चुनाव नतीजों को लेकर मन में उत्साह होने के साथ ही आशंका भी: CM रावत
शनिवार को मतगणना के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा विस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सीएम हरीश रावत ने कहा कि चुनाव नतीजों को लेकर उनके मन में उत्साह होने के साथ ही आशंका भी है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से मैंने चुनाव में पूरी ताकत से प्रचार किया। अब चाहता हूं कि भगवान मुझे इतनी ताकत दे कि में राज्य का विकास भी पूरी तरह से कर सकूं।
रावत ने कहा कि हम उत्तराखंड में कम से कम 45 सीट जीतेंगे तभी राज्य के लिए बेहतर काम कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि पूर्ण बहुमत मिलता है तो यह राज्य के लिए बेहतर होगा। मुझे घेरने के लिए बीजेपी ने गलत तरीके अपनाए। धन का दुरुपयोग किया। राष्ट्रपति शासन लगाया। उन्होंने कहा कि यदि बागी प्रत्याशी जीतते हैं तो समझो उत्तराखंड हारता है।
दंगल में उतरे नहीं, पर टिका है सियासत वजूद
आज ईवीएम से जो चुनावी नतीजे निकलेंगे वह सिर्फ प्रत्याशियों ही नहीं बल्कि मैदान से बाहर खड़े नेताओं का सियासी भविष्य भी तय करेंगे। नतीजों के बाद इनमें कोई इनाम पाने का दावेदार होगा तो किसी को अलग थलग होना पड़ सकता है।
भाजपा में शीर्ष नेतृत्व पहले ही जाहिर कर चुका है कि मुख्यमंत्री विधायकों में से ही चुना जाएगा। ऐसे में भाजपा के वे क्षत्रप जो चुनाव मैदान में नहीं थे, खुद ही इस दौड़ से बाहर माने जा रहे हैं।
जो संकेत मिल रहे हैं वे बताते हैं कि अब ये दिग्गज जल्द ही प्रस्तावित दूसरी बड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धाओं में आगे आने को मशक्कत करते नजर आएंगे। राज्य के पांच में से चार सांसद पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक व माला राज्यलक्ष्मी पिछले करीब पौने तीन साल से केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह बनाने में नाकाम रहे हैं।
उनके संसदीय क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों की स्थिति से भी चारों सांसदों का इनाम या नुकसान भी तय होगा। इसी तरह, कांग्रेस में बगावत के सरताज पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की आगे की जिम्मेदारी तय करने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा कि चुनाव नतीजों में कितने बागियों सिर पर विधायकी का तज सजेगा।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा प्रत्याशियों की जीत-हार और जीत के अंतर की भी स्कैनिंग शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर की जानी है। दरअसल, चुनाव बाद जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार, कई राज्यपालों के बदले जाने और पार्टी में संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव की प्रबल संभावना है। इसके अलावा कुछ समय बाद उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य की सीट भी खाली हो रही है। ऐसे में इन नेताओं को उनकी अर्हता के आधार पर जिम्मेवारी मिल सकती है।