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उत्तराखंडः फॉरेस्ट गार्ड भर्ती नकल गिरोह का सरगना गिरफ्तार, ईयर फोन और ईयर पिक से कराता था नकल

Fri, 21 Feb 2020 06:11 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 21 Feb 2020 06:11 PM IST
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Uttarakhand forest guard recruitment exam cheating case master mind arrested
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा में ब्लूटूथ डिवाइस से नकल कराने का झांसा देकर युवकों से ठगी करने वाले गिरोह के सरगना कोचिंग सेंटर संचालक मुकेश सैनी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के पास से एक ब्लूटूथ, ईयर फोन, मोबाइल और अन्य दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।

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पुलिस ब्लूटूथ की बारीकी से जांच कर रही है। साथ ही फरार चल रहे गिरोह के सात आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। पुलिस ने सरगना को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है।
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एसएसपी ने बताया कि गिरोह का सरगना युवाओं को परीक्षा में नकल कराने के लिए ईयर फोन और ईयर पिक डिवाइस का प्रयोग कराता था। ईयर पिक से परीक्षार्थी फोटो खींचकर आरोपी को भेजते थे। इसके बाद उधर से ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से पेपर साल्व करवाया जाता था। ब्लूटूथ के माध्यम से ये लोग मात्र दो घंटे में ही पूरा पेपर सॉल्व करवा देते थे। उन्होंने बताया कि मुकेश के पास जो ब्लूटूथ डिवाइस मिला है, उसकी बारीकी से जांच की जा रही है। उम्मीद है कि ब्लूटूथ से कई अन्य जानकारियां मिलेंगी, जिसके आधार पर आगे की जांच की जाएगी।
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एसएसपी डी सेंथिल अबूदई कृष्णराज एस ने प्रेसवार्ता कर बताया कि देहरादून एसटीएफ और हरिद्वार पुलिस को शिकायत मिल रही थी कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और प्राविधिक शिक्षा परिषद में पेपर लीक कराने के साथ ही ब्लूटूथ के माध्यम से नकल कराई जा रही है। 16 फरवरी को फॉरेस्ट गार्ड भर्ती के लिए लिखित परीक्षा थी।

मंगलौर क्षेत्र स्थित कुआंहेड़ी निवासी आलोक हर्ष पुत्र शिवलोक हर्ष ने पुलिस से शिकायत कर बताया था कि वह गुरुकुल नारसन स्थित ओजस्व कॅरियर इंस्टीट्यूट से परीक्षा की तैयारी कर रहा था। कोचिंग सेंटर के संचालक मुकेश सैनी ने बताया कि था कि वह चार लाख रुपये में परीक्षा का पेपर उपलब्ध करा सकता है। साथ ही पास करवाकर नौकरी भी लगवा देगा।

इसी बीच मुकेश सैनी के दोस्त कपिल से उसकी मुलाकात हुई। कपिल ने भी बताया कि मुकेश ने उससे भी चार लाख रुपये मांगें हैं और वह रुपये दे रहा है। झांसे में आकर उसने मुकेश को एक लाख रुपये दे दिए थे। मुकेश ने बताया था कि परीक्षा से पहले उसे कॉलेज के बाहर ही पेपर उपलब्ध करा दिया जाएगा।

ऐसे खुला मामला

बताया कि कपिल को उसने एक ब्लूटूथ डिवाइस दी है, जो वह उसे उपलब्ध करा देगा और ब्लूटूथ के जरिये पेपर साल्व करवा देगा। परीक्षा वाले दिन आलोक ज्वालापुर स्थित परीक्षा केंद्र के बाहर खड़ा था, लेकिन उसे पेपर और ब्लूटूथ उपलब्ध नहीं करवाया गया था। इस चक्कर में उसकी परीक्षा भी छूट गई थी। एसएसपी ने बताया कि मंगलौर पुलिस ने शिकायत के आधार पर गिरोह के सरगना मुकेश सैनी, निवासी ग्राम हरचंदपुर हाल निवासी गुरुकुल नारसन, कुलदीप राठी, गुरु वचन, हाकम सिंह जसोल निवासी उत्तरकाशी हाल निवासी ज्ञान आईएएस कोचिंग सेंटर, पंकज, अश्वनी, निवासी नारसन कलां, सुधीर, अशोक ग्राम बूढ़पुर जट्ट के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था।

तभी से आरोपी फरार चल रहे थे। एसएसपी ने बताया कि शुक्रवार को कोचिंग सेंटर पर छापा मारकर गिरोह के सरगना मुकेश सैनी को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि मामले में आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा भी बढ़ाई गई है।

कई युवाओं से कर चुका है धोखाधड़ी
एसएसपी के अनुसार, जांच में सामने आया है कि गिरोह का सरगना मुकेश सैनी प्रदेश स्तरीय और एसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक या फिर ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से नकल कराता था। वह नकल से पास कराने के बाद नौकरी भी लगवाता था। साथ ही युवाओं को नकल का झांसा देकर एडवांस में रकम लेता था। कई ऐसे युवाओं के बारे में जानकारी मिली है, जिनकी गहनता से जांच की जा रही है। 

पुलिस टीम में ये रहे शामिल
पुलिस टीम में मंगलौर कोतवाली प्रभारी प्रदीप चौहान, एसएसआई देवेंद्र सिंह रावत, एसआई मनोज सिरोला समेत प्रभाकर, संजय कंडारी, योगेंद्र, नंदकिशोर, दीपक नेगी शामिल थे। 

वन दरोगा पद पर प्रमोट होने के बाद भी निभानी पड़ रही फॉरेस्ट गार्ड की ड्यूटी

फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा में उपजे विवाद का ही सबब है कि प्रमोट होकर वन दरोगा बने कई कर्मियों को फॉरेस्ट गार्ड की ड्यूटी निभानी पड़ रही है। इसके साथ ही जंगल की आग का बेहतर प्रबंध का सपना संजो रहे वन विभाग को भी झटका लगा है।

वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड केे करीब 3650 पद हैं। इनमें से 1218 पद खाली हैं। इन पदों पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से जल्द भर्ती होने की उम्मीद वन विभाग को थी। इसी के चलते वन विभाग ने कई-कई साल से फॉरेस्ट गार्ड के पद पर काम कर रहे कई वन कर्मियों को प्रमोट कर वन दरोगा बना दिया। नई भर्ती होने तक इनमें से कइयों को फॉरेस्ट गार्ड की ड्यूटी अब भी निभानी पड़ रही है। कारण यह भी है कि प्रदेश में अब फायर सीजन शुरू हो गया है। विभाग में फॉरेस्ट गार्ड की कमी है। ऐसे में प्रमोट होने वाले कर्मियों को प्रभारी के रूप में काम करना पड़ रहा है। 

एक वन अधिकारी के मुताबिक जंगल की आग के मामलों में निगरानी की सबसे मजबूत कड़ी फॉरेस्ट गार्ड ही हैं। करीब एक हजार फायर वाचर तैनात किए जा चुके हैं। 1218 फॉरेस्ट गार्ड और मिल जाते तो फायर वाचर की संख्या बढ़ाई जा सकती थी।

वन अधिकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष कुलदीप पंवार के मुताबिक स्टाफ की कमी का सामना वन विभाग को कई स्तर पर करना पड़ रहा है। पहले ही वन विभाग को पिछले तीन साल से इन नियुक्तियों का इंतजार करना पड़ा। अब ये नियुक्तियां लटकीं तो अन्य प्रमोशन भी प्रभावित होंगे। वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक मानव संसाधन मनोज चंद्रन के मुताबिक अभी कुछ और फॉरेस्ट गार्ड के प्रमोशन होने बाकी हैं।  

बदली व्यवस्था, भर्ती परीक्षा में नहीं हुआ सुधार 

समूह ‘ग’ पदों की भर्ती में पारदर्शिता और नकल रोकने के लिए व्यवस्था बदलने के बाद भी लिखित परीक्षाओं में सुधार नहीं हुआ है। पिछले तीन सालों में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने भर्ती परीक्षा के सिस्टम में कई बदलाव किए हैं। लेकिन परीक्षा को फुलप्रूफ बनाने में आयोग की रणनीति कारगर साबित नहीं हुई है।   

बुनियादी सुविधाओं और स्टाफ की कमी के बावजूद भी चयन आयोग ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए व्यवस्थाओं में बदलाव किया है। सबसे पहले आयोग ने सभी परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की उपस्थिति के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम को लागू किया। इसके बाद ओएमआर शीट की तीन कॉपी की व्यवस्था बनाई। परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने के लिए पहली बार ग्राम पंचायत विकास अधिकारी पद की परीक्षा में कुछ केंद्रों पर जैमर का इस्तेमाल किया गया था। 

परीक्षा में गड़बड़ी के पांच मामलों में आयोग ने दर्ज कराया मुकदमा
चयन आयोग ने अब तक भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी करने पर पांच मामलों में मुकदमा दर्ज किया है। इसमें जूनियर इंजीनियर, टेकिभनकल ग्रेड, एलटी टीचर, वीपीडीओ और स्नातक स्तर के पदों की भर्ती परीक्षा शामिल है।

एसआईटी ने जांच के लिए आयोग से जुटाए रिकॉर्ड

फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा विवादों में आने के बाद एसआईटी ने पुरानी भर्तियों में दर्ज मुकदमों की जांच पड़ताल तेज कर दी है। एसआईटी ने चयन आयोग कार्यालय से भर्ती परीक्षाओं से संबंधित रिकॉर्ड जुटाए हैं। 

वर्ष 2017 व 2018 में हुए भर्ती परीक्षाओं में ओएमआर शीट में गड़बड़ी करने पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने कोतवाली और डालनवाला थाना में उम्मीदवारों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। लेकिन पुलिस की जांच केस दर्ज करने से आगे नहीं बढ़ पाई थी। आयोग की तरफ से टेक्निकल ग्रेड-दो और विभिन्न विभागों में स्नातक श्रेणी के पदों की भर्ती परीक्षा में ओएमआर शीट में गड़बड़ी पर मुकदमा दर्ज कराया था। 

स्नातक श्रेणी की भर्ती परीक्षा में एक उम्मीदवार की असली ओएमआर शीट में प्रश्नों के उत्तर में विकल्प पर ज्यादा गोले भरे गए। जबकि रिकॉर्ड के लिए ट्रेजरी में जमा होने वाली ओएमआर शीट में कम प्रश्नों के उत्तर में गोले मिले। इसी तरह टेक्निकल ग्रेड-दो पदों की परीक्षा में छह उम्मीदवारों की ओएमआर शीट में गड़बड़ी पाई गई थी।

फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा में नकल और ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस भी पुराने मुकदमों की जांच पर सक्रिय हो गई। डीआईजी अरुण मोहन जोशी ने जांच में तेजी लाने के लिए एसआईटी गठित की। चयन आयोग से एसआईटी ने ओएमआर शीट, उम्मीदवारों के नाम समेत भर्ती से संबंधित कई रिकॉर्ड जांच के लिए जुटाए हैं। 
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