चुनाव 2022: आरएसएस प्रमुख के मंत्रों के बहाने हरीश रावत ने बोला हमला, कहा- भाजपा भूली भागवत के छह मंत्र
हरीश रावत का मानना है कि कांग्रेस सरकार ने अपने समय में इन मंत्रों का बखूबी प्रयोग करते हुए इन्हें राज्य के विकास और संस्कृति से जोड़ा था।
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पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के छह मंत्रों भाषा, भोजन, भजन, भ्रमण, परिधान और भवन का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार पर हमला बोला है।
हरीश रावत का मानना है कि वर्तमान भाजपा सरकार इन मंत्रों के विपरीत कार्य कर रही है। जबकि कांग्रेस सरकार ने अपने समय में इन मंत्रों का बखूबी प्रयोग करते हुए इन्हें राज्य के विकास और संस्कृति से जोड़ा था। रावत ने एक-एक मंत्र का विस्तार से उल्लेख किया है।
पहला मंत्र- भाषा-बोली को भूली सरकार
हरीश रावत ने कहा कि उनकी सरकार ने कुमाऊं और गढ़वाल विवि में गढ़वाली, कुमाऊंनी व जौनसारी भाषा के संवर्धन के लिए विभाग खोला था। एक भाषा-बोली संवर्धन संस्थान गौचर में स्थापित किया था। पीसीएस के सिलेबस में भी कुछ प्रश्न स्थानीय भाषा और परंपराओं से संबंधित अनिवार्य किए थे। लेकिन आज भाषा-बोली संस्थान लगभग बंद हैं। विश्वविद्यालयों और स्थानीय बोली-भाषाओं के विभाग न के बराबर चल रहे हैं।
दूसरा मंत्र- स्थानीय भोजन पोषण से जोड़ा
कहा कि हमारी सरकार ने परंपरागत अन्न आधारित भोजन को न केवल प्रोत्साहित किया, बल्कि गर्भवती महिला पोषण आहार योजना, वृद्ध पोषण आहार योजना, इंदिरा अम्मा भोजनालयों और कई सरकारी विभागों में एक दिन स्थानीय अन्न आधारित व्यंजनों को अनिवार्य किया। जिसे भाजपा सरकार ने बंद कर दिया। हमने व्यंजनों के त्यौहार घी संक्रांति को राज्य के दूसरे महत्वपूर्ण पर्व के रूप में मनाया, जिस परंपरा को बंद कर दिया गया।
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तीसरा मंत्र- भजन बनवाए तो आरोप लगाए
हमने श्री केदारनाथ व श्री बदरीनाथ और देव स्थलों की महिमा गायन के लिए प्रतिष्ठित गायकों व लोक कलाकारों की सेवाएं लीं, जिनमें कैलाश खेर का केदारनाथ पर भजन आज विश्व प्रसिद्ध है। मगर जब हम यह भजन बनवा रहे थे तो भाजपा हम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही थी।
चौथा मंत्र- भ्रमण, हमने बैठकें रोटेट कीं
हरीश ने कहा कि चौथा मंत्र है भ्रमण। हमने उत्तराखंड को ट्रैकर्स पैराडाइज के रूप में विकसित व प्रचारित किया और लगभग 90 ट्रैक्स व ट्रैकिंग मानचित्र पर अंकित किए। मंत्रिमंडल की बैठकें भी रोटेट कीं और केदारनाथ तक में हमने मंत्रिमंडल की बैठक की।
पांचवां मंत्र- परिधान का नहीं हो रहा प्रचार
रावत ने कहा कि हमने आभूषण आदि परंपरागत वस्त्रों और आभूषणों को न केवल प्रचारित किया, बल्कि उनको राजकीय संरक्षण व प्रोत्साहन उपलब्ध करवाया, जो अब नहीं हो रहा है।
छठा मंत्र- भवन, स्थानीय शिल्प को बढ़ावा दिया
कहा कि यदि भवन से अर्थ स्थानीय शिल्प है तो हमने न केवल शिल्प को सरकारी भवनों में अनिवार्य किया, बल्कि स्थानीय शिल्प के संरक्षण के लिए धनराशि भी उपलब्ध करवाई। कुछ क्षेत्रों जैसे गूंजी, पुरोला आदि में इन भवन शैलियों को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई। रंवाई, कुमाऊंनी और गढ़वाली भवन शैली को संरक्षित करने के निर्देश राज्य संग्रहालय को प्रदान किए।