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उत्तराखंड स्वास्थ्य नीति 2020: केरल और सिक्किम की तर्ज पर हेल्थ मॉडल बनाए उत्तराखंड

Sun, 11 Jul 2021 04:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 11 Jul 2021 04:12 PM IST
सार

जलवायु परिवर्तन का उत्तराखंड में लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है लेकिन राज्य में जलवायु परिवर्तन और जन स्वास्थ्य अब तक प्रमुख मुद्दे नहीं बन पाए हैं।

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Uttarakhand Health Policy 2020: uttarakhand should build a health model on basis of Kerala and Sikkim
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

उत्तराखंड स्वास्थ्य नीति 2020 के ड्रॉफ्ट और जलवायु परिवर्तन पर राज्य की कार्य योजना का विश्लेषण कर सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन (एसडीसी) ने फैक्ट शीट जारी की है। जिसमें संस्था की ओर से सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं में निजीकरण को बढ़ावा देेने के बजाय केरल और सिक्किम की तर्ज पर हेल्थ मॉडल बनाने का सुझाव दिया है। 

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संस्था का कहना है कि जलवायु परिवर्तन का उत्तराखंड में लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है लेकिन राज्य में जलवायु परिवर्तन और जन स्वास्थ्य अब तक प्रमुख मुद्दे नहीं बन पाए हैं। एसडीसी फाउंडेशन ने इस मामले में उत्तराखंड स्वास्थ्य नीति के ड्राफ्ट 2020 और जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्य योजना 2014 को आधार बनाकर फैक्टशीट जारी की गई है।
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जिसमें सुझाव दिया गया कि जलवायु परिवर्तन मलेरिया, डेंगू, दस्त, हैजा, चिकनगुनिया जैसे वैक्टीरिया जनित संक्रमण के रूप में बदलाव का कारण बन सकता है। इसमें खाद्य चक्रों को बदलने की भी क्षमता है। जिससे भूख और कुपोषण बढ़ने और बच्चों का विकास बाधित होने की संभावना बनी रहती है। 
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संस्था ने फैक्टशीट में वायु प्रदूषण, वेस्ट मैनेजमेंट, पानी की कमी और भूस्खलन जैसे मुद्दों को उठाया है। इससे हृदय रोग, सांस संबंधी विकार और एलर्जी जैसी अनेक बीमारियों की संभावना बढ़ जाएगी। शहरी मलिन बस्तियों को कई तरह के संक्रमण का खतरा होगा। दूरदराज के क्षेत्रों में अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं, एंबुलेंस केंद्रों, संपर्क मार्गों आदि पर इस तरह की घटनाओं का प्रतिकूल असर पड़ता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है।

एसडीसी ने जलवायु परिवर्तन और जन स्वास्थ्य के मुद्दे पर सरकार को सुझाव दिए हैं। जिसमें एयर एंबुलेंस, महामारी पर निगरानी, संक्रमण की स्थिति निपटने के लिए मजबूत प्रणाली विकसित करने, स्थानीय समुदायों को आदतों में बदलाव के लिए जागरूक करने, कचरा प्रबंधन और पानी का स्थायी प्रबंधन करने जैसे सुझाव शामिल हैं। 

यह उचित समय है जब हमें जन स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति गंभीर रवैया अपनाना चाहिए। हम इन दोनों चुनौतियों के लिए तैयार नहीं हैं। आने वाले चुनावों में सभी राजनीतिक दलों को इन मुद्दों पर अपना दृष्टिकोण साझा करने की जरूरत है। उत्तराखंड को भी केरल और सिक्किम जैसे राज्यों की तरह मजबूत समुदाय स्वास्थ्य प्रणाली को अपनाने की जरूरत है।

- अनूप नौटियाल, संस्थापक अध्यक्ष एसडीसी 
 
उत्तराखंड की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है। हम महिलाओं के अनुभवों की तरफ ध्यान देने में भी विफल रहे है। जबकि महिलाएं जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। उनके लिए स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करना सबसे कठिन होता है। इन दोनों मुद्दों को ध्यान में रखकर एक स्मार्ट नीति बनाने की जरूरत है।
- ऋषभ श्रीवास्तव, रिसर्च एंड कम्युनिकेशन प्रभारी एसडीसी फाउंडेशन

 

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