उत्तराखंड चुनाव 2022: सोशल मीडिया पर नेताओं के जलवों पर भी रहेगी चुनाव आयोग की नजर
Uttarakhand Elections 2022: विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर खुद को साबित करने की होड़ सी मच गई है।
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फेसबुक, ट्वीटर, वॉट्सएप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया माध्यमों पर नेताओं के जलवे इस बार चुनाव आयोग की निगरानी में रहेंगे। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सोशल मीडिया की महत्ता समझते हुए निर्वाचन कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया सेल का गठन कर दिया गया है।
दरअसल, विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर खुद को साबित करने की होड़ सी मच गई है। इस होड़ पर नजर रखने और युवाओं के बीच सोशल मीडिया के माध्यम से मतदान की अलख जगाने के लिए निर्वाचन कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया सेल का गठन किया गया है।
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इस सेल के दो अहम काम होंगे। पहला काम तो प्रत्याशियों के चुनावी खर्च पर नजर रखना होगा। सोशल मीडिया में प्रचार के लिए भी बाकायदा अनुमति लेनी होगी, जिसके लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है। अनुमति मिलने के बाद हर सेकेंड का खर्च चुुनाव आयोग के सामने रखना होगा। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने पर चुनाव आयोग की ओर से कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
चुनाव प्रबंधन में सोशल मीडिया भी शामिल
युवाओं को ज्यादा से ज्यादा मतदाता बनाने के लिए अभियान चला रहा निर्वाचन कार्यालय उन्हें रिझाने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से चुनाव प्रबंधन और जागरुकता करेगा। सभी सोशल मीडिया माध्यमों पर लगातार युवाओं को जोड़ने का काम किया जाएगा। मकसद यह है कि मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी हो। लिहाजा, यह सेल इस जिम्मेदारी को भी निभाएगी।
तीन चरणों में काम करेगी सेल
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए निर्वाचन विभाग की सोशल मीडिया सेल तीन चरणों में काम करेगी। पहला चरण प्री पोल गतिविधियों का होगा, जिसमें चुनाव से पहले ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदान के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस दौरान राजनीतिक विज्ञापन और पेड न्यूज पर भी खास नजर रखी जाएगी। दूसरे चरण में मतदान के दौरान की मॉनिटरिंग व चुनाव प्रबंधन होगा। तीसरे चरण में मतगणना के दौरान की गतिविधियों को इस सेल के माध्यम से युवाओं तक पहुंचाया जाएगा।
यह सेल चुनाव खर्च एवं चुनाव आचार संहिता के मद्देनजर सोशल मीडिया की मॉनिटरिंग करेगी। साथ ही सोशल मीडिया का प्रयोग करते हुए चुनाव प्रबंधन व मतदाता जागरूकता में अपना योगदान देगी।
- नितिन उपाध्याय, नोडल ऑफिसर, सोशल मीडिया सेल
पुलिस भी रहेगी सक्रिय
सोशल मीडिया की हर पोस्ट पर पुलिस की नजर रहेगी। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने जिला पुलिस के अलावा अन्य विंग को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया की निगरानी के लिए स्वयंसेवकों की मदद भी ली जा रही है। विधानसभा चुनावों के मद्देनजर किसी भी भड़काऊ पोस्ट पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा चुनावों की तैयारियों में पार्टियां जोर शोर से जुट गई हैं। इसके लिए सोशल मीडिया पर भी प्रचार प्रसार तेजी से किया जा रहा है। अपनी अपनी पार्टियों और नेताओं के पक्ष में विभिन्न तरह की सामग्री शेयर की जा रही है। इन्हीं में से कुछ असामाजिक तत्व भी हैं जो धार्मिक व अन्य पोस्ट करने में पीछे नहीं रहते हैं। इसी को देखते हुए पुलिस ने भी कमर कस ली है। डीजीपी अशोक कुमार ने सभी जिलों को इस बाबत सख्ती से पेश आने को कहा है।
जिलों की सोशल मीडिया सेल को एक्टिव मोड पर रखने के निर्देश दिए हैं। इसी के साथ मुख्यालय में तैनात सोशल मीडिया निगरानी टीम को भी जिलों से इनपुट लेने के निर्देश दिए हैं। सभी तरह की सामग्री पर नजर रखने को कहा गया है। इसके साथ ही धार्मिक टिप्पणियों और समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से किए जाने वाले पोस्ट पर बारीकी से नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए आईटी एक्ट व आईपीसी की धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
वॉलंटियर की फौज तैयार
पुलिस ने पिछले साल सोशल मीडिया की निगरानी में कुछ स्वयंसेवकों को भी अपने साथ जोड़ा था। यह सभी आईटी के क्षेत्र में दक्ष या पूर्व और वर्तमान छात्र हैं। प्रदेश में ऐसे 200 से ज्यादा लोग हैं जो इस वक्त पुलिस की मदद सोशल मीडिया की निगरानी में कर रहे हैं। डीजीपी ने इन स्वयंसेवियों की भी मदद लेने के निर्देश दिए हैं, ताकि हर प्रकार की पोस्ट जो भड़काऊ है या समाज को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचा सकती है पर नजर रखी जा सके।