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'दिल पर पत्थर' रख CM ने कर्मचारियों पर लगाया एस्मा

Mon, 03 Nov 2014 09:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 03 Nov 2014 09:21 PM IST
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uttarakhand government take action against ministerial employee

उत्तराखंड में कलक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मियों की हड़ताल के मद्देनजर राज्य सरकार ने प्रदेश में एस्मा लागू कर दिया है। लेकिन प्रथम चरण में बुधवार तक नो वर्क नो पे का फार्मूला अपनाया गया है।

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यदि गुरुवार को कर्मी काम पर नहीं लौटे तो फिर कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस बीच यदि बातचीत से समाधान हो जाता है तो ठीक है वर्ना अगली कार्रवाई के तहत वैकल्पिक व्यवस्था कर टर्मिनेशन की कार्रवाई होगी।
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मुख्य सचिव नागरान रविशंकर ने सभी विभागों को भेजे गए आदेश में स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेश के क्रम में एस्मा को लागू कर दिया गया है।

पहले तीन दिन यानि बुधवार तक का समय नो वर्क नो पे का होगा। यह माना गया है कि इस दौरान यदि हड़ताली वापस आ गए तो आदेश वापस ले लिया जाएगा। लेकिन यदि काम पर नहीं लौटे तो फिर राहत मिलना मुश्किल है।
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मुख्य सचिव ने विभागों को भेजे आदेश में कहा कि हड़ताल व कार्य बहिष्कार पर रहने वाले कर्मियों का वेतन भुगतान ना करे और आहरण वितरण अधिकारी, कोषागार को भी अवगत कराएं।

लगेगा एक महीने का फटका

uttarakhand government take action against ministerial employee

कार्य बहिष्कार के दौरान कार्यालयों में तालाबंदी करने वाले या इस कृत्य के लिए प्रेरित करने वाले कर्मियों के विरुद्ध आचरण नियमावली 2002 के तहत कार्रवाई होगी।

हड़ताल या कार्य बहिष्कार की अवधि को किसी भी तरह के अवकाश में शामिल नहीं किया जाएगा। जो कर्मचारी इस दौरान काम पर आते है उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाए।

प्रत्येक जिलाधिकारी, कार्यालय अध्यक्ष व विभागाध्यक्ष अपने कार्यालय में उपस्थिति की जांच करे और जो कर्मी गैर हाजिर है उन्हें हड़ताल पर माना जाए। इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दास्त नहीं की जाएगी।

नो वर्क नो पे विधिवत लागू होने के बाद हड़ताली कर्मियों को पिछले एक महीने का वेतन भी नहीं मिलेगा। मुख्य सचिव ने बताया कि जितने दिन काम नहीं किया उतने ही दिन का वेतन नहीं मिलेगा। इस बार यदि हड़ताल वापस भी होती है तो भी हड़ताल की अवधि को उपार्जित या अन्य श्रेणी में अवकाश में नहीं गिना जाएगा।

अप्रिय फैसला लेने को मजबूर: सीएम
हड़ताली कर्मचारियों पर एस्मा लगाने को मुख्यमंत्री ने अप्रिय फैसला बताया। उनका कहना है कि वे खुद कर्मचारी नेता रहे हैं लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों से बंधे हुए हैं और कर्मचारियों ने उनकी अपील भी नहीं मानी है। ऐसे में कोर्ट के आदेशों का पालन कराना सरकार का कर्तव्य है। सीएम ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार से जितना संभव है वो कर रही है लेकिन हमें अपनी क्षमता और संसाधन भी देखने चाहिए।

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