड बनने के बाद यह नियम यहां निष्प्रभावी हो गया। राज्य सरकार ने यूपी के एक्ट को उत्तराखंड के लिए मोडिफाई नहीं किया लेकिन कोर्ट में बताया कि सरकार ने 2004 में लोकसेवकों को प्रतिमाह एक हजार रुपये किराये पर आवास देने के रूल्स बनाए थे। इसमें कहा गया कि ट्रांसफर होने के बाद अधिकतम तीन माह तक लोकसेवक आवंटित आवास में रह सकते हैं, फिर हर हाल में खाली करना होगा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि रूल्स सरकारी लोक सेवकों के लिए है, यह पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लागू नहीं हो सकता।

बाजार दर से अभी तक किसी भी पूर्व सीएम ने जमा नहीं किया बकाया
अधिवक्ता ने बताया कि बाजार दर में अभी तक किसी ने भी बकाया जमा नहीं किया है। पूर्व सीएम डॉ. निशंक व विजय बहुगुणा ने किराया जमा करने की बात कही थी मगर यह किराया बाजार दर के हिसाब से नहीं जमा किया गया है। पहले शपथपत्र में सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि राज्य कैबिनेट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों पर बकाया माफ करने का निर्णय लिया है। जब याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की दलील पर कोर्ट ने कैबिनेट निर्णय की प्रति मांगी तो पता चला कि कैबिनेट ने हाईकोर्ट से किराया माफ करने की प्रार्थना का उल्लेख किया था। इसके लिए सरकार ने गलती स्वीकारी।

यूपी में लागू ऐसे ही अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट 2016 में कर चुकी है निरस्त
सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवासीय व अन्य सुविधाएं देने के लिए 1997 में लागू अधिनियम को असांविधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया था। अधिवक्ता का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरे राज्य में लागू होता है। सरकार ने हलफनामे में यह नहीं बताया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा जनहित में किए गए कार्य कैसे अमूल्य सेवा का हिस्सा बन गए। राज्य 48 हजार करोड़ के वित्तीय घाटे में है और तेल नहीं होने की वजह से एंबुलेंस खड़ी हैं, ऐसे में पूर्व सीएम से पूरी राशि वसूल की जानी चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed