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Election 2022: लोक गायिका नेहा राठौर के 'यूपी में का बा' ने उत्तराखंड में भी दिया विमर्श को जन्म
Fri, 04 Feb 2022 04:09 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 04 Feb 2022 04:09 PM IST
सार
उत्तराखंड के सियारी गलियारों में लोग न सिर्फ नेहा के गीत खूब सुन और सराह रहे हैं, बल्कि उसकी चर्चा भी कर रहे हैं। इसमें भी पक्ष और प्रतिपक्ष बन गए हैं।
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विस्तार
लोक गायिका नेहा राठौर के गीत यूपी में 'का बा' ने चुनावी राज्यों में एक नए विमर्श को जन्म दिया है। उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है। यहां के सियारी गलियारों में लोग न सिर्फ नेहा के गीत खूब सुन और सराह रहे हैं, बल्कि उसकी चर्चा भी कर रहे हैं। इसमें भी पक्ष और प्रतिपक्ष बन गए हैं। कोई उत्तराखंड सरकार पर सवालों के तोप दाग रहा तो कोई उसकी उपलब्धियां गिना कर तारीफ कर रहा है। अमर उजाला ने अपने चुनिंदा पाठकों की कुछ रचनाओं को उत्तराखंड 'का बा' के विमर्श में शामिल किया है।
Uttarakhand Election 2022: असल मुद्दों पर हावी होता चुनावी सियासत का पीपीपी मॉडल, कोई जाति की तो कोई धर्म की सियासत को बना रहा हथियार
उत्तराखंड में का बा
खतम रोज़गार बा
युवा बेरोजगार बा
महंगाई बेशुमार बा
जुमलों की बौछार बा
विकास के बंटाधार बा
उत्तराखंड में का बा
- प्रदीप सिंह ढैला, रामगढ़ , नैनीताल
वे आ गए हैं फिर सदा की तरह
दस दिशाओं से घिर सदा की तरह
नारे वही हैं, इशारे वही हैं
वादे और इरादे सारे वही हैं
नीयत वही है, बातें वही हैं,
हिसाब नहीं है, बहीखाते वही हैं
बरस पड़े अचानक आपदा की तरह
वे आ गए फिर सदा की तरह
- बलबीर सिंह रावत, कोटद्वार
दलबदल की बयार है, आया चुनावी मौसम
आज इस दल में हैं, कल उस दल में थे हम
नहीं किसी से सरोकार, अपनी झोली भरते हम
जिस दल से मिले टिकट, उस दल में चल देते हम
टिकट नहीं मिला गर, बेदल ही लड़ लेंगे हम
फिर भी अपनी जनता को, छलना नहीं छोड़ेंगे हम
- त्रिभुवन कुमार पन्त, आदर्श नगर, मुखानी हल्द्वानी(नैनीताल)
नेता नहीं अभिनेता हैं ये
झूठे वादे करते हैं ये
चेहरे पे चेहरा लगा कर ये
जनता को गुमराह करते ये
नहीं आना लुभाने वादों में
मन की आवाज सुनकर ही
मुहर लगाना सही चिह्न पे
- सुनीता मित्तल, हरिद्वार
जैसे जैसे चुनाव नजदीक आने लगे हैं
अब नेता लोग गलियों में नजर आने लगे हैं
जो पहले दिखाई नहीं पड़ते थे मोहल्लों में
अब वो हाथ जोड़ नजर आने लगे हैं
सब कहते हैं मुफ्त राशन, पानी,बिजली मिलेगी
आश्वासनों की थाली सजाने लगे हैं
अपनी ही मुसीबतों में उलझा हुआ है वोटर
रंग-बिरंगे सपने उनको दिखाने लगे हैं
मत उलझ तू निर्वेद नेताओं की चाल में
वोटों की फसल वो उगाने लगे हैं
- नरीलाल निर्वेद , श्रीनगर गढ़वाल
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Uttarakhand Election 2022: असल मुद्दों पर हावी होता चुनावी सियासत का पीपीपी मॉडल, कोई जाति की तो कोई धर्म की सियासत को बना रहा हथियार
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उत्तराखंड में का बा
खतम रोज़गार बा
युवा बेरोजगार बा
महंगाई बेशुमार बा
जुमलों की बौछार बा
विकास के बंटाधार बा
उत्तराखंड में का बा
- प्रदीप सिंह ढैला, रामगढ़ , नैनीताल
वे आ गए हैं फिर सदा की तरह
दस दिशाओं से घिर सदा की तरह
नारे वही हैं, इशारे वही हैं
वादे और इरादे सारे वही हैं
नीयत वही है, बातें वही हैं,
हिसाब नहीं है, बहीखाते वही हैं
बरस पड़े अचानक आपदा की तरह
वे आ गए फिर सदा की तरह
- बलबीर सिंह रावत, कोटद्वार
दलबदल की बयार है, आया चुनावी मौसम
आज इस दल में हैं, कल उस दल में थे हम
नहीं किसी से सरोकार, अपनी झोली भरते हम
जिस दल से मिले टिकट, उस दल में चल देते हम
टिकट नहीं मिला गर, बेदल ही लड़ लेंगे हम
फिर भी अपनी जनता को, छलना नहीं छोड़ेंगे हम
- त्रिभुवन कुमार पन्त, आदर्श नगर, मुखानी हल्द्वानी(नैनीताल)
नेता नहीं अभिनेता हैं ये
झूठे वादे करते हैं ये
चेहरे पे चेहरा लगा कर ये
जनता को गुमराह करते ये
नहीं आना लुभाने वादों में
मन की आवाज सुनकर ही
मुहर लगाना सही चिह्न पे
- सुनीता मित्तल, हरिद्वार
जैसे जैसे चुनाव नजदीक आने लगे हैं
अब नेता लोग गलियों में नजर आने लगे हैं
जो पहले दिखाई नहीं पड़ते थे मोहल्लों में
अब वो हाथ जोड़ नजर आने लगे हैं
सब कहते हैं मुफ्त राशन, पानी,बिजली मिलेगी
आश्वासनों की थाली सजाने लगे हैं
अपनी ही मुसीबतों में उलझा हुआ है वोटर
रंग-बिरंगे सपने उनको दिखाने लगे हैं
मत उलझ तू निर्वेद नेताओं की चाल में
वोटों की फसल वो उगाने लगे हैं
- नरीलाल निर्वेद , श्रीनगर गढ़वाल