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आस्था पर भी भारी पड़ी जलप्रलय
प्रमोद सेमवाल/अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Sat, 16 Nov 2013 09:08 PM IST
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जलप्रलय का असर आम जनजीवन के साथ ही आस्था पर भी भारी पड़ने लगा है। इस वर्ष बदरीनाथ धाम में शीतकाल में तपस्या करने वाले साधु-संतों की संख्या में भारी गिरावट आई है। तहसील जोशीमठ में मात्र 12 साधु-संतों ने धाम में छह माह तक तपस्या करने की अनुमति के लिए आवेदन किया है।
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हालांकि पांच साधु-संतों के आवेदन ही पुलिस विभाग को जांच के लिए प्राप्त हो पाए हैं। पिछले वर्ष 22 साधु-संत बदरीनाथ धाम की कंदराओं में छह माह तक तपस्यारत रहे।
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बदरीनाथ धाम में तीर्थयात्रा के दौरान करीब पांच सौ साधु-संत पहुंचते हैं। शीतकाल में कई साधु-संत आध्यात्म की खोज में धाम में तपस्यारत रहते हैं। इस दौरान बदरीनाथ धाम बर्फ से ढक जाता है। यहां बर्फ के साम्राज्य में ये साधु-संत छह माह तक तपस्या में लीन रहते हैं।
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इस वर्ष 16/17 जून की जलप्रलय ने साधु-संतों की आस्था को भी झकझोर कर रख दिया। आपदा के बाद अधिकांश सातु-संध अपनी-अपनी कुटियाओं को रवाना हो गए थे। वर्तमान में धाम में करीब 70 साधु-संत रह रहे हैं। जिनमें से मात्र 12 साधुओं ने ही शीतकाल में धाम में रहने के लिए आवेदन किया है।