उत्तराखंड: सरकार ने बदले नियम, अब छोटे प्लॉट पर भी बन सकेंगी बड़ी इमारतें, जानिए खास बातें
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बडे़ स्तर पर अवैध प्लाटिंग की गंभीर समस्या से निबटने के लिए सरकार भूमि उपविधि 2011 में आमूल चूल परिवर्तन के साथ सामने आई है। प्रदेश में आवासीय जमीन की किल्लत को देखते हुए सरकार ने छोटे प्लॉट पर भी प्लाटिंग और ग्रुप हाउसिंग का रास्ता खोल दिया है। सरकार ने पहली बार ग्रुप हाउसिंग के नियमों को दो हिस्सों में बांट दिया गया है।
इसके अलावा, बेसमेंट, पार्किंग, लिंक रोड से लेकर तमाम अन्य मामलों में नियमों को शिथिल करते हुए एक सरलीकृत व्यवस्था बनाने का सरकार ने प्रयास किया है। सरकार ने माना है कि हर प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग बडे़ स्तर पर हो रही है।
उसे रोकने के लिए संशोधन जरूरी है। ताकि नियमों की जटिलता भी अवैध प्लाटिंग का आधार न बने। शहरी विकास और आवास मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि राज्य बनने के बाद पहली बार भू उपविधि में इतने बडे़ स्तर पर परिवर्तन किए गए हैं। इसके आने वाले समय में अच्छे नतीजे दिखाई देंगे।
भू-उपविधि में कुछ इस तरह के हुए हैं बदलाव
ग्रुप हाउसिंग:
अब ग्रुप हाउसिंग को दो श्रेणियों में बांट दिया गया है। इसमें प्लाटेड यानी भूखंड वाली और फ्लैट यानी आवासीय वाली ग्रुप हाउसिंग की व्यवस्था की गई है। पहले ये सब एक ही भाग में थे। नई व्यवस्था के अनुसार, मैदानी क्षेत्र में 1000 वर्ग मीटर में ग्रुप हाउसिंग हो सकेगी, जबकि पर्वतीय क्षेत्र में यह 500 वर्ग मीटर में संभव हो पाएगा। फ्लैट यानी आवासीय ग्रुप हाउसिंग मैदान और पर्वतीय क्षेत्र दोनों ही जगह 500-500 वर्ग मीटर के क्षेत्र में हो पाएगी।
सड़क चौड़ीकरण-
सड़क चौड़ीकरण के लिए यदि कोई व्यक्ति तीन मीटर जगह देता है, तो उसको 125 प्रतिशत ऊपर मंजिल बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। यह स्वैच्छिक होगा। कुछ राज्यों में अनिवार्य कर दिया गया है। ऊंचाई प्रतिबंधित होगी, तब भी यह छूट मिलेगी। यह छूट व्यवसायिक और निजी दोनों मामलों में लागू होगी।
लिंक मार्ग
यदि कुछ लोगों का किसी स्थान पर भूखंड है और उसमें से कोई लिंक मार्ग निकाला जाना प्रस्तावित है, तो एक रास्ता अधिग्रहण का है, लेकिन इसकी जगह एक सुविधा सरकार दे रही है। इसके अंतर्गत
अपनी जमीन यदि संबंधित लोग तीन मीटर छोड़ते हैं, तो उनको मार्ग की चौड़ाई के डेढ़ गुना तक ऊंचाई बढ़ाने की छूट मिलेगी। यदि तीन मीटर से अधिक उनकी जगह सड़क के लिए जाती है, तो डेढ़ गुना जमा एक मीटर ऊंचाई बढ़ाने की छूट होगी।
पार्किंग
पार्किंग बनाने में भी सुविधा दी गई है। ग्राउंड फ्लोर में संपूर्ण पार्किंग पर भवन में एक मंजिल बढ़ाया जा सकेगा।
ले आउट तैयार कराना
500 से 2000 वर्ग मीटर का ले आउट प्राधिकरणों से भी तैयार करवाया जा सकेगा। इसके लिए एक लाख रुपये प्रोसेसिंग फीस निर्धारित है। यदि कोई व्यक्ति इसका नक्शा भी बनाना चाहता है, तो इसके लिए भी एक लाख रुपये की फीस जमा करानी होगी, लेकिन कॉलोनी में बनने वाले फ्लैट को पास कराने की प्रक्रिया अपनी जगह रहेगी।
निर्धारित भवन इकाई घनत्व
बेसमेंट
बेसमेंट की नई व्यवस्था में साढे़ चार मीटर आगे और तीन मीटर पीछे छोड़ने के अलावा बाकी पूरे हिस्से का इस्तेमाल किया जा सकेगा। पहले की व्यवस्था में बेसमेंट में ज्यादा जगह छोड़ने की व्यवस्था थी। ग्रुप हाउसिंग कालोनियों में अभी पार्क बनाना अनिवार्य था, इसके लिए 500 से 2000 वर्ग मीटर का एरिया कालोनी से लिया जाता था। पार्क अब भी बनाने होंगे, लेकिन यदि किसी जगह पार्क बनाने के लिए जमीन नहीं है, तो सर्किल रेट का दस फीसदी प्राधिकरण में जमा कराने पर पार्क की अनिवार्यता से छूट मिल जाएगी। प्राधिकरण किसी अन्य स्थान पर पार्क बनाएगा।
भूखंड क्षेत्रफल इकाई संख्या
100 वर्ग मीटर से कम एक
100 से 300 वर्ग मीटर दो
300 से 500 वर्गमीटर तीन
500 वर्गमीटर से अधिक अधिकतम चार