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बजट से निराश हुए उत्तराखंड के एक लाख सरकारी अधिकारी-कर्मचारी

Thu, 02 Feb 2017 12:45 PM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 02 Feb 2017 12:45 PM IST
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uttarakhand government officers and employee are hopeless from budget 2017
- फोटो : file photo

उत्तराखंड में सातवें वेतनमान के तहत पहली सेलरी पाने वाले करीब 70 फीसदी से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी बजट घोषणा में इनकम टैक्स के स्लैब में राहत दिए जाने के बावजूद खासे निराश हैं। दरअसल, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद समूह-ग तक के लगभग सभी कर्मचारियों की सालाना आय पांच लाख से अधिक हो गई है और वित्त मंत्री ने पांच लाख से दस लाख तक के स्लैब में कोई राहत नहीं दी है।

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वित्त मंत्री ने करमुक्त आय की सीमा में मामूली बढ़ोत्तरी करते हुए, जहां उसे तीन लाख कर दिया है। वहीं, तीन से पांच लाख तक की आय दर्शाने वालों को दस के बजाए पांच फीसदी की दर से कर देना होगा। लेकिन अब यहां किसी भी सरकारी अधिकारी-कर्मचारी का वेतन पांच लाख से कम है ही नहीं। राज्य में इसी वर्ष से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू हुई हैं, जिसके बाद डेढ़ लाख से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोत्तरी हुई है। इसमें से दो तिहाई से ज्यादा यानी करीब एक लाख अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन सालाना पांच लाख से ज्यादा हो गया है।
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वित्त मंत्री के बजट भाषण पर गौर किया जाए तो उन्होंने इस तथ्य का उल्लेख किया है कि देशभर में 76 लाख लोग ऐसे हैं, जो पांच से दस लाख रुपये आय दिखाते हुए रिटर्न भरते हैं। इसमें भी 56 लाख लोग ऐसे हैं, जो वेतनभोगी वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, फिर भी उन्होंने पांच से दस लाख के टैक्स स्लैब में कोई फेरबदल नहीं किया। उन्हें अभी भी बीस फीसदी की दर से टैक्स देना होगा। आयकर के वरिष्ठ सलाहकार सीए विवेक खन्ना की मानें तो जब वित्त मंत्री खुद इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि देश की एक फीसदी आबादी ही रिटर्न दाखिल कर रही है। इनमें भी सर्वाधिक करदाता वेतनभोगी वर्ग से जुड़े हैं। यदि वे अपना रिटर्न दाखिल करके टैक्स भर रहे हैं तो उन्हें प्रोत्साहित करने की आवश्यकता थी।
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एक पेज के रिटर्न से चलेगा काम
बजट में यह प्रावधान भी किया गया है कि पहली बार रिटर्न दाखिल करने वाले ऐसे करदाताओं को केवल एक पेज का रिटर्न भरना होगा, जिनकी सालाना आय पांच लाख है। हालांकि व्यवसाय से हुई आय शामिल नहीं है। इन्हें यह सहूलियत भी मिलेगी कि इनके केस की तब तक स्क्रूटनी (आय की जांच-पड़ताल) नहीं होगी, जब तक कोई विशिष्ट सूचना आयकर विभाग के पास न हो। इसके अलावा वित्त मंत्रालय ने करदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए कोई खास प्रस्ताव तैयार नहीं किया है।


राज्य के अधिकतर कर्मचारियों को टैक्स दरों में हुए संशोधन का लाभ नहीं मिलेगा। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद समूह-ग तक के कर्मचारियों का सालाना वेतनमान पांच लाख रुपये से अधिक हो गया है। वित्त मंत्री को इस बारे में सोचने की आवश्यकता है।
- प्रहलाद सिंह, अध्यक्ष (राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद)

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