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उत्तराखंडः आईएफएस संजीव समेत चार वन अधिकारी बने मुख्य वन संरक्षक, इस दिन से मिलेगी पदोन्नति
Tue, 24 Dec 2019 10:15 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 24 Dec 2019 10:15 AM IST
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वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी
- फोटो : फाइल फोटो
उत्तराखंड कैडर 2002 के वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी समेत चार वन संरक्षकों को शासन ने मुख्य वन संरक्षक पद पर पदोन्नति दी है। चार में से तीन अधिकारी इस समय कुमाऊं में तैनात हैं और एक अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में हैं।
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प्रमुख सचिव आनंद वर्द्धन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, एस.के पटनायक केंद्र में प्रतिनियुक्त है। वहीं डॉ.पराग मधुकर धकाते वन संरक्षक के रूप मेें पश्चिम वृत्त हल्द्वानी में तैनात और धकाते की पत्नी डॉ. तेजस्विनी अरविंद पाटिल नैनीताल दक्षिण वृत्त में वन संरक्षक के तौर पर कार्यरत है।
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उधर, वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी में वन संरक्षक के रूप में तैनात संजीव चतुर्वेदी को मुख्य वन संरक्षक बनाया गया है। 18 साल की सेवा पूरी होने पर एक जनवरी 2020 से इन अधिकारियों को पदोन्नति दी गई है। इसी के साथ दीप चंद्र आर्य और अखिलेश तिवारी को उप वन संरक्षक चयन श्रेणी में पदोन्नत किया गया है। उप वन संरक्षक प्रेम नारायण आर्य, भूपेंद्र प्रताप सिंह और कुबेर सिंह बिष्ट को वन संरक्षक बनाया गया है।
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भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग से बनाई पहचान
मुख्य वन संरक्षक बनाए गए संजीव ने वन विभाग के भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़कर अपनी अलग पहचान बनाई है। एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी रहते हुए भ्रष्टाचार के मामलों को सामने रखने के लिए संजीव सुर्खियों में आए थे। इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संजीव को मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात करने की मांग की थी।
हालांकि, केंद्र सरकार ने इस मांग को ठुकरा दिया था। इसके बाद संजीव की ही एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी संजीव की याचिका पर केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। दिल्ली में एक साल तक खाली रहने के बाद संजीव को उत्तराखंड वन अनुसंधान में नियुक्ति दी गई थी।