उत्तराखंड चुनाव 2022: दलबदल की ‘आपदा’ में अवसर ढूंढ रहे टिकट के दावेदार, बढ़ाई सक्रियता
उत्तराखंड भाजपा की चुनावी और सांगठनिक जिम्मेदारी निभा रहे केंद्रीय नेताओं की टीम को मैदान में उतारा जा रहा है। इन नेताओं के बीच विधानसभाएं बांटी गई हैं, जो वहां प्रवास के दौरान चुनावी तैयारियों के साथ-साथ संभावित प्रत्याशियों के दमखम को टटोलेंगे।
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साढ़े चार साल पहले कांग्रेस के बागियों को लाकर प्रचंड जीत दर्ज करने वाली भाजपा यशपाल आर्य और उनके विधायक बेटे के कांग्रेस में वापसी करने के बाद से खामोश है। लेकिन बागियों की सीटों पर टिकट का अरमान पालने वाले दावेदारों के चेहरे चमक रहे हैं। वे इसे अपनी राजनीतिक संभावनाओं के लिए अवसर की तरह देख रहे हैं। पार्टी की मनाही के बावजूद बाजपुर विधानसभा सीट के भाजपाई अपनी खुशी का इजहार करने से खुद को नहीं रोक पाए। इधर, पार्टी के स्तर पर भी अंदरखाने भविष्य की चुनौतियों के हिसाब से सभी विकल्पों पर गंभीरता से तैयारी शुरू हो गई है।
केंद्रीय नेताओं की टीम को मैदान में उतारा जाएगा
सूत्रों के मुताबिक, उत्तराखंड भाजपा की चुनावी और सांगठनिक जिम्मेदारी निभा रहे केंद्रीय नेताओं की टीम को मैदान में उतारा जा रहा है। इन नेताओं के बीच विधानसभाएं बांटी गई हैं, जो वहां प्रवास के दौरान चुनावी तैयारियों के साथ-साथ संभावित प्रत्याशियों के दमखम को टटोलेंगे।
इधर, विधायक पिता-पुत्र के भाजपा छोड़ने के बाद कांग्रेस नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि कुछ और विधायक घर वापसी करेंगे। यदि ऐसा होता है तो यह भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के लिए यह किसी आपदा से कम नहीं होगा। लेकिन संगठन में अपनी आधी उम्र खपाने वाले टिकट के दावेदार इसे सुनहरे अवसर की तरह देख रहे हैं। कांग्रेस से भाजपा में आकर चुनाव लड़े सभी विधायकों व अन्य नेताओं की सीटों पर टिकट के इन दावेदारों की सक्रियता बढ़ने के आसार हैं।
उत्तराखंड चुनाव 2022: यशपाल आर्य की घर वापसी के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा
बगावत से भाजपा को मिला था 8.40 वोट प्रतिशत का फायदा
उत्तराखंड में 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कांग्रेस में बगावत का बड़ा फायदा मिला था। पार्टी ने चुनाव में 46.51 प्रतिशत वोटों के साथ 57 सीटें जीतीं। इसमें 8.40 प्रतिशत वोट कांग्रेस से भाजपा में आए विधायकों का था। पार्टी ने इनमें से 12 को प्रत्याशी बनाया जिनमें से 10 ने जीत दर्ज की। उन्होंने 4,18,953 वोट प्राप्त किए थे, जबकि सभी 70 सीटों पर 4975494 वोटरों ने मतदान किया था।
साठ पार का लक्ष्य साधने के लिए सबका साथ जरूरी
भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में साठ पार का लक्ष्य बनाया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह सबका साथ चाहती है। मसलन, पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अपने कुनबे में किसी तरह की सेंध नहीं चाहता। अलबत्ता वह कांग्रेस में सेंध लगाकर विरोधी कुनबे को खाली कर देना चाहता है। लेकिन विधायक पिता-पुत्र के झटके ने उसे खामोश कर दिया है।
किसने कितने वोट पाए जो कांग्रेस से भाजपा में आए
सौरभ बहुगुणा सितारगंज - जीत 50,597
केदार सिंह रावत यमुनोत्री - जीत 19800
शैलारानी रावत केदारनाथ - हार 11472
सुबोध उनियाल नरेंद्र नगर - जीत 24104
उमेश शर्मा काऊ रायपुर - जीत 59,764
प्रदीप बतरा रुड़की - जीत 40,000
कुंवर प्रणव चैंपियन खानपुर - जीत 53192
सतपाल महाराज चौबट्टाखाल- जीत 20921
हरक सिंह रावत कोटद्वार - जीत 39859
शैलेंद्र मोहन सिंघल जसपुर - हार 38,347
यशपाल आर्य बाजपुर - जीत 54965
संजीव आर्य नैनीताल - जीत 30,036
कुल वोट प्राप्त किए - 4,18,953 (स्रोत: चुनाव आयोग के आंकड़े 2017 विधानसभा चुनाव के)
नोट: कुल मतदान का वोट प्रतिशत 8.42 रहा
भाजपा में जो लोग आए हैं, वह एक विचार को मजबूत करने आए हैं। अगर किसी का व्यक्तिगत स्वार्थ उस विचार से ऊपर हो जाए और व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए वह पार्टी के विचार को छोड़ दे तो उन्हें आने वाले समय में जनता जवाब देगी। पार्टी में शामिल हुए सभी लोग भाजपा के विचार को मजबूत करने में लगे हैं। इस बार 60 पार के नारे के साथ चुनाव में जाएंगे। कांग्रेस सेंधमारी नहीं कर पाएगी। चार साल से वह विफल रही है।
- कुलदीप कुमार, प्रदेश महामंत्री, भाजपा