एनआईटी को लेकर सरकार के रुख से हाईकोर्ट नाराज, पूछा कोर्ट को क्यों नहीं दी जानकारी
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एनआईटी के मामले में हाईकोर्ट की नाराजगी का सामना प्रदेश सरकार ने बुधवार को एक बार फिर किया। सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि राष्ट्रीय महत्व के इस संस्थान को सुमाड़ी में ही रहने देने की संभावना तलाश की जा रही हैं।
इस पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने पलट कर पूछा कि सरकार का यह विचार है तो कोर्ट को इसकी जानकारी प्रार्थना पत्र देकर क्यों नहीं दी।
एनआईटी के पूर्व छात्र जसवीर की याचिका पर सुनवाई के दौरान पूर्व में हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार का यही रवैया रहा तो राष्ट्रीय महत्व का संस्थान प्रदेश से बाहर चला जाएगा। कोर्ट ने उस समय पूछा था कि एनआईटी को प्रदेश से बाहर शिफ्ट न होने देने के लिए सरकार क्या कर रही है।
इसी के जवाब में बुधवार को प्रदेश सरकार ने कोर्ट में केंद्र सरकार के साथ बैठक का हवाला दिया और कहा कि एनआईटी को सुमाड़ी में ही रहने देने की संभावना तलाश की जा रही है।
याची जसवीर का कहना था कि एनआईटी को हाइवे के किनारे स्थापित किया गया है। इससे कई छात्र तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ रहे हैं। संस्थान का अपना परिसर नहीं है और सरकार की उपेक्षा का ही सबब है कि संस्थान में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को जयपुर एनआईटी में प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।
पूर्व में इसी मामले में श्रीनगर के सुमाड़ी, नियाल सहित अन्य गांवों के लोगों ने पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी। इनका कहना था कि संस्थान के लिए उन्होंने अपनी जमीन दान में दी और अब सरकार इस संस्थान को मैदान में ले जाने का प्रयास कर रही है। इसी पर पूर्व में कोर्ट ने कहा था कि सरकार का यही हाल रहा तो यह संस्थान उत्तराखंड के हाथ से निकल जाएगा।