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ये क्या किया सरकार? एक तरफ 'इनाम' तो दूसरी तरफ सजा

Thu, 27 Aug 2015 11:50 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 27 Aug 2015 11:50 AM IST
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uttarakhand government start action on police rebel.

‘मिशन आक्रोश' के मामले में बुधवार को ओर मुख्यमंत्री हरीश रावत पुलिसकर्मियों को इंक्रीमेंट-एरियर देने का ऐलान कर रहे थे तो दूसरी ओर इसी प्रकरण में प्रदेश भर में मुकदमे और गिरफ्तारियां चल रहीं थीं।

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मुख्य सचिव राकेश शर्मा के बयान, न एक्शन न एरियर के बिल्कुल ठीक उलट। एरियर और मुकदमे दोनों कार्रवाई एक साथ, क्या यही टाइमिंग होनी चाहिए थी?

यह घटनाक्रम एक बार फिर सवाल छोड़ गया कि आखिर कौन है सरकार का सलाहकार? वह सरकार को समस्या से निकालना चाहता है या सरकारी खजाने पर करोड़ों का बोझ डलवाकर और उलझाना। इस प्रकरण में घटनाक्रम गवाह है कि पुलिस जवानों के आक्रोश को लेकर सरकार के किसी भी नुमाइंदे की बात कायम नहीं रही।

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कहीं सरकार को उलझाने की कोशिश तो नहीं?

uttarakhand government start action on police rebel.

कुछ देर से ही सही बुधवार को सीएम ने एरियर देने का ठोस कदम उठाया तो अज्ञात सलाहकारों ने इतंजाम कर दिया कि सरकार इस फैसले से भी राहत न पा सके।

बुधवार को देहरादून, रुड़की सिविल लाइन कोतवाली, रुद्रपुर, हल्द्वानी कोतवाली के साथ ही उत्तरकाशी में आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हुए। गौरतलब है कि इसी दौरान शासन में नोशनल इंक्रीमेंट देने की कसरत चल रही थी।

उत्तरकाशी व हल्द्वानी में दो कांस्टेबल गिरफ्तार भी कर लिए गए। विकासनगर से भड़काने के आरोप में एक शिक्षक की गिरफ्तारी हो गई। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल जवानों को पीएचक्यू ने चिन्हित तो किया, लेकिन एफआईआर अज्ञात के नाम ही लिखी गई। 16 अगस्त को शुरू हुए पुलिस जवानों के मिशन आक्रोश को लेकर सरकार आखिर तक भ्रमित दिखी।

सीएस ने कहा था, 'न एरियर न एक्शन', हुआ उल्टा

uttarakhand government start action on police rebel.

मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने कार्रवाई और एरियर दोनों के लिए 19 अगस्त को ही स्पष्ट मना कर दिया था, लेकिन बुधवार को ठीक इसके उलट हुआ। मतलब बिल्कुल साफ था कि एरियर भी दिया और एक्शन भी कर दिया।

मुख्यमंत्री ने शुरू से ही कुछ भी स्पष्ट नहीं किया। वह पुलिसवालों को अपने बच्चे कहकर संबोधित करने के साथ ही भाजपा को कोसते रहे। प्रेसवार्ता में भी एक्शन के नाम पर मुख्यमंत्री ने यही कहा कि इस पर अभी कुछ नहीं कहना है।

अगर मान भी लें कि पुलिस जवानों के विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार पर कार्रवाई करने का भारी दबाव था, ताकि हुकूमत का इकबाल कुछ हद तक ही सही बरकरार तो रहे। क्या ऐसा सोचने का यह सही वक्त था?

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