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उत्तराखंड एक्सक्लूसिव: 100 से ज्यादा सक्रिय लैंड स्लाइड जोन प्रदेश के विकास में बने बाधक

Thu, 19 Aug 2021 07:33 PM IST
अलका त्यागी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 19 Aug 2021 07:33 PM IST
सार

प्रदेश में गढ़वाल परिक्षेत्र में तोताघाटी, तीनधारा, सिंगटाली, नरकोटा, सिरोबगड़, बांसबाड़ा, ओजरी, कालाडूंगी ऐसे सक्रिय लैंड स्लाइड जोन हैं जो नासूर बने हुए हैं।

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Uttarakhand Exclusive: More than 100 landslide zones become hindrance in development of state
भूस्खलन से रास्ते बंद - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर सक्रिय सौ से अधिक पुराने लैंड स्लाइड जोन हैं। इनसे लगातार गिरता मलबा और पत्थर राज्य के विकास की रफ्तार पर लगातार ब्रेक लगा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 55 लैंड स्लाइड जोन की पहचान की है। इनमें 40 गढ़वाल और 15 कुमाऊं जोन में सक्रिय हैं। इसके अलावा 50 से अधिक पुराने लैंड स्लाइड जोन अन्य राज्य मार्गों पर चिह्नित किए गए हैं। 

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प्रदेश में गढ़वाल परिक्षेत्र में तोताघाटी, तीनधारा, सिंगटाली, नरकोटा, सिरोबगड़, बांसबाड़ा, ओजरी, कालाडूंगी ऐसे सक्रिय लैंड स्लाइड जोन हैं जो नासूर बने हुए हैं। टिहरी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर आठ बेहद खतरनाक सक्रिय लैंड स्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं। पौड़ी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-58 दो, रुद्रप्रयाग में राष्ट्रीय राजमार्ग-58 पर तीन और राष्ट्रीय राजमार्ग-107 पर 14 बड़े लैंड स्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं।
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इसी मार्ग पर चमोली जिले में एक जगह पर लैंड स्लाइड जोन सक्रिय है। उत्तरकाशी में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-94 पर आठ ऐसे स्थान हैं, जहां खतरनाक तरीके से भूस्खलन होता है। देहरादून में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-123 हरबर्टपुर से बड़कोट वाले रास्ते में बोसान और डैम टॉप दो स्थानों पर बड़े भूस्खलन सक्रिय हैं। इस मार्ग में टिहरी जिले में सुमनक्यारी में भी लैंडस्लाइड का एक और डेंजर जोन बना है। 

कुमाऊं परिक्षेत्र में अल्मोड़ा, चंपावत और पिथौरागढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-125 में कुल 14 और एनएच 309 बी शैल बैंड से पनार के बीच एक बेहद खतरनाक लैंड स्लाइड जोन सक्रिय है। बरसात के दिनों में इनकी सक्रियता और अधिक बढ़ जाती है। 

गढ़वाल क्षेत्र में बड़े सक्रिय लैंड स्लाइड जोन 

टिहरी में अटालीगंगा होटल के समीप, होटल ताज के निगट सिंगटाली, कौड़ियाला पानी गदेरा के निकट, महादेव चट्टी, तोताघाटी, तीनधारा, देवप्रयाग तहसील के निकट, मूल्यागांव, पौड़ी में फरासू और चमधार, रुद्रप्रयाग में जवाड़ी बाईपास के निकट, नरकोटा, सिरोबगड़, डीएफओ ऑफिस के निकट, बांसवाड़ा में दो जगह, काकड़ागाड़, सेमी बैंड, देवीधार, ब्यूंगाड़ खुमेरा, खुुमेरा (खाट), खाट, जामू, चंडिकाधार, कालाडूंगी, मुनकटिया, वाड़ा, चुन्नी बैंड, मस्तुरा, उत्तरकाशी में धरासू, छटांगा, सिलाई बैंड, ओजरी, खराड़ी, किसाला में दो जगह और पालीगाड़ में बेहद खतरनाक लैंडस्लाइड जोन सक्रिय हैं।   

वैज्ञानिक और शोधार्थी कर रहे भूस्खलन की सक्रियता पर शोध 
प्रदेश में सक्रिय दीर्घकालिक भूस्खलन जोन से कैसे निपटा जाए इस मुद्दे पर कई वैज्ञानिक संस्थान और विश्वविद्यालय भी शोध कर रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक प्रोजेक्ट तहत आईआईटी मुंबई, आईआईटी रुड़की, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय, पंजाब यूनिवर्सिटी और एलएसएम राजकीय महाविद्यालय पिथौरागढ़ विभिन्न सक्रिय भूस्खलन जोन पर शोध कर रहे हैं।  

उत्तराखंड में कुल 105 क्रानिक लैंडस्लाइड जोन चिह्नित किए गए हैं। बरसात के सीजन में फिलहाल कार्यदायी एजेंसियों की ओर से लैंडस्लाइड के कारण बंद हुए सड़क मार्ग को खोलने पर फोकस रहता है। हर लैंडस्लाइड जोन की सक्रियता और प्रकृति अलग होती है। इनका दीर्घकालीन उपचार भी अलग-अलग ढंग से ही संभव है। जिस पर संबंधित एजेंसियों की ओर से काम किया जा रहा है। 
- हरिओम शर्मा, प्रमुख अभियंता, लोनिवि

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