फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand foundation day 2017 dreams which not complete

राज्य स्थापना दिवस: 17 साल बाद आज भी अधूरे हैं उत्तराखंड के ये सपने

Thu, 09 Nov 2017 09:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 09 Nov 2017 09:13 AM IST
विज्ञापन
uttarakhand foundation day 2017 dreams which not complete

राज्य गठन के आज 17 साल पूरे हो गए, लेकिन इन वर्षों में राज्य आंदोलनकारियों की भावना के अनुरूप न तो गैरसैंण राजधानी बनी और न ही अपनी बोली-भाषा गढ़वाली, कुमाऊंनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिल सका।

विज्ञापन


पहाड़ से पलायन रुके और पहाड़ की राजधानी पहाड़ में बने, अपनी बोली को पहचान मिले, इसे लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने शहादत दी, लेकिन इन वर्षों में अपनी बोली को पहचान नहीं मिल पाई है।
विज्ञापन


जबकि मैथिली, बोडो और कोंकणी से कहीं अधिक लोग गढ़वाली एवं कुमाऊंनी बोलते हैं। 1560-1790 ईसवी तक सभी शासकीय कार्य इसी भाषा में होते थे। ताम्रपत्रों, शिलालेखों और सरकारी दस्तावेजों में इसके अभिलेखीय प्रमाण मौजूद हैं। सन 1905 में गढ़वाल यूनियन नामक संस्थान से तारादत्त गैरोला और विश्वंभर दत्त चंदोला ने गढ़वाली पत्रिका का संपादन शुरू किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

राज्य की प्रमुख भाषा को नहीं मिला बढ़ावा

uttarakhand foundation day 2017 dreams which not complete

देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में गढ़वाली, कुमाऊंनी भाषा एवं साहित्य पर कई पीएचडी शोध ग्रंथ लिखे जा चुके हैं। सन 1913 में गढ़वाली भाषा का प्रथम समाचार पत्र ‘गढ़वाली समाचार’ प्रकाशित हुआ। इसके अलावा भी इसकी कई साहित्यिक पृष्ठभूमि है। लेकिन राज्य गठन के 17 वर्षों में अपनी बोली-भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने को ठोस प्रयास नहीं हुए।

अपनी संस्कृति और बोली-भाषा को पहचान मिले, गढ़वाली, कुमाऊंनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा सके इसे लेकर अब तक की सरकारों ने कोई ठोस प्रयास नहीं किए।
-काशी सिंह ऐरी, उक्रांद संरक्षक

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed