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सियासतनामा: कुछ बने काम तो कहीं पर नाकाम, भाजपा हुई मजबूत तो कांग्रेस में पड़ी फूट

Tue, 14 Jan 2020 06:11 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/हल्द्वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/हल्द्वानी Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 14 Jan 2020 06:11 PM IST
सार

  • भाजपा सरकार के पौने तीन साल के कार्यकाल में कुछ योजनाएं परवान चढ़ीं तो तमाम पर काम होना बाकी
  • भाजपा सांगठनिक रूप में हुई मजबूत तो कांग्रेस जूझ रही अंतर्विरोधों से

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Uttarakhand government Three years: bjp and congress Political Progress Analysis
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

प्रदेश में भाजपा की सरकार को तीन साल होने को हैं। इस अवधि में कुमाऊं में राजनीतिक-संगठनात्मक रूप से सत्ताधारी दल जनता के बीच पकड़ बनाने में सफल होता दिखा तो गुटों में बंटा विपक्ष लोगों का विश्वास हासिल करने में विफल रहा। विधानसभा चुनाव के बाद निकाय चुनाव हों या लोकसभा के चुनाव या फिर पंचायत चुनाव हर जगह भाजपा ने बढ़त हासिल की और कांग्रेस अपने ही अंतरविरोधों से जूझती रही।

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हालांकि प्रशासनिक स्तर और विकास के मोर्चे पर डबल इंजन वाली भाजपा सरकारों से लोगों ने जितनी उम्मीदें लगाईं थीं, उनको पूरा करने की दिशा में प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। इसके बावजूद कुछ बड़ी योजनाओं पर काम का रफ्तार पकड़ना भाजपा के लिए सुकून देने वाला रहा।
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सरकार के अब तक के कार्यकाल में महत्वाकांक्षी जमरानी बांध योजना को लेकर खासी प्रगति हुई है। भूमि से लेकर वित्त संबंधी दिक्कतों को दूर किया गया है। साथ ही स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए केंद्र सरकार से बजट को हरी झंडी मिली है।
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ऊधमसिंह नगर जिले में ढाई सालों में सड़कें बनने के साथ ही पंतनगर एयरपोर्ट से उड़ान योजना की शुरुआत हुई। इन्वेस्टर समिट में 22 उद्योगपतियों ने उद्योगों का एमओयू साइन किया।

कई ऐसे काम भी हैं, जिनमें लोगों की उम्मीदें पूरी नहीं हुई

निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के लिए पखवाड़े पूर्व ही बजट की व्यवस्था हुई है। ईएसआई अस्पताल खुला। किच्छा में मॉडल डिग्री कॉलेज, खटीमा में सौ बेड का अस्पताल और केंद्रीय विद्यालय शुरू हुआ। चंपावत में नंधौर अभयारण्य का विकास, बारहमासी मार्ग का निर्माण, डॉक्टर्स हॉस्टल, रोडवेज बस स्टेशन, कूर्म सरोवर, डिक्टेश्वर सरोवर की मंजूरी, कोलीढेक झील के काम की शुरुआत, बागेश्वर में बागनाथ मंदिर से नुमाइशखेत तक सरयू नदी पर झूला पुल निर्माण, पिथौरागढ़  के नैनीसैनी एयरपोर्ट से देहरादून और हिंडन के लिए विमान सेवा शुरू होना, 30 किमी लंबी ऑलवेदर सड़क का निर्माण और आंवलाघाट पेयजल योजना, मल्टी स्टोरी पार्किंग का निर्माण आदि इस सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हैं।

कई ऐसे काम भी हैं, जिनमें लोगों की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं। कुमाऊं के सबसे बड़े शहर हल्द्वानी में रिंगरोड की योजना अभी फाइलों में ही है, तो आईएसबीटी के लिए देखी गई तीनपानी की जमीन का हस्तांतरण अभी तक नहीं हो सका है। मेडिकल कॉलेज में बेडों की संख्या बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर बनाने प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है। रुद्रपुर में हाईवे से ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं हट सका। ढाई सालों में जिले में 151 घोषणाएं हुईं लेकिन काम गिनी चुनी योजनाओं पर ही हुआ। चंपावत में जेल और हेलीपैड का काम भी आगे नहीं बढ़ सका है। चंपावत पुनर्गठन पेयजल योजना के काम की गति भी सुस्त है। अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज, अंतर्राज्यीय बस अड्डा, फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट अस्तित्व में नहीं आ सका।

बागेश्वर को जिला सहकारी बैंक, दुग्ध समिति, जेल नहीं मिल सकी है। जिले में बेस अस्पताल का निर्माण, उत्तरायणी मेले को राज्य मेले का दर्जा, सीवर लाइन बनाने का काम, स्पोर्ट्स स्टेडियम, कांडा का नर्सिंग कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय का भवन, बागेश्वर डिपो को 50 बसें दिलाने की घोषणा अब तक पूरी नहीं हुई है।

भाजपा सांगठनिक रूप में हुई मजबूत, अंतर्विरोधों से जूझ रही कांग्रेस 

सियासी रूप से भाजपा ने अपना दबदबा बनाए रखा। हालांकि पंचायत चुनावों में कांग्रेस ने अल्मोड़ा में दमदार प्रदर्शन कर लाज बचाई। यहां जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट के साथ ही ब्लाक प्रमुख की 11 सीटों में से छह सीटों पर कब्जा कर लिया।  

संगठन की दृष्टि से देखें तो भाजपा पूरे कुमाऊं मंडल में बूथ स्तर तक काफी मजबूत है। भाजपा ने इन ढाई वर्षों में लगातार कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाए रखा। पार्टी ने ग्रामीण स्तर तक पहुंच बढ़ाई। वहीं अब सीएए को लेकर भी भाजपा अभियान छेड़े हुए है ताकि लोगों की इस कानून को लेकर शंकाओं को दूर कर सके।

कांग्रेस ने भी 2022 के लिए तैयारी कर रही कांग्रेस केंद्र और राज्य सरकार की नाकामियों को सूचीबद्ध कर रही है। महंगाई, बेरोजगारी, चौपट होती अर्थव्यवस्था, बदहाल सड़कें और स्वास्थ्य सेवाओं समेत अन्य मुद्दों पर कांग्रेस रणनीति बना रही है।

योजना यह है कि ब्लाक के पदाधिकारी और कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से सरकार के काम के लिए नंबर देने को कहेंगे। इसके पूरा होने के बाद बड़े नेता इस बात पर मंथन करेंगे कि आखिर सरकार को लेकर आम जनता क्या सोचती है। साथ ही 2020 और 2021 में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में बड़े नेताओं को बुलाकर जनसभाएं के माध्यम से सरकार पर हमला बोला जाएगा। 

क्षेत्रीय दल भी जनता में पकड़ नहीं बना सके

अब तक तो कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल 2017 से अब तक कोई खास दबाव सरकार पर नहीं डाल पाए। महंगाई से लेकर लोगों से जुड़े अधिकतर मुद्दों पर कांग्रेस की आवाज बेदम रही। शुरुआती दो वर्षो में तो कांग्रेस सड़क पर भी उतरने से हिचकती रही। पिछले साल पार्टी ने कुछ हिम्मत जरूर दिखाई, लेकिन यहां भी कांग्रेस की धड़ेबाजी साफ नजर आई।

चुनावों में लगातर खराब परफारमेंस के बाद भी कांग्रेसी दिग्गजों का अंतर्द्वंद्व खत्म नहीं हुआ और समय-समय पर एक दूसरे की टांग खींचने का कोई मौका नहीं छोड़ा। महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेसी दिग्गज सिर्फ पत्रकार वार्ता तक ही सीमित रहे और पार्टी के अंदर से ही मित्र विपक्ष जैसी आवाजें उठनी लगीं।

उक्रांद सहित अन्य क्षेत्रीय दल भी जनता के बीच अपनी पकड़ नहीं बना सके। द्वाराहाट विधानसभा क्षेत्र को छोड़ दें तो कुमाऊं में यूकेडी का भी नाममात्र का ही जनाधार रह गया है। हाल में हुए पंचायत चुनावों में यूकेडी ने अल्मोड़ा में जिला पंचायत उपाध्यक्ष समेत जिला पंचायत की चार सीटें जीतीं।

उक्रांद के पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी कहते हैं कि आने वाले दिनों में संगठन को मजबूत बनाने के प्रयास किए जाएंगे। उपपा और उलोवा के संगठन भी ब्लाक और गांव स्तर तक जड़ नहीं जमा सके हैं। इनकी गतिविधियां बैठकों, छिटपुट धरना-प्रदर्शनों तक सीमित हैं। संगठन स्तर भी ये दल कमजोरी को दूर नहीं कर पा रहे हैं। 

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