राज्य स्थापना के 21 साल: राज्य निर्माण आंदोलन में रही अहम भूमिका, लेकिन महिलाओं के लिए नहीं बन पाई कोई नीति
Uttarakhand Foundation Day Today: उत्तराखंड राज्य गठन के इन 21 वर्षों में राज्य ने नए आयाम स्थापित हुए पर आधी आबादी के लिए कोई नीति नहीं बन पाई है।
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उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में महिलाओं की अहम भूमिका रही। संघर्षों की बदौलत नौ नवंबर 2000 को देश के 27वें राज्य के रूप में उत्तरांचल राज्य का गठन हुआ और वर्ष 2007 में इसका नाम बदलकर उत्तराखंड किया गया। गठन के इन 21 वर्षों में राज्य ने नए आयाम स्थापित हुए पर आधी आबादी के लिए कोई नीति नहीं बन पाई है।
रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क के सवाल पर वर्ष 1994 में राज्य आंदोलन ने उग्र रूप लिया, खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा, श्रीनगर सहित अन्य गोलीकांडों में 42 लोगों ने अपनी जान गवांई थी। इस आंदोलन में महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई, लेकिन इन 21 वर्षों में महिलाओं के लिए कोई नीति नहीं बन पायी है।
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यह स्थिति तब है जबकि महिला हित में तमाम वादे एवं घोषणाएं होती रही हैं। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विजय बड़थ्वाल के मुताबिक प्रदेश में आधी आबादी के उत्थान के लिए भाषणों में काफी कुछ कहा जाता है, लेकिन राजनीति हो या अन्य क्षेत्र वास्तव में उनकी अनदेखी होती रही है।
नए आयाम स्थापित हुए पर चुनौतियों का पहाड़ नहीं हुआ कम
राज्य गठन के 21 वर्षों में शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, खेल और महिला एवं बाल विकास विभाग में नए आयाम स्थापित हुए, लेकिन अब भी चुनौतियों का पहाड़ कम नहीं हुआ। प्रदेश के पर्वतीय जिलों के गांवों के साथ ही स्कूल भी छात्रों के पलायन की मार झेल रहे हैं। राज्य गठन के बाद से लगातार स्कूलों में छात्रों की संख्या घटती जा रही है। यही वजह है कि दो हजार से अधिक स्कूलों में छात्रों की संख्या दस या इससे भी कम रह गई है। पिछले कुछ वर्षों में तीन सौ से अधिक स्कूल बंद हो चुके हैं। हालांकि, विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इस साल छात्रों की संख्या में कुछ इजाफा हुआ है। कक्षा एक से 12वीं तक के स्कूलों में 50 हजार से अधिक छात्र बढे़ हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक बंद होते स्कूलों को बचाने के लिए सरकार ने अटल उत्कृष्ट स्कूलों का फार्मूला तैयार किया है। सरकारी स्कूलों को अटल उत्कृष्ट स्कूल बनाकर इसे सीबीएसई की मान्यता दिलवाई जा रही है। पहले चरण में 186 स्कूलों के बाद सरकार ने दूसरे चरण में 135 अटल उत्कृष्ट स्कूलों की सूची तैयार की है।
यह हैं प्रमुख वजहें
- स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
- पहाड़ के दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों की कमी
- पहाड़ के स्कूल छोड़ शिक्षकों की दून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की दौड़
- शिक्षण कार्य के बजाए शिक्षकों की अन्य कार्य में ड्यूटी
- शिक्षकों के प्रशिक्षण का अभाव
ऐसे सुधर सकती है स्थिति
- सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता
- स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं
- अंग्रेजी माध्यम से स्कूलों में पठन-पाठन शुरू कर शिक्षकों को अन्य ड्यूटी से मुक्त करना
- भवनों की स्थिति में सुधार
शासन की फाइलों से बाहर नहीं आ पाई संशोधित खेल नीति
प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए खेल नीति में बदलाव किया जाना है, लेकिन तमाम दावों के बावजूद संशोधित खेल नीति शासन की फाइलों से बाहर नहीं आ पायी है। यह हाल तब है जबकि मुख्यमंत्री और खेल मंत्री लगातार खेल नीति बनाए जाने की घोषणा करते आ रहे हैं।