उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्रियों पर हो रहे खर्च को हाईकोर्ट में दी चुनौती
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प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों पर बिजली, वाहन सहित अन्य मदों पर किए जा रहे खर्च को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास किराए के 13 करोड़ रुपये बकाया वसूली की याचिका दाखिल करने वाली संस्था रूलक (रूरल लिटिगेशन एंड एनटाइटलमेंट केंद्र) ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर यह चुनौती दी है।
प्रार्थना पत्र में पूर्व मुख्यमंत्रियों को दिल्ली में दी जा रही वाहन सुविधा पर रोक लगाने की मांग भी की गई है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्रियों और सरकार को चार सप्ताह में विस्तृत जवाब देने का आदेश दिया है।
सबसे कम धनराशि विजय बहुगुणा के नाम पर खर्च
रूलक की ओर से दायर प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि आरटीआई से पता चला है कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं।
इनमें सबसे अधिक धनराशि पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और सबसे कम धनराशि विजय बहुगुणा के नाम पर खर्च की गयी है।
संस्था के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि कोर्ट में पेश शपथपत्र में कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के नाम पर 3.70 करोड़, एनडी तिवारी के नाम पर 2.39 करोड़, रमेश पोखरियाल निशंक के नाम पर 2.17 करोड़, भुवन चंद्र खंडूड़ी के नाम पर 2.81 करोड़ और विजय बहुगुणा के नाम पर 1.11 करोड़ रुपए विभिन्न मदों में खर्च किए गए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्रियों को दिल्ली में मिलने वाली वाहन सुविधा पर रोक लगाने की मांग
अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास किराया वसूली के मामले में प्रदेश सरकार ने सरकारी आवास किराए का आकलन बाजार दर पर नहीं किया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को आवास किराए का आकलन बाजार मूल्य के आधार पर करने और रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने का आदेश दिया है।