दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी पर उत्तराखंड की बेटी ने फहराया तिरंगा, लगाए जय हिंद के नारे
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उत्तराखंड की एक और बेटी देवयानी सेमवाल ने दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो को फतह करके अपना और देश का नाम रोशन किया है। आयुर्वेद में डॉक्टरी कर चुकीं देवयानी ने बेहद कठिन और जोखिमपूर्ण मानी जाने वाली इस चोटी पर पहुंच कर तिरंगा फहराया और जय हिंद के नारे लगाए। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को स्वतंत्रता दिवस को समर्पित किया है। पर्वतारोही दल में वे अकेली लड़की हैं।
उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से दुरूह पर्वतों को लांघने का कठिन प्रशिक्षण ले चुकी देवयानी का यह देश से बाहर पहला पर्वतरोहण अभियान था। अभियान की कामयाबी से उत्साहित देवयानी ने दक्षिण अफ्रीका से ‘अमर उजाला’ को बताया कि उनके अभियान का अब दूसरा लक्ष्य यूरोप का सबसे ऊंचा पर्वत एल्ब्रुस है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के छोटे से गांव मुखवा की रहने वाली देवयानी ने बताया कि 15 जुलाई को टीम लीडर नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में ‘मिशन पॉसिबल’ के तहत उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत की।
24 जुलाई की सुबह साढ़े सात बजे वे दक्षिण अफ्रीका की 5895 मीटर ऊंची चोटी किलिमंजारों तक पहुंचने में सफल रहीं। वहां पहुंचकर उन्होंने तिरंगा फहराया और जयहिंद के नारे लगाए। वे बहुत उत्साहित और रोमांचित हैं और खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें देश का गौरव बढ़ाने का अवसर मिला। उनकी टीम में हरियाणा से टीम लीडर नरेंद्र सिंह व यूपी के अनिल कुमार भी शामिल हैं।
बीएएमएस कर चुकी हैं देवयानी
देवयानी बीएएमएस की पढ़ाई पूरी कर चुकी है। उन्होंने हिमालय आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज देहरादून से स्नातक किया है। उनकी हाईस्कूल तक शिक्षा उत्तरकाशी में मसीह दिलासा स्कूल में हुई और 12वीं की पढ़ाई देहरादून के दून ग्लोबल स्कूल से की है।
दुनिया का सबसे ऊंचा मुक्त खड़ा पर्वत
दक्षिण अफ्रीका की पर्वत चोटी किलिमंजारो दुनिया का सबसे ऊंचा मुक्त-खड़ा पर्वत है और साथ की विश्व का चौथा सबसे उभरा पर्वत है, जो आधार से 5,882 मीटर या 19,298 फीट ऊंचा है। जानकारों की मानें तो इस पर्वत पर हर साल 25 हजार के करीब पर्वतारोहो चढ़ाई करने की कोशिश करते हैं और आधे ही सफल हो पाते हैं। कुछ लोग तो जान तक गंवा बैठे हैं।