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पूर्व मुख्यमंत्री बकाया किराया मामला: हाइकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण करवाने के बाद सरकार लेगी निर्णय
Thu, 11 Jun 2020 11:01 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 11 Jun 2020 11:01 PM IST
सार
- पूर्व मुख्यमंत्रियों को बकाया भुगतान में राहत देने का अध्यादेश हाईकोर्ट ने ठहराया है असंवैधानिक
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- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधा पर खर्च माफ करने के अधिनियम को असंवैधानिक करार देने के फैसले का प्रदेश सरकार विधिक परीक्षण करवाएगी। सरकार विधि विभाग के परामर्श के बाद हाइकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर अंतिम निर्णय लेगी।
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कोर्ट ने फैसला दिया है कि अधिनियम के प्रावधान शक्तियों को अलग करने के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। अधिनियम को संविधान के अनुच्छेद 202 से 207 का भी उल्लंघन करार दिया है।
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कोर्ट ने कहा है कि सभी पूर्व सीएम को सुविधाओं का बकाया बाजार दर भुगतान करना होगा। सरकार को इसके लिए कार्रवाई करनी होगी। पूर्व मुख्यमंत्रियों के रूप में दी गई सभी सुविधाओं के लिए खर्च किए गए धन की गणना करने के लिए के लिए भी सरकार को उत्तरदायी बनाया है।
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देहरादून की रूरल लिटिगेशन संस्था ने राज्य सरकार के उस अध्यादेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी। प्रदेश सरकार अब इस फैसले को लेकर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है, लेकिन इससे पहले विधिक परीक्षण करवाया जाएगा।
शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण करवाया जा रहा है। विधि विभाग के परामर्श के बाद सरकार हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के संबंध में कोई निर्णय लेगी।