उत्तराखंड आपदा: कुमाऊं में पांच और गढ़वाल में दो और मौतें, मृतकों की संख्या पहुंची 75
Uttarakhand Disaster News: बागेश्वर के पिंडारी ग्लेशियर में पांच लोगों के हताहत होने की सूचना है। इससे आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या 75 पहुंच गई है।
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विस्तार
उत्तराखंड में भारी बारिश के बाद आई आपदा में मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। शुक्रवार को गढ़वाल में लापता दो अन्य ट्रैकरों के शव मिल गए हैं। पांच ट्रैकरों के शव बृहस्पतिवार को मिल गए थे। सभी सातों शव शुक्रवार को निकाले गए। इसके अलावा बागेश्वर के पिंडारी ग्लेशियर में पांच लोगों के हताहत होने की सूचना है। इससे आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या 75 पहुंच गई है। उधर, शुक्रवार को द्वाली में फंसे 42 में से 21 ट्रैकरों को सुरक्षित कपकोट पहुंचा दिया गया था। इनमें छह अमेरिकी नागरिक हैं। प्रशासन के अनुसार कफनी ग्लेशियर में 23 स्थानीय ग्रामीण हैं। सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
सचिवालय स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली सूचना के अनुसार, राज्य में आपदा से मरने वालों की संख्या 68 पहुंच गई है। बागेश्वर के कपकोट तहसील के अंतर्गत पिंडारी ग्लेशियर में 34 पर्यटक, कफली ग्लेशियर में 20 स्थानीय निवासी और सुंदरटुंगा ग्लेशियर ट्रैक पर 10 विदेशी पर्यटकों के फंसे होने सूचना मिली थी। इनमें कुल 58 लोगों को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की ओर से हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर लिया गया। शेष छह पर्यटकों में से पांच हताहत और एक लापता बताया जा रहा है।
इसके अलावा उत्तरकाशी के आईटीबीपी वाहिनी के बॉर्डर क्षेत्र नीलापानी में अग्रिम चौकी नागा से एसआरपी के दौरान मौसम खराब होने के दौरान बर्फबारी में जो दल बिछड़ गए थे, उनमें से सात व्यक्तियों की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हैं। इसके अलावा 17 सदस्यीय एक और ट्रैकिंग दल हर्षिल उत्तरकाशी से लमखागा पास ट्रैक पर गया था। इनमें से छह पोर्टर हिमाचल प्रदेश के रानी कांडा तक सुरक्षित पहुंच गए हैं। ट्रैकिंग दल के 11 सदस्य 17 अक्तूबर से लापता है। अब दल की लोकेशन हिमाचल प्रदेश के आस-पास बताई जा रही है।
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पेट्रोल-डीजल-खत्म
पहाड़ी जिलों में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत शुरू हो गई है। बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत में पेट्रोल खत्म होने की सूचना चस्पा कर दी गई है। प्रशासन ने पेट्रोल पंपों को कब्जे में ले लिया है। इसी तरह कुकिंग गैस, दूध आदि की आपूर्ति न होने से भी इन वस्तुओं के लिए भी मारामारी हो रही है।
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ये हैं हालात
जिला मृतक घायल लापता
नैनीताल 35 05 --
अल्मोड़ा 06 02 --
बागेश्वर 01 -- --
चमोली 01 04 02
पौड़ी 03 02 --
उत्तरकाशी 05 02 --
चंपावत 11 04 02
यूएस नगर 02 03 --
पिथौरागढ़ 03 02 --
(आंकड़े राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार)
जिला भवन हानि
नैनीताल 74
अल्मोड़ा 40
बागेश्वर --
चमोली 15
पौड़ी --
उत्तरकाशी --
चंपावत 02
यूएस नगर 93
पिथौरागढ़ --
(आंकड़े राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार)
खराब मौसम ने रोकी सुंदरढूंगा में बचाव अभियान की राह
खराब मौसम के कारण सुंदरढूंगा ग्लेशियर में शुक्रवार को बचाव अभियान नहीं चलाया जा सका। प्रशासन के अनुसार यहां फंसे छह ट्रैकर, पोर्टर में से पांच की मृत्यु होने की सूचना है। एक ट्रैकर लापता बताया जा रहा है। बृहस्पतिवार को प्रशासन के पास चार ट्रैकरों की मौत और दो ट्रैकरों के लापता होने की सूचना थी। शुक्रवार को द्वाली में फंसे 42 में से 21 ट्रैकरों को सुरक्षित कपकोट पहुंचा दिया गया था। इनमें छह अमेरिकी नागरिक हैं। प्रशासन के अनुसार कफनी ग्लेशियर में 23 स्थानीय ग्रामीण हैं। सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
शुक्रवार को वायुसेना के दो एमआई- 17 हेलीकॉप्टरों ने कपकोट के केदारेश्वर मैदान से सुंदरढूंगा ग्लेशियर के लिए उड़ान भरी। थोड़ी देर बाद दोनों हेलीकॉप्टर लौट आए। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर ग्लेशियर तक नहीं पहुंच पाए। कपकोट में मौजूद डीएम विनीत कुमार को वायुसेना के पायलटों ने खराब मौसम की जानकारी दी। जिला प्रशासन के अनुसार सुंदरढूंगा ग्लेशियर में 10 लोगों के फंसे होने की सूचना प्राप्त हुई है। इसमें चार लोग सुरक्षित लौट आए हैं। उनमें पोर्टर शामिल हैं। शेष छह में से पांच लोगों के हताहत होने और एक व्यक्ति के लापता होने की सूचना है। डीएम ने कहा है कि शनिवार को एक बार फिर हेलीकॉप्टर रेकी के लिए सुंदरढूंगा जाएंगे।
जिला प्रशासन के अनुसार कफनी ग्लेशियर में 23 स्थानीय लोग फंसे हुए हैं, जिनकी खोज कर ली गई है। सभी लोग सुरक्षित हैं। कफनी क्षेत्र में पुलिया क्षतिग्रस्त हुई थी। इसे ठीक कर इन लोगों को सुरक्षित स्थान पर लाया जा रहा है। डीएम ने बताया कि खाती गांव में तैनात एसडीआरएफ टीम को जातोली पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। इस दल को शनिवार को जातोली से देवीकुंड पहुंचने को कहा गया है।
दारमा घाटी से 23 लोगों को बचाया
वायुसेना के एएलएच हेलीकॉप्टर की मदद से प्रशासन ने शुक्रवार को दूसरे दिन भी सीमांत के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान जारी रखा। बंद सड़क को देखते हुए सेना ने भी आठ क्विंटल राशन हेलीकॉप्टर से अग्रिम पोस्ट के लिए भेजा।
दारमा घाटी से वायुसेना के हेलीकॉप्टर से चार उड़ान से शुक्रवार को 21 पर्यटक और दो स्थानीय महिलाओं के साथ कुल 23 लोगों का हेली से रेस्क्यू किया गया। सभी पर्यटक महाराष्ट्र, बेंगलुरु, हरियाणा, बिहार, आंध्रप्रदेश यूपी, उत्तराखंड के देहरादून, खटीमा ऊधम सिंह नगर आदि जगहों के निवासी हैं जो प्रसिद्ध पंचाचूली ग्लेशियर तक घूमने गए थे लेकिन सड़क बंद होने से वह फंस गए थे।
खटीमा के संजय कुमार ने बताया कि उनके साथ गईं पांच लड़कियां भी परेशान थीं। उनकी चिंता रोज बढ़ती जा रही थी। उन्होंने बचाव के लिए सरकार और डीएम का आभार जताया है। बृहस्पतिवार को बचाव कार्य बंद होने पर हेलीपैड से आठ किमी दूर दांतू तक कुमाऊं स्काउट के अधिकारियों ने अपने वाहन से हेलीपैड तक पहुंचाया। इसलिए पर्यटकों ने मदद के लिए कुमाऊं स्काउट का भी आभार जताया। महाराष्ट्र की पर्यटक सरिता आनंद, बेंगलुरु के त्यागराजन ने दांतू के प्रधान जमन दताल और कुमाऊं स्काउट के जवानों की सराहना की। कहा कि इस प्रकार के सहयोग से सभी पर्यटकों का हौसला बढ़ा है। सेना के अधिकारियों ने धारचूला हेलीपैड पर पहुंचे पर्यटकों का हालचाल जानकर उन्हें चाय, नाश्ता और भोजन भी करवाया।
गर्भवती महिला को पहुंचाया अस्पताल
धारचूला निवासी गंगा राम धर्मशत्तू के प्रार्थनापत्र पर उनकी गर्भवती पुत्री अंजू देवी को धारचूला से जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ पहुंचाया गया। ढांकर हेलीपैड में अब भी 10 से अधिक पर्यटक फंसे हैं। उनको हेलीकॉप्टर का इंतजार है। सेना की कुमाऊं स्काउट ने ढांकर हेलीपैड में पर्यटकों को भोजन कराया। धारचूला में सेना के जवानों ने भी अभियान चलाया।
चल गांव जाकर किया मृतकों का पोस्टमार्टम
18 अक्तूबर को हुई बर्फबारी से दबकर मरे दो लोगों के शवों के पोस्टमार्टम के लिए टीम को भेजा गया। टीम को बृहस्पतिवार को ढांकर हेलीपैड पर उतारा गया था। टीम 20 किमी पैदल चलकर चल ग्राम पंचायत पहुंची। उन्होंने दोनों मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम किया।