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Uttarakhand News: खर्च के मामले में सख्त होगी अब प्रदेश सरकार, तय होगी विभागों की जिम्मेदारी

Fri, 24 Feb 2023 10:11 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 24 Feb 2023 10:11 PM IST
सार

नए वित्तीय वर्ष से सरकार यह कोशिश करेगी कि पहली तिमाही की धनराशि विभागों को शीघ्रता से प्राप्त हो जाए। मानसून से पहले धनराशि होने से विकास कार्यों की रफ्तार में तेजी तो आएगी साथ धनराशि का भी अधिकतम उपयोग होगा। इसके लिए विभागों से पहले ही योजनाएं मांगी जा रही है।

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Uttarakhand government will be strict in matter of expenditure responsibility of departments will be fixed
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नए वित्तीय वर्ष में सरकार बजट स्वीकृत होने के बाद भी खर्च न करने के मामले में सख्त कदम उठाएगी। इसमें विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी। पिछले चार वर्ष के बजट खर्च के आंकड़े तस्दीक कर रहे हैं कि सरकार के कुछ महकमों ने खर्च के मामले में कुछ ज्यादा कंजूसी बरती।

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इसके चलते 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि नहीं खर्ची जा सकी। लाजिमी है कि इससे राज्य के विकास कार्यों को गति मिलती और सुविधाओं का विस्तार होता। वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के मुताबिक, जारी वित्तीय वर्ष में सरकार की पूरी कोशिश है कि जितनी धनराशि स्वीकृत जा रही है, वो पूरी खर्च हो।
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सरकार बना रही है ये रणनीति

अपर मुख्य सचिव वित्त आनंद बर्द्धन बजट खर्च की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। बकौल बर्द्धन, नए वित्तीय वर्ष से सरकार यह कोशिश करेगी कि पहली तिमाही की धनराशि विभागों को शीघ्रता से प्राप्त हो जाए। मानसून से पहले धनराशि होने से विकास कार्यों की रफ्तार में तेजी तो आएगी साथ धनराशि का भी अधिकतम उपयोग होगा। इसके लिए विभागों से पहले ही योजनाएं मांगी जा रही है।

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समय पर नहीं हुआ अनुमोदन तो जिला योजना का बजट कटेगा
जिला योजना के बजट खर्च को लेकर भी सरकार गंभीर है। जनवरी से मार्च महीने के बीच जिला योजना का अनुमोदन अनिवार्य किया जा सकता है। अप्रैल और मई माह में यदि जिला योजना का बजटीय अनुमोदन नहीं होता है तो 10-10 प्रतिशत कटौती भी हो सकती है। साथ ही मुख्यमंत्री को अनुमोदन का अधिकार दिया जा सकता है। इससे विकास कार्यों की गति प्रभावित नहीं होगी।
 

दिसंबर तक 58.85 फीसदी खर्च
वित्तीय वर्ष 2022-23 के 71,011.92 करोड़ के बजट के सापेक्ष दिसंबर महीने तक विभागों को 41790.93 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की गई। इसमें से 29412.89 करोड़ रुपये खर्च हुए। यानी 58.85 प्रतिशत धनराशि खर्च हुई। फरवरी तक खर्च का औसत 70 फीसदी के आसपास बताया जा रहा है।
इंसेट

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पिछले चार बजट की धनराशि जो बगैर खर्चे रह गई

वित्तीय वर्ष बजट प्रावधान स्वीकृत खर्च नहीं हुआ
2018-19 47884.29 32829.05 3,287.58
2019-20 51145.29 37349.12 4,364.97
2020-21 57590.76 41677.67 4,514.66
2021-22 64471.81 45791.36 5,736.39 

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