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उत्तराखंड सत्ता संग्राम 2022: कांग्रेस में शुरू हुआ जिताऊ उम्मीदवारों की खोज का अभियान, बंद कमरें में ली पांच बैठकें

Wed, 24 Nov 2021 11:20 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद मुसान , अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 24 Nov 2021 11:20 AM IST
सार

उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी वर्ष 2022 के चुनाव वर्ष 2017 की गलतियों को नहीं दोहराना चाहती है। इसलिए इस बार हर कदम संजीदगी के साथ उठाया जा रहा है।

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uttarakhand election 2022: Campaign to search for winning candidates started in Congress, first meeting today
congress, harish rawat - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उत्तराखंड में जिताऊ प्रत्याशियों की खोजबीन के लिए एआईसीसी की ओर से गठित स्क्रीनिंग कमेटी ने कवायद शुरू कर दी है। बुधवार स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्यों, प्रदेश कोर कमेटी के सदस्यों, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्षों, प्रदेश कांग्रेस के जिला व शहर अध्यक्षों एवं पार्टी के अनुषांगिक संगठनों, विभागों एवं प्रकोष्ठों के अध्यक्षों की बैठक आयोजित की गई। 

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बंद कमरे में पांच अलग-अलग बैठकें
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय राजीव भवन में प्रात: साढ़े नौ बजे शुरू हुआ बैठकों का दौर शाम चार बजे तक चलता रहा। इस दौरान स्क्रीनिंग कमेटी ने बंद कमरे में पांच अलग-अलग बैठकें लीं। जिसमें कमेटी के चेयरमैन अविनाश पांडेय, सदस्य डॉ. अजोय कुमार, विरेंद्र सिंह राठौर, प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत, सहप्रभारी राजेश धर्माणी एवं दीपिका पांडेय सिंह उपस्थित रहीं। स्क्रीनिंग कमेटी के साथ कार्यकारी अध्यक्षगणों एवं जिला, शहर कांग्रेस अध्यक्ष, पार्टी के अनुषांगिक संगठनों, विभागों एवं प्रकोष्ठों के अध्यक्षों की बैठक भी आयोजित की गई।
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इन बैठकों में आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर विचार विमर्श के साथ प्रत्याशियों के चयन में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर मंथन किया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चूंकी कमेटी की यह पहली बैठक थी, इसलिए इसमें काफी हद परिचय सत्र ही चलता रहा। सदस्यों और पदाधिकारियों की ओर से जो सुझाव आए, उन्हें कमेटी ने नोट किया। 

प्रदेश कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक में यह भी हुए शामिल
प्रदेश कांग्रेस कोर कमेटी के सदस्य पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य, काजी निजामुददीन, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जीतराम, तिलकराज बेहड़, रणजीत सिंह रावत, भुवन कापड़ी, प्रकाश जोशी, नवप्रभात, सुरेंद्र सिंह नेगी, मयूख महर, मनीष खंडूरी, आदेश चैहान, ममता राकेश, आर्येन्द्र शर्मा ने प्रतिभाग किया।

कांग्रेसी उम्मीदवारों पर लगेगी कार्यसमिति की आखिरी मुहर
विधानसभा चुनाव के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरमैन अविनाश पांडेय ने कहा कि कांग्रेस के प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम फैसला कांग्रेस कार्यकारी समिति (सीडब्ल्यूसी) लेगी। इससे पहले कमेटी के सदस्य राज्य की 70 विधानसभा सीटों का जायजा लेने के साथ गढ़वाल और कुमाऊं में अलग-अलग बैठकें आयोजित करेंगे। 

बुधवार को मैराथन बैठकों के बाद अविनाश पांडेय ने कहा कि उम्मीदवारों के चयन के लिए कमेटी की पहली बैठक में प्रत्याशियों के चयन के तौर-तरीकों पर मंथन किया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी सशक्त महिलाओं, कर्मठ युवाओं और जुझारू कार्यकर्ताओं को मौका देगी। किसी भी प्रत्याशी को टिकट दिए जाने से उसकी पूरी छानबीन की जाएगी। जनता की राय भी ली जाएगी। 

 पांडेय ने कहा कि विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण की प्रक्रिया प्रारंभ होने से पूर्व ब्लाक कांग्रेस कमेटी, जिला कांग्रेस कमेटी के माध्यम से प्राप्त आवेदनों पर प्रदेश चुनाव समिति के विचार के बाद स्क्रीनिंग कमेटी छानबीन कर रिपोर्ट सीडब्ल्यूसी को सौंपेगी। टिकट के सभी दावेदारों से भी अलग से बात की जाएगी। जिन सीटों पर दो या अधिक प्रत्याशी सामने आ रहे हैं, सभी को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य डा. अजोय कुमार, सदस्य विरेंद्र सिंह राठौर, सहप्रभारी राजेश धर्माणी एवं दीपिका पांडेय सिंह, एआईसीसी प्रवक्ता जरिता, प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि आदि उपस्थित थे।
 

अपनी ओर से कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती कांग्रेस

वर्ष 2017 के विस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपना सबसे खराब प्रदर्शन किया था। पार्टी मात्र 11 सीटों पर सिमटकर रह गई थी। चुनाव में मिली इस करारी हार के बाद की गई समीक्षा में मोदी लहर के साथ जो एक महत्वपूर्ण तथ्य निकलकर सामने आया था, वह था पार्टी की ओर से सही उम्मीदवारों का चयन न कर पाना।

प्रदेश की बहुत सी सीटों पर चुनावी गणित सही उम्मीदवारों का चयन न होने की वजह से गड़बड़ा गया। हालांकि कुछ सीटों पर हार का अंतर मामूली था। ऐसे में पार्टी ने सत्तारूढ़ भाजपा से पहले स्क्रीनिंग कमेटी का गठन कर अपनी कवायद शुरू कर दी है। पार्टी इस बार जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश के लिए अपनी ओर से कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। 

सीटिंग विधायकों पर फिर से दांव लगा सकती है पार्टी
वर्ष 2017 के विस चुनाव में जीतकर आए सभी विधायकों को पार्टी पुन: मैदान में उतार सकती है। वैसे तो अंतिम उम्मीदवारों के नामों की घोषणा बाद में की जाएगी, लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो सभी सीटिंग विधायकों का टिकट पक्का है। इनमें केदारनाथ से विधायक मनोज रावत, चकराता से प्रीतम सिंह, भगवानपुर से ममता राकेश, पिरान कलियर से फुरकान अहमद, मंगलौर से काजी निजामुद्दीन, धरचूला से हरीश धामी, रानीखेत से करण माहरा, जागेश्वर से गोविंद सिंह कुंजवाल और जसपुर से विधायक आदेश चौहान का नाम शामिल है। 

इन सीटों पर करनी पड़ेगी माथापच्ची 
कुमाऊं की कई सीटों पर अपना प्रभाव रखने वाली कांग्रेस की दिग्गज नेता और नेता प्रतिपक्ष रहीं इंदिरा हृदयेश की असमय मौत के बाद खाली हुई हल्द्वानी सीट पर पार्टी को इस बाद जिताऊ उम्मीदवार ढूंढने के लिए नए सिरे से माथापच्ची करनी पड़ेगी। इसके अलावा पुरोला से विधायक रहे राजकुमार के भाजपा में शामिल होने के बाद इस सीट पर पार्टी के लिए जिताऊ उम्मीदवार ढूंढना चुनौती रहेगी। कर्णप्रयाग सीट पर बीते चुनाव में उम्मीदवार रहे अनुसुया प्रसाद मैखुरी के निधन के बाद इस सीट पर भी नया उम्मीदवार उतारना होगा। इसके अलावा बीएचईएल रानीपुर सीट से उम्मीदवार रहे अम्बरीश कुमार का भी निधन हो चुका है। रुड़की से उम्मीदवार रहे सुरेश जैन और खानपुर सीट से चौ. यशवीर सिंह ने चुनाव में हार मिलने के बाद भाजपा का दामन थाम लिया था। इन सीटों पर भी पार्टी को नए सिरे से माथापच्ची करनी पड़ेगी।

कमजोर सीटों की होगी समीक्षा
वर्ष 2017 के विस चुनाव में कई सीटों पर पार्टी मामूली वोटों से हारी थी, लेकिन बहुत सी सीटों पर हार का अंतर बेहद ज्यादा था। ऐसी सीटों को लेकर पार्टी इस बार नए सीरे से समीक्षा कर रही है। इन सीटों पर प्रत्याशियों का बदला जाना तय है। कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जहां पार्टी को बीते चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इन सीटों पर बेहतर उम्मीदवार न मिलने के कारण पुराने चेहरों पर ही उसे दांव लगाना होगा। 

एक-एक सीट पर दावेदार अनेक
चुनाव से पहले राज्यभर में विभिन्न सीटों पर लगे पोस्टर-बैनर और होर्डिंग्स बता रहे हैं कि एक-एक सीट पर दावेदार अनेक हैं। हर कोई अपने ढंग से तैयारी में लगा है, इनमें से बहुत से दावेदार तो पिछले पांच सालों से लगातार सक्रिय रहे हैं, लेकिन बहुत से ऐसे भी हैं, जो ऐन चुनाव से पहले पोस्टरों-बैनरों के जरिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। स्क्रीनिंग कमेटी के गठन से पहले ही कई दावेदार पार्टी प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के सम्मुख अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं।

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