उत्तराखंड DGP अमर उजाला से निकाल रहे निजी खुन्नस
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उत्तराखंड में 150 महिला उपनिरीक्षकों की सीधी भर्ती परीक्षा की विस्तृत सूचना हम पाठकों तक नहीं पहुंचा सके, इसके लिए हमें खेद है। मगर यह हुआ कैसे? यह भी हम अपने पाठकों से साझा करना चाहेंगे।
दरअसल, डीजीपी बीएस सिद्धू ने निजी खुन्नस के चलते यह विज्ञापन अमर उजाला को नहीं दिया। निजी खुन्नस शब्द का इस्तेमाल हम इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि विज्ञापन रोकने का डीजीपी एक भी उचित कारण नहीं बता सकते।
डीजीपी नहीं चाहते कि वीर गिरवाली रेंज, मसूरी वन प्रभाग में भ्रष्ट तरीके से खरीदी गई जमीन संबंधी या उनके बारे में कोई भी प्रतिकूल खबर प्रकाशित हो। जबकि डीजीपी के इस भ्रष्टाचार को अमर उजाला ने ही उजागर किया था।
आर्थिक क्षति पहुंचाने के इरादे से यह पैंतरा अपनाया
इस संबंध में उन्होंने हाल ही में अमर उजाला प्रबंधन पर दबाव बनाने की भी कोशिश की थी। इसमें सफल न होने पर उन्होंने अमर उजाला को आर्थिक क्षति पहुंचाने के इरादे से अब यह पैंतरा अपनाया है।
यह एक तरह से अखबार की मुंह बंद करने की साजिश है। यह एक तरह का बदला है जो वे उन लोगों से भी ले रहे हैं, जिन्होंने भ्रष्ट तरीके से खरीदी गई जमीन के मामले में जांच के दौरान डीजीपी के प्रभाव को दरकिनार कर सच लिखा। वे सभी किसी न किसी तरह से प्रताड़ित किए जा रहे हैं। यह सच भी हम प्रकाशित कर रहे हैं।
विज्ञापन रोकने पर हमारी आपत्ति केवल इस बात पर है कि यह एक सूचनात्मक विज्ञापन था, इसको रोक कर सीधे तौर पर अमर उजाला पढ़ने वाले बेरोजगार युवाओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है।
हमारा पाठकों से वादा है कि हम पुलिस भर्ती परीक्षा से संबंधित सभी सूचना खबरों के मार्फत उन तक पहुंचाएंगे। डीजीपी के इस गलत कदम के विरोध के लिए हम पाठकों का भरपूर समर्थन चाहते हैं।