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सरकारी घोषणाओं से ‘बेघर’ हो रहे हैं आपदा पीड़ित
अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Mon, 02 Sep 2013 11:43 AM IST
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उत्तरकाशी में इन दिनों भवनों का किराया आसमान छू रहा है। कम आय वाले लोगों के लिए यहां किराए के मकान में रहना भी आसान नहीं रह गया है। इसका प्रमुख कारण लगातार दो साल से आ रही बाढ़ में जिले में करीब तीन सौ बहुमंजिला भवन ध्वस्त होना और बड़ी संख्या लोगों का ग्रामीण इलाकों से लोग शहर की ओर पलायन करना माना ही जा रहा है।
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राज्य सरकार ने आपदा में बेघर हुए लोगों को किराए पर रहने के लिए एक साल तक तीन-तीन हजार रुपए प्रतिमाह देने की घोषणा भी मानी जा रही है। इस घोषणा के बाद मकान मालिकों ने सामान्य किराएदार जो सरकारी घोषणा की पात्रता में नहीं आते हैं उन पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जहां डेढ़-दो हजार रुपए में कमरे मिल रहे थे वहां अब तीन से साढ़े तीन हजार रुपए वसूले जा रहे हैं।
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इस तरह हो रही मनमानी
ज्ञानसू के एक किराएदार ने बताया कि पिछले साल अगस्त की बाढ़ के बाद मकान मालिक ने किराया दो हजार से बढ़ाकर ढाई हजार कर दिया। अब जून की बाढ़ के बाद किराया साढ़े तीन हजार मांग रहा है। वरना मकान खाली करने को मजबूर किया जा रहा है। मकान मालिक न तो अनुबंध करते हैं और न ही किराए की रसीद देने को राजी हैं।
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सरकार की घोषणा के अनुसार आपदा में बेघर हुए परिवारों को किराए पर रहने का साक्ष्य उपलब्ध कराने पर किराया दिया जा रहा है। अब तक 18 परिवारों को किराए की रकम दी जा चुकी है। आपदा की आड़ में भवन किराया बढ़ाए जाने तथा जबरन भवन खाली कराने की शिकायतों पर कार्रवाई की जाएगी। किराएदारों को अनुबंध जरूर करना चाहिए, क्योंकि यही उनके किराएदार होने का साक्ष्य है।
-केके.सिंह, एसडीएम भटवाड़ी।