उत्तराखंड: लोक गायिका स्व. कबूतरी देवी की 'विरासत' पर खतरा, बेटी के पास उपचार के लिए भी नहीं है पैसे
- मां की विरासत को आगे बढ़ने की मंशा रखने वाली बेटी हेमंती गले की बीमारी से परेशान
- बीमारी से बोलने और गीत गाने में होने लगी दिक्कत
- मां के निधन के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही हेमंती
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उत्तराखंड की तीजनबाई के नाम से प्रसिद्ध लोक गायिका स्व. कबूतरी देवी की विरासत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। लोक गीतों में रूचि रखने वाली उनकी बेटी हेमंती देवी ने मां के साथ कई गीत गाकर उनकी विरासत आगे बढ़ाने का जिम्मा उठाया था। पर गले से संबंधित बीमारी ने उनकी आवाज पर असर डाला है और वह गीत नहीं गा पा रही हैं।
मुंबई में गले के ऑपरेशन के बाद भी उनकी बीमारी दूर नहीं हुई है। वहीं मां के निधन के बाद उनकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। प्रख्यात लोक गायिका स्व. कबूतरी देवी का एक बेटा और दो बेटियां हैं। कबूतरी देवी के निधन के बाद उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा बेटी हेमंती देवी ने उठाया। कुछ लोग गीत गाए और कुछ बड़े कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया। पर पिछले साल मई में 45 वर्षीय हेमंती देवी की आवाज बैठने लगी।
गीत गाने में भी असमर्थ हो गईं
मुंबई में इसी साल फरवरी में गले का ऑपरेशन हुआ। लगा अब सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन पिछले दो माह से फिर से गले में वही दिक्कत शुरू हो गई। अस्वस्थ होने के बाद वह गीत गाने में भी असमर्थ हो गई हैं। हेमंती अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ाना चाहती हैं लेकिन इस बीमारी के कारण उनकी मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
उपचार के लिए भी नहीं है पैसे
लोक गायिका स्व. कबूतरी देवी की बेटी हेमंती देवी के पति की माली हालत भी ठीक नहीं हैं। पिथौरागढ़ के शेरीकुंडार गांव निवासी हेमंती चंचल रावत की टीम के साथ लोक गीतों का जादू बिखेरती थीं लेकिन अब वह गीत गाने में असमर्थ हैं। हेमंती ने बताया कि मां की मृत्यु के समय की गई घोषणाओं की मदद भी उन्हें अब तक नहीं मिली है।
अल्मोड़ा निवासी एक युवती ने उन्हें आर्थिक सहायता के तौर पर कुछ धनराशि दी है। हेमंती के परिजनों के पास उनके उपचार के लिए तक पैसे तक नहीं हैं। उनका कहना है कि माता के जीवित रहने पर उन्हें सहायता मिलती थी, लेकिन अब मां नहीं हैं तो मदद भी नहीं है।