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उत्तराखंड के जंगलों में अब नहीं होंगे चीड़ और सूअर
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 07 Jul 2015 02:08 AM IST
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प्रदेश के जंगलों को चीड़, फसलों को जंगली सूअर और लोगों को बालू की वजह से आने वाली नदियों की बाढ़ से मुक्ति के प्रयास शुरू हो गए हैं। वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने समीक्षा बैठक कर 15 दिन के भीतर इसका प्लान तैयार कर केंद्र को भेजने के निर्देश दिए हैं।
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वन मंत्री ने दी जानकारी
सोमवार को विधानभवन में आयोजित समीक्षा बैठक में वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि सीएम हरीश रावत के निर्देशों की कड़ी में तीनों प्रकरणों के ठोस प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाने हैं। उन्होंने बताया कि चीड़ के जंगलों की वजह से प्रदेश को भारी नुकसान हो रहा है।
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जंगली सूअर और नीलगाय की वजह से फसलों को नुकसान होता है, जबकि नदियों में जमा सिल्ट की वजह से आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
हो चुकी है पहले दौर की वार्ता
तीनों मामलों में सीएम हरीश रावत दो जुलाई को केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास मंत्री उमा भारती और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से पहले दौर की वार्ता कर चुके हैं। उन्होंने इस कड़ी में प्लान तैयार करने को एक समिति का गठन किया है।
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समिति में मुख्य वन संरक्षक गंभीर सिंह, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं राजेंद्र सिंह बिष्ट और अपर सचिव वन एवं पर्यावरण मीनाक्षी जोशी और वन संरक्षक मनोज चंद्रन को नामित किया गया है। यह समिति आरक्षित वन और सिविल वनों के लिए अलग-अलग दो प्रस्ताव तैयार करेगी।
15 दिन में भेजेंगे प्रस्ताव
15 दिन में प्रस्ताव तैयार होने के बाद मुख्य वन्य जंतु प्रतिपालक की अध्यक्षता में गठित कमेटी इसे ठोस रूप देने के बाद केंद्र सरकार को भेजेगी। बैठक में प्रमुख वन संरक्षक श्रीकांत चंदोला, प्रमुख वन संरक्षक जयराज, अपर प्रमुख वन संरक्षक एआर सिंह, मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव धनंजय मोहन आदि मौजूद रहे।