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हाईकोर्ट ने लिया धुमाकोट बस हादसे का संज्ञान, अधिकारियों से 20 जुलाई तक जवाब पेश करने को कहा

Thu, 05 Jul 2018 09:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Updated Thu, 05 Jul 2018 09:43 AM IST
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uttarakhand high court Cognition on dhumakot bus accident
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पौड़ी गढ़वाल के बमसैंण धुमाकोट में 48 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत के मामले में संज्ञान लिया है।

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कोर्ट ने परिवहन सचिव, उत्तराखंड ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, आयुक्त गढ़वाल, रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी पौड़ी व देहरादून, आयुक्त कुमाऊं, ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी अल्मोड़ा  व हल्द्वानी, डीआईजी गढ़वाल व डीआईजी कुमाऊं से 20 जुलाई तक जवाब पेश करने को कहा है। मुख्य न्यायधीश केएम जोसेफ व न्यायमूर्ति शरद  शर्मा की खण्डपीठ ने मामले में जवाब मांगते हुए अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तिथि नियत की है।

मुख्य न्यायधीश ने इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए समाचार पत्रों में छपी खबरों को आधार मानकर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने 'इन द मैटर ऑफ प्रिवेंशन एंड रेगुलेशन ऑफ द किलर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम ऑफ उत्तराखंड लीव्स' के नाम से जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि धुमाकोट पौड़ी गढ़वाल में 1 जुलाई 2018 को बस संख्या यूके12पीए0159 ओवर लोडिंग के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी। जिसमे 61 यात्री सवार थे इनमें से 48 लोगों की मौत हो गयी थी, जिनमें 10 बच्चे और 16 महिलाएं भी थे। कोर्ट ने इस हादसे का मुख्य कारण ओवर लोडिंग व मार्ग की खराब स्थिति को माना है।
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कोर्ट ने यह भी माना है कि 28 सीटर बस में 61 लोगों को सवारी कराना बड़ी दुर्घटना को न्यौता देना है जो हुआ भी। ये कमी परिवहन विभाग की है। दुर्घटना में सरकारी मशीनरी फेल रही व समय पर प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाया। कुछ ही समय पूर्व न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खण्डपीठ ने भी ओवर लोडिंग पर रोक लगाने के लिए आदेश दिए थे परन्तु सरकार ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाये।
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वहीं कोर्ट ने अमर उजाला में प्रकाशित बस दुर्घटना संबंधी खबर का भी संज्ञान लिया है। जस्टिस राजीव शर्मा ने परिवहन आयुक्त और परिवहन सचिव को कोर्ट में तलब किया। अमर उजाला की खबर पढ़कर कोर्ट ने ओवरलोडिंग तत्काल रोकने के निर्देश दिए और प्रदेश की समस्त बार एसोसिएशनों के सदस्यों से कहा कि वे इस पर नजर रखें ।


कोर्ट ने संविदा पर तैनात चालकों और परिचालकों की सेवा नियमावली नियमित कर्मियों की भांति किये जाने के निर्देश दिए। बसों को केवल निर्धारित ढाबों पर ही रोकने के निर्देश दिए। रोडवेज़ और निजी बस चालकों की आंखों की 15 दिन के भीतर जांच करने के निर्देश दिए। वहीं सीएमओ को रात्रि में चालकों के शराब पिये होने की जांच को विशेष दस्ते गठित करने के निर्देश दिए हैं। 

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