उत्तराखंड आपदा: हल्द्वानी में बही थी गौला पुल की एप्रोच रोड, निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
नदी के उफान में आने से बाईपास में गौला नदी में बने पुल की 30 मीटर एप्रोच रोड बह गई है।अधिकारियों ने पुल का निरीक्षण कर एप्रोच रोड के बहने का कारण अवैध खनन बताया है।
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बीते दिनों उत्तराखंड में आई आपदा में हल्द्वानी के गौला पुल की एप्रोच रोड बह गई थी। जिससे पुल को भी खतरा पैदा हो गया था। रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिहं धामी पुल का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने जल्द से जल्द रोड निर्माण के आदेश दिए।
हल्द्वानी में गौला पुल की एप्रोच रोड बही, पुल को भी खतरा
नदी के उफान में आने से बाईपास में गौला नदी में बने पुल की 30 मीटर एप्रोच रोड बह गई थी। इससे पुल को खतरा पैदा हो गया है। एनएचएआई और लोनिवि के अधिकारियों ने पुल का निरीक्षण कर एप्रोच रोड के बहने का कारण अवैध खनन बताया है। हालांकि एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रथम दृष्टया गौला पुल को सुरक्षित बताया है।
आपदा के दौरान गौला नदी ने पुल की एप्रोच रोड को काटना शुरू कर दिया था। इससे 30 मीटर एप्रोच रोड पूरी तरह कट गई थी। इससे पुल और एप्रोच रोड के बीच बनी सुरक्षा दीवार भी ध्वस्त हो गई। पुल की साइड वॉल की बुनियाद भी दिखने लगी थी। करीब 25 मीटर गहरा गड्ढा हो गया था।
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पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पुल के दोनों ओर बैरीकेड कर लोगों को वहां से हटाया। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर योगेंद्र शर्मा और लोनिवि के अधिशासी अभियंता अशोक चौधरी मौके पर पहुंचे। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि अवैध खनन के कारण एप्रोच रोड बही है। कहा कि अवैध खनन को लेकर कई बार जिला प्रशासन को अवगत कराया गया था। इसके बाद भी जिला प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
अवैध खनन पर प्रशासन मूकदर्शक बना रहा
नदी के पुल के दोनों ओर एक किलोमीटर तक खनन शासन ने प्रतिबंधित किया हुआ है, लेकिन हल्द्वानी गौला पुल के नीचे अवैध खनन बदस्तूर जारी रहा। अमर उजाला की ओर से भी कई बार इसको लेकर खबर प्रकाशित की गई थी, लेकिन जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की टीम ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। यहां तक कि लोनिवि और एनएचएआई के अधिकारी अवैध खनन को लेकर कई बार डीएम से शिकायत भी कर चुके हैं। इसके बाद भी अवैध खनन पर ध्यान नहीं दिया गया।
आपदा पीड़ितों के बीच डटे सियासी दिग्गज
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इससे पहले शनिवार को भी आपदा पीड़ितों के बीच पहुंचे। उन्होंने चंपावत और पिथौरागढ़ में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक भी दूसरे दिन नैनीताल जिले में डटे रहे। उधर, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने भी आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पहुंचकर पीड़ित परिवारों से दुख-दर्द साझा किया।
लगातार पांचवें दिन मुख्यमंत्री ने पीड़ितों का हाल जाना। उन्होंने हर इलाके में हुए नुकसान की जानकारी ली। वह प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अपने हाथों से सहायता राशि के चेक वितरित किए। शनिवार को मुख्यमंत्री आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के लिए चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और नैनीताल के दो दिवसीय दौरे पर रवाना हुए। दौरे के पहले दिन मुख्यमंत्री ने चंपावत और पिथौरागढ़ के आपदाग्रस्त गांवों में पहुंचकर सभी पीड़ितों से मुलाकात की।
उनकी परेशानियां पूछीं और अधिकारियों को उनके समाधान के लिए कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आपदाग्रस्त क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए। हर जिले में अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें दिशा निर्देश जारी किए। 19 अक्तूबर को मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन मंत्री डा. धन सिंह रावत के साथ रुद्रप्रयाग और फिर नैनीताल जिले से अपने दौरे की शुरुआत की।
20 अक्तूबर को मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी, रुद्रपुर, किच्छा, खटीमा, काशीपुर आदि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। 21 अक्तूबर को मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ आपदाग्रस्त क्षेत्रों का हवाई दौरा किया और अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए। 22 अक्तूबर को मुख्यमंत्री ने सीमांत जिला चमोली के आपदा प्रभावित गांव डूंगरी पहुंचकर आपदा पीड़ितों का हाल जाना।