भारी बर्फबारी से प्रभावित हुई चारधाम यात्रा, गुप्तकाशी पहुंचे उत्तराखंड के पूर्व CM हरीश रावत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा और केदारनाथ के विधायक मनोज रावत मंगलवार देर शाम 6.30 बजे हेलीकॉप्टर में केदारनाथ से गुप्तकाशी चारधाम हेलीपैड पहुंचे। विधायक रावत ने बताया कि पूर्व सीएम बुधवार को रात्रि प्रवास के लिए आदिबदरी पहुंचेंगे। बता दें कि पूर्व सीएम रावत सोमवार दोपहर को पैदल मार्ग से केदारनाथ पहुंचे थे, लेकिन खराब मौसम के कारण उन्हें मंगलवार को दिनभर धाम में रुकना पड़ा।
मंगलवार को धाम में लगातार बारिश और बर्फबारी के चलते हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पा रहा था। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को सोनप्रयाग व गौरीकुंड में रोक दिया था।
वहीं बारिश के चलते ओजरी दबारकोट के पास मलबा आने से यमुनोत्री हाईवे बंद हो गया है। बदरीनाथ हाईवे भी लामबगड़ में अवरूद्ध हो गया था, जिसे शाम चार बजे खोल दिया गया। बदरीनाथ और लामबगड़ में रोके गए करीब 7 हजार यात्रियों को उनके गंतव्य पर भेजा गया। मंगलवार को तड़के बदरीनाथ में भी बारिश और भारी बर्फबारी का दौर जारी है। वहीं केदारनाथ धाम में भी बर्फबारी हुई। जिस कारण केदारनाथ यात्रा रोक दी गई।
खराब मौसम के कारण केदारनाथ में रुके पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा गरीब यात्रियों के लिए धाम में कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव उत्पल कुमार से फोन पर बातचीत कर धाम और पैदल मार्ग पर में जगह-जगह पर अलाव की व्यवस्था और बारिश व बर्फबारी से बचने के लिए रेन सेल्टर बनाने पर जोर दिया। पूर्व सीएम के साथ राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा और केदारनाथ विस के विधायक मनोज रावत भी हैं।
पूर्व सीएम ने कहा कि केदारनाथ में बर्फबारी होना, प्रकृति का नैसर्गिक सौंदर्य है। वे पूरी तरह से स्वस्थ्स और सुरक्षित हैं। साथ ही उनके साथ के लोग भी कुशल हैं। कहा कि मौसम को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार धाम में मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंतजाम नहीं किए गए हैं।
कहा कि इस बर्फबारी ने डबल इंजन सरकार की सारी यात्रा व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। बावजूद प्रशासनिक तंत्र अपने काम में मुस्तैद है। रावत ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद केदारनाथ में सिर्फ एक-दो स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। जबकि जगह-जगह पर सुविधा होना चाहिए थी। उन्होंने मंदिर परिसर के एक तरफ से मंदिर मार्ग के किनारे रेन सेल्टर बनाने की बात भी कही, जिससे बारिश, बर्फबारी में श्रद्धालुओं को ज्यादा दिक्कत न हो। उन्होंने केदारनाथ में गरीब यात्रियों के रात्रि प्रवास के लिए इंतजाम नहीं होने पर रोष जताया। कहा, जिसका कोई नहीं, उसके बाबा केदार हैं। लेकिन सरकार ने धाम पहुंच रहे गरीबों की सुध लेना उचित नहीं समझा, जो बाबा के भक्तों के साथ अन्याय है। इस मौके पर राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने कहा कि केदारनाथ में यात्रियों के लिए उस स्तर की सुविधाएं नहीं की गई हैं, जिस तरह से प्रचार किया गया था। वहीं, विधायक रावत ने कहा शासन-प्रशासन की खानापूर्ति तैयारियों की हकीकत सामने आ गई है। इन हालात में यात्रियों के स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए शासन स्तर पर प्रयास नाकाफी हैं। चारधाम सहित गढ़वाल मंडल के साथ ही कुमाऊं के कई इलाकों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। हेमकुंड में भी बर्फबारी के चलते यात्रा की तैयारियों के कार्य ठप पड़े हैं।
लगातार गिर रही बर्फ से पड़ रही कड़ाके की ठंड
पिछले 14 घंटों से अधिक समय से केदारनाथ धाम में बर्फबारी ने बाबा केदार की यात्रा को व्यापक रूप से प्रभावित करते हुए रोक दिया है। धाम में करीब एक फीट बर्फ जम चुकी है। लगातार गिर रही बर्फ से यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है। प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से 4272 यात्रियों को पैदल मार्ग से गौरीकुंड-सोनप्रयाग के लिए भेज दिया है। जबकि 450 यात्री अब भी धाम में रुके हैं, जिनमें बुर्जुग व छोटे बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व सीएम हरीश रावत, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, केदारनाथ के विधायक मनोज रावत, नोडल अधिकारी, सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस व तीर्थ पुरोहितों सहित 8 सौ से अधिक अन्य लोग भी मौजूद हैं। बर्फबारी से केदारनाथ में गढ़वाल मंडल की टेंट कालोनी को भी भारी नुकसान हुआ है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के तहत सोमवार रात्रि 2 बजे से केदारनाथ में बर्फबारी हो रही है। रुक-रुककर मध्यम व तेज बर्फ के बीच मंगलवार सुबह 5 बजे से श्रद्धालु मंदिर में बाबा केदार के दर्शनों को पहुंचने लगे थे। लेकिन दिन चढने के साथ मौसम और खराब होने लगा, जिस कारण प्रशासन द्वारा मंदिर में एकत्रित हो रहे श्रद्धालुओं को अपने-अपने कमरों में जाने के लिए कहा गया। मंदिर में दर्शनों के लिए लाइन नहीं लगने दी गई। भले ही इस दौरान दो, चार श्रद्धालु बाबा के दर्शन करते रहे। लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान व चौकी प्रभारी बिपिन चंद्र पाठक द्वारा जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से फोन पर वार्ता के बाद प्रात: 11 बजे से केदारनाथ धाम को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की गई।
प्रशासन द्वारा 4272 श्रद्धालु, जिसमें सुबह के समय लिनचोली से धाम पहुंचे 808 श्रद्धालु शामिल हैं, को दर्शन करने के बाद पैदल मार्ग से वापस भेजना शुरू किया। दोपहर 12 बजे केदारनाथ धाम अधिकांश खाली हो गया था। यहां जो लोग रुके हुए हैं, वे भी दिनभर कमरों में दुबके रहे। दूसरी तरफ पैदल मार्ग से वापस भेजे गए यात्रियों को गौरीकुंड व सोनप्रयाग तक सकुशल पहुंचाने के लिए रुद्रा प्वाइंट, छानी कैंप, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, चीरबासा में पुलिस, एसडीआरएफ और पीआरडी जवानों के माध्यम से फीडबैक लिया जा रहा है। उप जिलाधिकारी चौहान ने बताया कि धाम से पैदल भेजे गए श्रद्धालुओं में ज्यादातर रामबाड़ा व भीमबली तक पहुंच गए हैं। धाम में 450 यात्री ही रुके गए हैं, इनमें बुर्जुग व बच्चे हैं, जो पैदल चलने में असमर्थ हैं। इन सभी के ठहरने व भोजन की उचित व्यवस्था कर दी गई है। साथ ही उनके परिजनों से भी बातचीत कराई जा रही है। मौसम साफ होने पर इन्हें हेलीकॉप्टर से भेजा जाएगा। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर सेवा भी दिनभर बंद रही। इधर, जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि केदारनाथ में स्थिति पूरी तरह से सामान्य है। सुरक्षा के लिहाज से पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
साढ़े 9 बजे से पड़ावों पर रोके यात्री
मंगलवार को बाबा केदार के दर्शनों के लिए सोनप्रयाग से प्रशासन द्वारा 2242 यात्रियों को रवाना किया गया। लेकिन घाटी क्षेत्र में तेज बारिश और धाम में बर्फबारी को देखते हुए प्रात: 9.30 पर यात्रियों को जंगलचट्टी, भीमबली व लिनचोली में रोक दिया गया था।
बदरीनाथ बर्फबारी शुरू होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया
बदरीनाथ धाम में मंगलवार को दिनभर बर्फबारी का सिलसिला जारी रही। धाम में करीब एक फीट बर्फ जम गई है। हनुमान चट्टी तक बर्फबारी होने से यात्रा वाहनों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया है। वहीं, हेमकुंड साहिब में भी करीब डेढ़ फीट तक ताजी बर्फ जम गई है। यहां यात्रा तैयारियां शुरू नहीं हो पाई हैं।
धाम में मंगलवार तड़के से ही बर्फबारी शुरू होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ठंड से बचने के लिए तीर्थयात्री अपने कमरों में ही दुबके रहे, जबकि गंतव्य को लौटने वाले तीर्थयात्री वाहनों में बैठकर ही बदरीनाथ हाईवे के सुचारु होने का इंतजार करते रहे। धाम में अभी भी करीब 80 वाहन अपने गंतव्य को जाने के लिए हाईवे पर लाइन लगाकर खड़े हैं। बदरीनाथ के थानाध्यक्ष अनिल जोशी ने बताया कि बर्फबारी से बदरीनाथ हाईवे फिसलनभरा हो गया है, जिससे वाहनों के रपटने का डर बना हुआ है।
कंचन गंगा, रड़ांग बैंड और हनुमान चट्टी में भी हाईवे पर बर्फ जम गई है, ऐसे में यात्रा वाहनों को रोक दिया गया है। बुधवार को मौसम सामान्य होने के बाद यात्रियों को उनके गंतव्य को जाने दिया जाएगा। वहीं, औली, गोरसों बुग्याल, रुद्रनाथ, नंदा घुंघटी सहित नीती घाटी के गांवों में भी बर्फबारी हुई है।
गोपेश्वर में सात मई को हुए आंधी-तूफान से चमोली जिले में अभी भी स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। जगह-जगह बिजली के तार गिरने से 14 गांवों में विद्युत आपूर्ति ठप पड़ी है। पीपलकोटी क्षेत्र में विद्युत लाइनों को अधिक क्षति पहुंची है। गोपेश्वर में दूरसंचार विभाग के टावर के ऊपर पेड़ गिरने से संचार सेवा बंद हो गई है। पीपलकोटी क्षेत्र में 11 केवी की विद्युत लाइन कोड़िया, ग्रेफ कैंप और पीपलकोटी में पेड़ गिरने से ध्वस्त हो गई थी।
मंगलवार को भी विद्युत लाइन सुचारु नहीं हो पाई है। वहीं, गत दो मई को आंधी-तूफान से डुंगरी-बरोसी क्षेत्र में यूपीपीसीएल (उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन) की हाईटेंशन लाइन से क्षेत्र में सप्लाई हो रही 11 केवी की विद्युत लाइन में अतिरिक्त करंट दौड़ गया था, जिससे आठ ट्रांसफार्मर फुंक गए थे। पैनी, तल्ला व मल्ला हेलंग में दो ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जा निगम की ओर से विद्युत आपूर्ति सुचारु कर दी गई थी, लेकिन अन्य सलूड़, डुंग्रा, डुंग्री, बरोसी, कुट-मंगरा और जखोला गांव अभी भी सप्लाई ठप है। ऊर्जा निगम के ईई कैलाश कुमार का कहना है कि पीपलकोटी क्षेत्र में विद्युत तार और पोल लगाने का काम जारी है। जल्द ही जिले में विद्युत आपूर्ति सुचारु कर दी जाएगी।