फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand government agree on gairsain

गैरसैंण पर सहज मगर राजधानी पर असहज है सरकार

Wed, 16 Nov 2016 10:46 AM IST
राकेश खंडूड़ी / अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 16 Nov 2016 10:46 AM IST
विज्ञापन
uttarakhand government agree on gairsain
हरीश रावत - फोटो : अमरउजाला

भराड़ीसैंण की नई नवेली विधानसभा में शुरू होने जा रहे विशेष सत्र के दौरान जब विपक्ष सरकार से सवाल पूछेगा तो कम से कम गैरसैंण के मुद्दे पर उसके पास अपनी उपलब्धियों का बखान करने के लिये काफी कुछ होगा। लेकिन जब मसला गैरसैंण से आगे राजधानी पर पहुंचेगा, तब मौजूदा सरकार भी उतनी ही असहज दिखेगी जितनी इससे पहले की सरकारें रहीं।

विज्ञापन


राज्य गठन से ही गैरसैंण पर्वतीय राज्य की राजधानी की अवधारणा का प्रतीक रही। मगर पहाड़ और मैदान की सियासत में गैरसैंण नेपथ्य में चला गया। भाजपा शासित अंतरिम सरकार से लेकर खंडूड़ी सरकार तक राजधानी का सवाल हाशिये पर रहा।
विज्ञापन


बेशक पहाड़ की राजधानी पहाड़ में बनाये जाने की हिमायती ये तर्क गढते रहे कि गढ़वाल और कुमाऊं के मध्य गैरसैंण में शिमला की तर्ज पर राजधानी बनने की पूरी संभावनाएं हैं। मगर देहरादून में बैठी सरकार को अब भी गैरसैंण पर संशय है। राजधानी के सवाल पर वह भी पिछली तमाम सरकारों की तरह से बचाव की मुद्रा में है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मगर गैरसैंण के मसले पर वह असहज नहीं है। बृहस्पतिवार को जब सदन की कार्यवाही आरंभ होगी तो विपक्ष, सरकार से यह सवाल जरूर पूछेगा कि गैरसैंण में करोड़ों रुपये खर्च करने का क्या औचित्य है? आखिर सरकार यहां क्या करने जा रही है? क्या गैरसैंण को राजधानी बनाया जा रहा है? कुल मिलाकर वह सरकार को उस (राजधानी के) सवाल पर फंसाने की कोशिश करेगा, जिससे वह खुद भी बचता आया है। इन सवालों पर सरकार चाहे जो तर्क पेश करे, लेकिन उसे असहज ही होना पड़ेगा।

इन सवालों से जुदा जब जिक्र गैरसैंण का छिड़ेगा तो सरकार के पास अपनी उपलब्धियों का बखान करने के लिये काफी कुछ है। करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के आरोपों के बीच वह सदन में ये खम ठोकती दिखेगी कि गैरसैंण उसने वो किया जो पहले कभी नहीं हुआ।


भराड़ीसैंण में विधानसभा की भव्य इमारत खड़ी करने के साथ-साथ वह गैरसैंण विकास प्राधिकरण के गठन और 50 करोड़ रुपये की स्वीकृति कराने का भी श्रेय लेना का प्रयास करेगी। कम से कम गैरसैंण के मुद्दे पर वह असहज होने की स्थिति में नहीं है। अलबत्ता राजधानी के सवाल पर वह पहले भी निरुत्तर थी और सदन में भी उसके पास शायद ही कोई तार्किक जवाब होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed