देहरादून में डेंगू के बाद अब स्वाइन फ्लू ने दी दस्तक, एक मरीज अस्पताल में भर्ती
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डेंगूू के बढ़ते प्रकोप के बीच राजधानी में स्वाइन फ्लू ने भी दस्तक दे दी है। 49 वर्षीय मरीज को एक सिनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इससे महकमे के अधिकारियों के हाथपांव फूल गए हैं। सिनर्जी अस्पताल के एमडी कमलकांत गर्ग ने बताया कि चार दिन पहले व्यक्ति को भर्ती कराया गया था। वह पहले भी सिनर्जी में अपना इलाज करा चुका है। वर्तमान में उसे निमोनिया हुआ था। इसके कारणों की जांच सरकारी लैब में कराए जाने के लिए सैंपल भेजा गया था। सोमवार सुबह आई रिपोर्ट में मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है।
इधर, असमय आए स्वाइन फ्लू के इस मामले को लेकर स्वास्थ्य महकमे में भी हड़कंप मच गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि व्यक्ति देहरादून के कौलागढ़ क्षेत्र का निवासी है। उसके ब्लड सैंपल को दिल्ली स्थित एनसीडीसी लैब भेजा गया था, जिसमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। स्वाइन फ्लू के संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सभी अस्पतालों को कहा गया है कि वे अपने अपने स्तर से इस तरह के लक्षणों वाले मरीजों की जांच कराएं, ताकि समय रहते स्वाइन फ्लू की रोकथाम की जा सके।
डेंगू हो प्रदेश में महामारी घोषित, राजभवन पहुंची कांग्रेस
डेंगू के बढ़ते असर और आपदा राहत को लेकर कांग्रेस मंगलवार को राजभवन पहुंच गई। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस ने प्रदेश में डेंगू को महामारी घोषित करने और प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए जोरदार अभियान चलाने की मांग की। पार्टी ने डेंगू से निबटने में राज्य सरकार को नाकाम बताया। आपदा प्रबंधन मसले को भी कांग्रेस ने इस दौरान उठाया और राज्य सरकार को हर मोर्चे पर नाकाम बताया।
मुलाकात के दौरान कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया हे कि देहरादून सहित सभी मैदानी इलाकों में डेंगू भयावह स्थिति में पहुंच गया है। राजधानी देहरादून में डेंगू के कारण कई लोग असमय काल के ग्रास बन चुके हैं और अस्पतालों में रोज सैकड़ों नए मरीज भर्ती हो रहे हैं। राज्य सरकार प्रभावी कदम उठाने की जगह अनर्गल बयानबाजी कर रही है। रोगियों की संख्या के हिसाब से चिकित्सालयों में चिकित्सक, कर्मचारियों और दवाओं की व्यवस्था नहीं है। आपदा का जिक्र करते हुए ज्ञापन में कहा गया है कि राज्यभर में आई दैवी आपदा के लोगों की जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। एक ओर जहां पर्वतीय क्षेत्र में भारी भूस्खलन व बादल फटने की घटनाओं के कारण कई लोग असमय काल का ग्रास बन गए हैं, वहीं मैदानी इलाकों में बरसात का पानी लोगों के घरों में घुसने से वहां रखा खाने-पीने का सामान पूरी तरह नष्ट हो गया है।
राज्यभर में आपदा प्रभावित लोगों को प्रशासन की ओर से कोई राहत नहीं मिल पाई है और न ही मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद भविष्य के लिए ठोस प्रबंधन किए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के अलावा पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, पूर्व विधायक राजकुमार, महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, प्रदेश महामंत्री गोदावरी थापली, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. आरपी रतूडी, गरिमा दसौनी, महानगर महिला अध्यक्ष कमलेश रमन, पीके अग्रवाल, प्रदेश सचिव गिरीश पुनेड़ा, भरत शर्मा, नवीन पयाल आदि शामिल थे।
पिछले सीजन में 40 लोगों की गई थी जान
स्वाइन फ्लू के मामले को इस समय चिकित्सक अप्रत्याशित मान रहे हैं। इसका कारण है कि स्वाइन फ्लू का वायरस अत्यधिक ठंड में ज्यादा सक्रिय होता है। बता दें, बीते वर्ष देहरादून में स्वाइन फ्लू ने कहर बरपाया था। अकेले दून के ही विभिन्न अस्पतालों में 300 से ज्यादा मरीज स्वाइन फ्लू के भर्ती थे। इनमें से 40 लोगों की जान चली गई थी।
फिजिशियन डॉ. प्रवीण पंवार ने बताया कि इस समय वातावरण में गर्मी और उमस है। लिहाजा, इस समय यदि किसी को स्वाइन फ्लू हुआ है तो यह बेहद अप्रत्याशित है। आमतौर पर स्वाइन फ्लू का वायरस नवंबर से लेकर फरवरी मध्य तक सक्रिय रहता है। इनमें भी दिसंबर और जनवरी अंत तक अत्यधिक सक्रिय अवस्था में होता है। बीते सीजन कई अस्पतालों के आईशोलेशन वार्ड में जगह तक नहीं बची थी। हालांकि, एक-दो मामले बीच में भी आ सकते हैं, लेकिन बीते सीजन की स्थिति को देखते हुए स्थिति चिंताजनक जरूर है।
ये लक्षण दिखें तो अनदेखी न करें
स्वाइन फ्लू के मामले में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। वायरल होने के कारण इसके प्रारंभिक लक्षण अन्य सामान्य मौसमी बीमारियों की तरह होते हैं। इसलिए इसकी पहचान आसानी से नहीं होती। ऐसे मामलों में चिकित्सक तुरंत उपचार शुरू करने का परामर्श देते हैं।
स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की गई है। सभी अस्पतालों को आइसोलेशन वार्ड बनाने और संदिग्ध मरीजों की सूचना तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। चिकित्सकों के अनुसार अगर समय पर उपचार शुरू किया जाए तो स्वाइन फ्लू से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। शुरुआती चरण में मरीज को दवा की जरूरत नहीं होती। शरीर जमा प्रतिरोधक क्षमता के इस्तेमाल से बीमारी से निपटने में मदद करता है। लेकिन अगर बीमारी पर नियंत्रण नहीं हुआ तो रोग जानलेवा साबित हो सकता है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
-लगातार नाक बहना और छींकें आना।
-लगातार खांसी और बहुत अधिक बलगम।
-सिर में बहुत तेज दर्द।
-बहुत ज्यादा थकान, अनिद्रा।
-मांसपेशियों में अकड़न और दर्द।
-गले में खुश्की और खरास।
-लगातार बुखार बढ़ना।
यह बरतें एहतियात
-खांसी-जुकाम को हल्के में ना लें।
-भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
-हाथ मिलाने और गले लगने से बचें।
-बिना मास्क पहने भीड़भाड़ में ना जाएं।
-अस्पताल जाते समय सावधानी बरतें।
-स्वाइन फ्लू प्रभावित क्षेत्रों में ना जाएं।
-खांसते और छींकते समय रुमाल रखें।
स्वाइन फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम के बीच शुरुआत में अंतर नहीं किया जाता है, लेकिन स्वाइन फ्लू बढ़ने पर जानलेवा साबित हो सकता है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए। समय पर उपचार देने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
- डां. एसके गुप्ता, सीएमओ