फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand Government and Raj Bhavan have different opinions on the Women Reservation Bill

Uttarakhand: महिला आरक्षण विधेयक पर फंसा पेच, सरकार और राजभवन की राय अलग-अलग

Thu, 05 Jan 2023 07:00 AM IST
अलका त्यागी बिशन सिंह बोरा, देहरादून
बिशन सिंह बोरा, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 05 Jan 2023 07:00 AM IST
सार

उत्तराखंड विधानसभा में महिला आरक्षण बिल पास हुए एक महीने से अधिक का समय हो गया है लेकिन अब तक यह कानून नहीं बन पाया है। राजभवन गए 14 में से अधिकांश विधेयक मंजूर हो चुके हैं लेकिन महिला आरक्षण का मामला अभी लटका हुआ है।

विज्ञापन
Uttarakhand Government and Raj Bhavan have different opinions on the Women Reservation Bill
सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के विधेयक पर सांविधानिक पेच फंस गया है। इस पर सरकार और राजभवन की राय एक नहीं है। राजभवन के विधि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का कानून केवल देश की संसद में ही पारित हो सकता है।

विज्ञापन


उत्तराखंड विधानसभा में महिला आरक्षण बिल पास हुए एक महीने से अधिक का समय हो गया है लेकिन अब तक यह कानून नहीं बन पाया है। राजभवन गए 14 में से अधिकांश विधेयक मंजूर हो चुके हैं लेकिन महिला आरक्षण का मामला अभी लटका हुआ है। सूत्र बताते हैं कि महिला आरक्षण को लेकर राजभवन और सरकार के विधि सलाहकारों की बैठक भी हो चुकी है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया। 
विज्ञापन


Haldwani: आशियाना बचाने को देर रात तक चला दुआओं का दौर, सुप्रीम सुनवाई पर प्रभावितों के साथ प्रशासन की भी नजर
विज्ञापन
विज्ञापन


दरअसल, राज्य सरकार के लिए महिला आरक्षण एक राजनीतिक मुद्दा है लेकिन इसे सांविधानिक दर्जा देने में कई कानूनी पेच हैं। यही वजह है कि राज्य में महिला आरक्षण केवल शासनादेश से दिया जा रहा था। अब तक किसी भी सरकार ने इसे विधेयक के रूप में विधानसभा में लाने की हिम्मत नहीं की। पिछले साल हाईकोर्ट ने एक याचिका पर महिला आरक्षण को असांविधानिक बताकर इस पर रोक लगा दी थी। तब पहली बार धामी सरकार ने इसे कानूनी जामा पहनाने की कसरत शुरू की।

सूत्र बताते हैं कि सरकार के विधिक अधिकारियों ने चार पन्ने का नोट बनाया, जिसमें बताया गया कि क्यों राज्य सरकार महिलाओं को आरक्षण देने का कानून बना सकती है। इसी आधार पर विधायी विभाग ने इस विधेयक को ड्राफ्ट किया। विधानसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक राजभवन में अटक गया। राजभवन के विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कानून बनाने का अधिकार केवल देश की संसद को है। इसे राजभवन मंजूरी भी दे देता है तो देश की अदालतों में इसे चुनौती दी जा सकती है। ऐसे में राजभवन और सरकार को असहज होना पड़ सकता है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए राजभवन और सरकार के विधि अधिकारियों की कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि राजभवन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी इंतजार कर रहा है। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड महिला आरक्षण मामले में विचाराधीन एसएलपी पर फरवरी में सुनवाई होनी है लेकिन राजभवन पर दबाव है कि वह इस पर शीघ्र निर्णय ले। बहरहाल, राजभवन के सूत्रों के मुताबिक, महिला आरक्षण विधेयक पर कोई फैसला अगले हफ्ते तक हो सकता है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने का निर्णय लिया गया तो मामला फरवरी तक लटक सकता है।

एनडी तिवारी सरकार ने किया था आदेश
राज्य सरकार की नौकरियों में उत्तराखंड की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के लिए कांग्रेस की नारायण दत्त तिवारी सरकार ने 24 जुलाई 2006 को आदेश जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर हाईकोर्ट ने  आदेश पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ताओं के वकील की ओर से कहा गया था राज्य सरकार के पास राज्य के निवास स्थान पर आधारित आरक्षण प्रदान करने की शक्ति नहीं है। भारत का संविधान केवल संसद को अधिवास के आधार पर आरक्षण देने की अनुमति देता है। राज्य सरकार का वर्ष 2006 का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 का उल्लंघन है।  

11 विधेयकों को मिली मंजूरी, तीन शेष 
राजभवन को 14 विधेयक मंजूरी के लिए भेजे गए। इनमें से 11 को मंजूरी मिल गई है। जबकि महिला आरक्षण विधेयक, भारतीय स्टांप उत्तराखंड संशोधन विधेयक और हरिद्वार विश्वविद्यालय विधेयक को राजभवन से अभी मंजूरी नहीं मिली है। 

कूड़ा फेंका या थूका तो नहीं होगी जेल 
प्रदेश में अब सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकने या थूकने पर जेल नहीं होगी। उत्तराखंड कूड़ा फेंकना एवं थूकना प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक 2022 को राजभवन की मंजूरी मिल गई है।
प्रदेश में अधिनियम में यह व्यवस्था थी कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर कूड़ा फेंकता है या थूकता है तो उसे छह महीने का कारावास और 500 रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है। अब इस अधिनियम में बदलाव करते हुए इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। कूड़ा फेंकने या थूकने पर अब 500 के बजाय दो हजार रुपये जुर्माना लगेगा। यदि कोई व्यक्ति एक बार जुर्माना लगाने के बाद भी फिर से ऐसा करता है तो उसे हर बार दो हजार रुपये जुर्माना देना होगा।

विधेयक का परीक्षण किया जा रहा है। राजभवन की ओर से इस पर कानूनी राय ली जा रही है।
- डॉ. रंजीत सिन्हा, सचिव, राजभवन।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed