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Uttarakhand Election 2022: उत्तराखंड में चुनावी बिगुल बजा, मतदाता के हाथ इनाम और सजा
Sun, 09 Jan 2022 01:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 09 Jan 2022 01:34 PM IST
सार
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद हो रहे पांचवे विधानसभा चुनाव में एक बार फिर पारंपरिक सियासी दल भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं।
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चुनाव इतिहास
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव का बिगुल बज गया है। प्रदेश के 81 लाख 43 हजार 922 मतदाताओं के हाथ में है कि वे पांच साल की परीक्षा में किसे पास करते हैं और किसे फेल। किसे सजा देते हैं और किसे जनादेश का इनाम देते हैं। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद हो रहे पांचवे विधानसभा चुनाव में एक बार फिर पारंपरिक सियासी दल भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं।
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दिल्ली में सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी उत्तराखंड राज्य में भी सरकार बनाने का सपना देख रही है। चुनावी जंग में आप की कोशिश तीसरा कोण बनाने की है। मैदान में उत्तराखंड क्रांति दल, बहुजन समाज पार्टी, वामपंथी दल व अन्य राजनीतिक पार्टियां भी हैं।
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राज्य के चुनावी इतिहास पर गौर करें तो भाजपा और कांग्रेस राज्य में दो-दो बार सरकार बना चुके हैं। राज्य गठन के बाद भाजपा ने अंतरिम सरकार बनाई। इसके बाद वर्ष 2002 में पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता पर काबिज हुई। 2007 में कांग्रेस के हाथों से सत्ता फिसली और भाजपा ने सरकार बनाई। 2012 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई।
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राज्य गठन के बाद भाजपा की अंतरिम सरकार
नौ नवंबर 2000 को राज्य बना। उस समय उत्तराखंड में अंतरिम विधानसभा में 30 सदस्य थे। इनमें यूपी के समय चुने हुए 22 विधायक और आठ विधान परिषद सदस्य थे। 22 विधायकों में 17 भाजपा के, एक तिवारी कांग्रेस का, एक बसपा और तीन समाजवादी पार्टी का था।
2002 : पहले चुनाव में कांग्रेस को बहुमत, बनाई सरकार
14 फरवरी 2002 को उत्तराखंड राज्य का पहला विधानसभा चुनाव हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस ने 36 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा 19 सीटों पर सिमट गई। बसपा ने 7 सीटें जीतीं, जबकि क्षेत्रीय दल यूकेडी भी चार सीटें जीतने में कामयाब रही। एनडी तिवारी मुख्यमंत्री बने।
2007 में खंडित जनादेश, जोड़तोड़ से भाजपा सत्ता पर काबिज
2007 के विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश आया। राज्य के मतदाताओं ने किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया। भाजपा 34 सीट लेकर सबसे बड़ा दल बनकर उभरी, जबकि कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई। बसपा ने अपनी एक सीट का इजाफा किया और वह आठ सीटों पर पहुंची। जनरल बीसी खंडूड़ी ने यूकेडी और निर्दलीय विधायक की मदद से सरकार बनाई।
2012 में फिर खंडित जनादेश, कांग्रेस ने जोड़तोड़ से बनाई सरकार
2012 के विधानसभा चुनाव में भी खंडित जनादेश आया। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। भाजपा 31 सीटों पर सिमट गई तो कांग्रेस 32 सीटें लेकर सबसे बड़ा दल बनकर उभरी। उसे सरकार बनाने के लिए बसपा और निर्दलीय विधायकों का न सिर्फ सहयोग लेना पड़ा बल्कि उन्हें मंत्री बनाना पड़ा। शुरुआत विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बनें और उनके बाद सत्ता की बागडोर हरीश रावत ने संभाली।
2017 में प्रचंड बहुमत से आई भाजपा
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 57 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई। कांग्रेस महज 11 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में हरीश रावत दो सीटों से चुनाव हारे। त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने।
2007 में खंडित जनादेश, जोड़तोड़ से भाजपा सत्ता पर काबिज
2007 के विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश आया। राज्य के मतदाताओं ने किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया। भाजपा 34 सीट लेकर सबसे बड़ा दल बनकर उभरी, जबकि कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई। बसपा ने अपनी एक सीट का इजाफा किया और वह आठ सीटों पर पहुंची। जनरल बीसी खंडूड़ी ने यूकेडी और निर्दलीय विधायक की मदद से सरकार बनाई।
2012 में फिर खंडित जनादेश, कांग्रेस ने जोड़तोड़ से बनाई सरकार
2012 के विधानसभा चुनाव में भी खंडित जनादेश आया। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। भाजपा 31 सीटों पर सिमट गई तो कांग्रेस 32 सीटें लेकर सबसे बड़ा दल बनकर उभरी। उसे सरकार बनाने के लिए बसपा और निर्दलीय विधायकों का न सिर्फ सहयोग लेना पड़ा बल्कि उन्हें मंत्री बनाना पड़ा। शुरुआत विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बनें और उनके बाद सत्ता की बागडोर हरीश रावत ने संभाली।
2017 में प्रचंड बहुमत से आई भाजपा
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 57 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई। कांग्रेस महज 11 सीटों पर सिमट गई। इस चुनाव में हरीश रावत दो सीटों से चुनाव हारे। त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने।
पहला विस चुनाव 2002
दल सीट वोट प्रतिशत
भाजपा 19 25.81
कांग्रेस 36 26.91
बसपा 07 11.20
यूकेडी 03 6.36
एनसीपी 01 4.02
निर्दलीय 03 16.63
दूसरा विधानसभा चुनाव 2007
भाजपा 34 31.90
कांग्रेस 21 29.59
सपा 0 5.88
बसपा 08 11.76
उक्रांद 03 6.38
एनसीपी 0 4.43
निर्दलीय 03 11.21
तीसरा विधानसभा चुनाव 2012
भाजपा 31 33.38
कांग्रेस 32 34.03
सपा 0 1.95
बसपा 03 12.28
उक्रांद 01 3.20
एनसीपी 0 0.67
निर्दलीय 03 12.82
चौथा विधानसभा चुनाव 2017
भाजपा 57 46.51
कांग्रेस 11 33.49
बसपा 0 7.04
उक्रांद 0 1.00
एनसीपी 0 0.29
निर्दलीय 02 10.38
भाजपा 19 25.81
कांग्रेस 36 26.91
बसपा 07 11.20
यूकेडी 03 6.36
एनसीपी 01 4.02
निर्दलीय 03 16.63
दूसरा विधानसभा चुनाव 2007
भाजपा 34 31.90
कांग्रेस 21 29.59
सपा 0 5.88
बसपा 08 11.76
उक्रांद 03 6.38
एनसीपी 0 4.43
निर्दलीय 03 11.21
तीसरा विधानसभा चुनाव 2012
भाजपा 31 33.38
कांग्रेस 32 34.03
सपा 0 1.95
बसपा 03 12.28
उक्रांद 01 3.20
एनसीपी 0 0.67
निर्दलीय 03 12.82
चौथा विधानसभा चुनाव 2017
भाजपा 57 46.51
कांग्रेस 11 33.49
बसपा 0 7.04
उक्रांद 0 1.00
एनसीपी 0 0.29
निर्दलीय 02 10.38