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उत्तराखंड: जमीन लीज पर देने से संबंधित अध्यादेश राजभवन से मंजूर, अधिसूचना जारी 

Wed, 20 Nov 2019 09:06 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 20 Nov 2019 09:06 AM IST
सार

  • भांग की खेती के लिए भूमि लीज पर देने का प्रावधान हटा तो मानीं राज्यपाल 
  • भूमि लीज पर देने और मैदानों में 12.5 एकड़ भूमि खरीद का रास्ता साफ 

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Uttarakhand Governor approves Ordinance for land lease
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

साढ़े बारह एकड़ से अधिक भूमि खरीद और 30 वर्ष के लिए भूमि लीज पर देने को लेकर चार माह से अटके अध्यादेश की राजभवन से मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी हो गई है। राज्य सरकार ने अध्यादेश में भांग (औद्योगिक हेंप) के लिए भूमि लीज पर देने का प्रावधान किया था, जिसपर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य की आपत्ति थी। इसी के चलते राजभवन ने अध्यादेश को रोक रखा था। आखिरकार सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और पिछली कैबिनेट बैठक में भांग की खेती के प्रावधान को हटा दिया गया। राजस्व विभाग ने मंगलवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। 

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प्रदेश में साढ़े बारह एकड़ से अधिक जमीन खरीद पर सीलिंग एक्ट के तहत प्रतिबंध है। उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 के अनुच्छेद 156 में यह प्रावधान है। पर्वतीय क्षेत्रों में यह व्यवस्था सरकार पहले ही खत्म कर चुकी है, लेकिन निवेश को बढ़ावा देने के लिए मैदानी क्षेत्रों में यह व्यवस्था समाप्त करने सरकार अध्यादेश लेकर आई थी। संशोधन प्रस्ताव में अनुच्छेद 156 में कृषि भूमि को बेमौसमी सब्जी, जड़ी बूटी, चाय बगान प्रसंस्करण तथा वैकल्पिक ऊर्जा (सौर ऊर्जा) 30 वर्ष  पर लीज पर देने की व्यवस्था की गई है।
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सरकार ने भांग की खेती के लिए भी भूमि लीज पर दिये जाने के प्रावधान को इसमें संशोधन के जरिये जोड़ा। राजभवन ने अध्यादेश से औद्योगिक हेंप प्रसंस्करण को हटाने के लिए अध्यादेश सरकार को लौटा दिया था, लेकिन सरकार ने हटाए बिना दोबारा अध्यादेश राजभवन भेज दिया। इसके बाद राजभवन ने अध्यादेश को रोक दिया। आखिर सरकार ने 13 नवंबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में भांग की खेती को प्रावधान को अनुच्छेद 156 से हटा दिया। इसके बाद राजभवन ने सोमवार को अध्यादेश मंजूर कर राजस्व विभाग को लौटा दिया है, जिसकी अधिसूचना जारी हो गई है।  
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सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट से सर्वाधिक प्रभावित 
राजभवन के अध्यादेश रोकने से प्रदेश के सौर ऊर्जा के प्रस्तावित प्रोजेक्टों सर्वाधिक प्रभावित हुए। लगभग आठ सौ करोड़ के छोटे प्रोजेक्टों को सरकार मंजूरी दे चुकी है, जिसके लिए प्रोजेक्ट लगाने वालों को लीज पर भूमि की आवश्यकता है। अध्यादेश को मंजूरी नहीं मिलने से सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित करने की योजना प्रभावित हो रही थी।


मैदानों में 12.5 एकड़ से अधिक भू खरीद संभव
अध्यादेश को मंजूरी मिलने के बाद मैदानी जिलों में 12.5 एकड़ से अधिक भूमि खरीद हो सकेगी। औद्योगिक निवेश के लिए अब कोई भी निजी भूमि मालिकों से भी भूमि ले सकेगा। पर्वतीय जनपदों में 12.5 एकड़ भूमि खरीद का प्रावधान सरकार पहले ही कर चुकी है।  

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