Uttarakhand Election 2022: यूएस नगर में भाजपा की सिख और बंगाली वोटरों पर नजर, रिझाने की कोशिश में
सियासी जानकारों के मुताबिक, ऊधमसिंह नगर की तीन विधानसभा सीटों पर बंगाली समुदाय के मतदाताओं का प्रभाव है। इनमें सितारगंज, रुद्रपुर और गदरपुर विधानसभा सीटें हैं। ये तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है।
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विधानसभा चुनाव में जातीय समीकरण साधने के लिए भाजपा ने सियासी चौसर पर मोहरे बैठा दिए हैं। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले में पार्टी के केंद्रीय नेता विभिन्न सम्मेलनों और बैठकों के जरिये अपने इस अभियान में जुट भी गए हैं।
तीन विधानसभा सीटों पर बंगाली समुदाय के मतदाताओं का प्रभाव
इसी रणनीति के तहत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तराई में बंगाली समाज के लोगों के साथ जिस अंदाज में संवाद किया उसे बंगाली समाज के लोगों को रिझाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सियासी जानकारों के मुताबिक, ऊधमसिंह नगर की तीन विधानसभा सीटों पर बंगाली समुदाय के मतदाताओं का प्रभाव है। इनमें सितारगंज, रुद्रपुर और गदरपुर विधानसभा सीटें हैं। ये तीनों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। पार्टी की रणनीति के अनुसार, नड्डा का बंगाली समाज के लोगों के साथ संवाद कराया गया।
नड्डा ने बंगाली समाज के लोगों के प्रमाण पत्रों से पूर्वी पाकिस्तान शब्द हटाने के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि धामी सरकार बंगाली समाज के लोगों के हित में फैसले ले रही है। नड्डा ने एक तरह से बंगाली समाज के लोगों से विधानसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन की अपेक्षा की। बंगाली समाज के साथ ही यूएसनगर में सिख मतदाताओं को रिझाने के लिए भाजपा पूरी ताकत लगा रही है।
जिले की नौ में से आधा दर्जन सीटों पर सिख मतदाताओं का प्रभाव है। जिले में कांबोज, जट और राय सिखों की बड़ी आबादी है। भाजपा को किसान आंदोलन के चलते सिख मतदाताओं को लेकर चिंता सता रही है। यही वजह है कि पार्टी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह को सह चुनाव प्रभारी बनाकर जिले की कुछ सीटों की जिम्मेदारी सौंपी है।
कांग्रेस भी सिख और अनुसूचित जाति के मतदाताओं पर नजर
बंगाली समाज के लोगों को साधने के लिए पार्टी ने सांसद लॉकेट चटर्जी को सह चुनाव प्रभारी बनाया है और उन्हें यूएसनगर की उन सीटों की जिम्मेदारी दी है, जहां बंगाली मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने का दमखम रखते हैं। इतना ही नहीं जातीय समीकरणों को साधने के देहरादून और हरिद्वार में दो केंद्रीय नेताओं को मोर्चा संभाल रहे हैं।
इनमें पार्टी के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम और प्रदेश सह प्रभारी रेखा वर्मा की दोनों जिलों में ओबीसी और दलित वर्ग के बीच सक्रियता बढ़ी है। सियासी चौसर पर बैठाए गए इन मोहरों के साथ पार्टी ने उन नेताओं और कार्यकर्ताओं की टीम को लगाया है जिनका अपने-अपने वर्ग में प्रभाव है। इन्हीं नेताओं और कार्यकर्ताओं के जरिये विभिन्न सम्मेलनों, सभाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश है।
उत्तराखंड में कांग्रेस की भी सिख और अनुसूचित जाति के मतदाताओं पर नजर है। पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की घरवापसी को कांग्रेस के लिए बड़ा चुनावी दांव मान रही है। आर्य के जरिये पार्टी दलित वोट बैंक पर सेंध लगाना चाहती है। कुमाऊं में पार्टी के पास अभी तक प्रदीप टम्टा बड़ा चेहरा थे। आर्य के आने से कांग्रेस को दूसरा बड़ा दलित चेहरा मिला है।