टाटा या रिलायंस के हाथों में जा सकती है उत्तराखंड की बिजली!
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करोड़ों रुपये बिजली बिल का जमा न होने और बिजली चोरी (लाइन लॉस) न रुकने पर रुड़की और ऊधमसिंह नगर सर्किल को निजीकरण में देने का मामला फिलहाल चुनावी बस्ते में चला गया है। अब उत्तराखंड की नई सरकार इस पर निर्णय लेगी।
दोनों सर्किलों को अपने अधीन करने के लिए टाटा और रिलायंस जैसी कंपनियां आगे आई हैं। इसका कुछ कर्मचारी समर्थन कर रहे हैं जबकि कुछ निजीकरण के विरोध में हैं।
प्रदेश में रुड़की और ऊधमसिंह नगर के सर्किल में बिजली चोरी के मामले सर्वाधिक हैं। स्थिति यह है कि रुड़की सर्किल के शहरी और ग्रामीण खंडों में 30 प्रतिशत से अधिक बिजली चोरी हो रही है। इसी को देखते हुए लंबे समय से रुड़की सर्किल को निजीकरण में देने की कवायद चल रही है।
रुड़की और ऊधमसिंह नगर सर्किल को निजीकरण में देने के प्रयास
पांच साल पहले भी इसके लिए टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन आगे की कार्रवाई नहीं हो पाई। अब फिर शासन और प्रदेश सरकार रुड़की और ऊधमसिंह नगर सर्किल को निजीकरण में देने के प्रयास कर रही है।
इसके लिए ऊर्जा भवन से टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। इससे पहले विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से निजीकरण के विरोध में आवाज बुलंद की जा रही थी।
संभावना जताई जा रही है कि विरोध की वजह से फिलहाल मामले पर ब्रेक लगा दिया गया है, लेकिन अधिकारियों के अनुसार निजीकरण के लिए ऊर्जा भवन स्तर से कार्रवाई चल रही है।
टेंडर जारी होने के बाद टाटा और रिलायंस कंपनी आगे आई
सूत्रों के अनुसार निजीकरण के लिए टेंडर जारी होने के बाद टाटा और रिलायंस कंपनी आगे आई हैं। अन्य दो कंपनियों ने भी दोनों सर्किलों की बिजली व्यवस्था अपने हाथों में लेने की इच्छा जताई है।
फिलहाल अधिकारी इस संबंध में कुछ कहने से बच रहे हैं। इस संबंध में रुड़की सर्किल के डीजीएम एमएल प्रसाद का कहना है कि दो सर्किलों के निजीकरण के लिए ऊर्जा भवन से टेंडर जारी किया गया है। इसमें कुछ कंपनियों ने इच्छा जताई है, लेकिन अभी निर्णय नहीं हो पाया है।
वसूली 50 प्रतिशत भी नहीं
ऊर्जा निगम इन दिनों राजस्व वसूली के लिए अभियान चलाए हुए हैं, लेकिन जनवरी माह में निर्धारित लक्ष्य से 50 प्रतिशत भी वसूली नहीं हो पाई है। स्थिति यह है कि ग्रामीण खंड में जनवरी माह के लिए 60 करोड़ से अधिक की वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया है, लेकिन 30 जनवरी तक 50 प्रतिशत राजस्व जमा नहीं हो पाया है। दूसरी ओर शहरी खंड में 20 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन वसूली मात्र 13 करोड़ हो पाई है।