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जान तो बच गई पर हिल गया दिमाग
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jul 2013 10:31 AM IST
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केदारघाटी में कयामत के मंजर ने उसे अंदर तक तोड़ दिया। पहाड़ों पर आई जल प्रलय से उसकी जान तो बच गई लेकिन हर तरफ चीखें, लाशों के ढेर, भूख से दम तोड़ते बच्चे देखकर उसके दिमाग की रगें हिल गईं। वह किसी तरह रुद्रप्रयाग तक आया। उसके बाद उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया।
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वह रोने लगा, फिर हंसने लगा
गुरुवार रात को डोईवाला थाने में तैनात दारोगा प्रदीप रावत रात्रि गश्त में डोईवाला रेलवे स्टेशन पहुंचे। एक व्यक्ति यहां-वहां दौड़ रहा था। उसे रोका तो वह अजीब बातें करने लगा। उसे पानी पिलाया गया और एक जगह तसल्ली से पूछा गया तो वह रोने लगा, फिर हंसने लगा। उससे मिले दस्तावेजों से उसकी पहचान मोहनलाल बैरागी पुत्र द्वारका प्रसाद निवासी मंगलपुरा, जिला झालावाड़ के रूप में हुई। किसी तरह उसने बताया कि वह और उसका दोस्त मुकेश केदारनाथ के दर्शन को आए थे। आपदा में मुकेश लापता है। वह कैसे बच गया और कहां था। उसे कुछ नहीं मालूम।
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सेना ने उसे रेस्क्यू कर रुद्रप्रयाग पहुंचाया। वहां से वह इलाहाबाद चला गया। इलाहाबाद में उसे होश आया कि वह यहां क्यों आया है। तो फिर से ट्रेन में बैठकर ऋषिकेश आ गया। लेकिन उसे ऋषिकेश भी नहीं जाना था। इसलिए ट्रेन में बैठकर दून के लिए चला। लेकिन डोईवाला में उतर गया। उसे कहां जाना है कुछ नहीं पता। वह फिर से रोने लगा।
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उसकी गुमशुदगी दर्ज थी
पुलिस ने उसे चुप कराया और थाने ले आई। वहां उन्होंने गूगल और अन्य माध्यम से उसके द्वारा बताए गए झालावाड़ जिले का पता लगाया। पता चल गया कि झालावाड़ जिला राजस्थान में है। पुलिस अधिकारियों ने वहां के जिलाधिकारी से संपर्क किया तो पता चला कि उसकी वहां पर गुमशुदगी दर्ज है।
वहां उसके परिजनों ने पुलिस को बताया था कि वह अपने दोस्त मुकेश संग केदारनाथ को गया था। तस्दीक होने पर शुक्रवार सुबह पुलिस कांस्टेबल कार बुक कर उसे लेकर झालावाड़ के लिए रवाना हो गया। एसएसपी केवल खुराना ने बताया कि व्यक्ति को गहरा आघात लगा है। बहुत संभालने के बाद वह केवल अपना जिला ही बता सका।
गहरा आघात लगने पर व्यक्ति के सोच-विचार की क्षमता प्रभावित हो जाती है। वह कुछ समझ नहीं पाता है। भयावह दृश्य उसके दिमाग में कौंधा करते हैं। काउंसलिंग से रोगी ठीक हो जाता है।
-डा. रवि गुप्ता, वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ