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उत्तराखंड: सीएम त्रिवेंद्र का एलान, आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं को मिलेगी एक-एक हजार की सम्मान निधि

Thu, 25 Jun 2020 10:47 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 25 Jun 2020 10:47 PM IST
सार

  • चतुर्थ श्रेणी और सफाई कर्मचारियों के वेतन से नहीं कटेगा एक दिन का वेतन

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Uttarakhand Cm Trivendra singh rawat Announcement for give 1-1 thousand Rupees to Anganwadi and ASHA workers
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को एक-एक हजार रुपये सम्मान निधि के तौर पर देने का एलान किया है। इससे 50 हजार कार्यकर्ता लाभांवित होंगे। सरकार ने इसी के साथ सफाई कर्मचारियों और चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के वेतन से प्रतिमाह होने वाली एक दिन की वेतन कटौती नहीं करने का निर्णय लिया है।

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पर्यावरण मित्रों ने स्वयं एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया था, लेकिन अब सरकार ने निर्णय लिया है कि चतुर्थ श्रेणी और पर्यावरण मित्रों के वेतन से कोई धनराशि नहीं कटेगी। सरकार ने कोविड-19 की रोकथाम के लिए सरकारी कर्मचारियों के वेतन से एक दिन का वेतन प्रतिमाह काटने का निर्णय लिया था।
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चालू वित्तीय वर्ष के दौरान यह कटौती की जानी है। राज्य के सीमांत क्षेत्रों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्र विकास निधि के तहत 27 सीमांत ब्लाकों के लिए प्रावधान किया है। इसको लेकर सेना, आईबी और अन्य एजेंसियों से फीडबैक भी लिया गया कि किस तरह से सीमांत क्षेत्रों को विकसित किया जाएगा।

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आर्थिक आपातकाल नहीं लगा जो वेतन काट दिया

कर्मचारी संगठनों ने वेतन कटौती के मामले में हाईकोर्ट की ओर से प्रदेश सरकार से जवाब मांगें जाने का समर्थन किया है। उनका कहना है कि प्रदेश में कोई आर्थिक आपातकाल नहीं लगा है, जो सरकार उनके वेतन की कटौती को लेकर मनमाना फैसला ले लिया।  उनकी राय में सरकार का यह कदम उनके मौलिक अधिकार में दखलंदाजी है। वे सरकार को आगाह कर रहे हैं कि यदि सरकार ने वेतन कटौती के मामले में हठधर्मिता दिखाई तो कोरोनाकाल समाप्त होने के बाद कर्मचारी डीए फ्रीज करने और वेतन कटौती के फैसले के खिलाफ आर पार की जंग लड़ेंगे।

राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद ने खुलासा किया है कि वह भी वेतन कटौती के मामले में न्यायालय जाने पर विचार कर रहा है। वेतन कटौती किन नियमों के तहत की गई, इस बारे में आरटीआई के माध्यम से सूचना मांगी गई है। सूचना प्राप्त होने पर कानूनी राय लेने के बाद परिषद कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वेतन कर्मचारियों का हक है और उनकी सहमति के बगैर सरकार इसमें कोई कटौती नहीं कर सकती है। उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन ने वेतन कटौती, डीए फ्रीज करने व कर्मचारियों के लंबित मसलों पर तत्काल प्रभाव से त्रिस्तरीय बैठक बुलाने की मांग की। संगठन ने वेतन कटौती के फैसले को असांविधानिक करार दिया। इस मसले पर कई कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं।

इनका है कहना

परिषद पहले दिन से ही अपना विरोध दर्ज कर रही है कि वेतन कटौती का फैसला मनमाना है। सरकार से सवाल पूछा गया है कि आखिर उसने किन नियमों के तहत कर्मचारी की सहमति के बगैर उसका वेतन काट दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई वित्तीय आपातकाल भी नहीं लगा है। ऐसे हालातों में वेतन काटने का क्या औचित्य है। परिषद कोर्ट जाने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है।
- अरुण पांडेय, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद

सरकार ने सफाई कर्मचारियों की वेतन कटौती वापस ली। ठीक ऐसे ही निम्न वेतन लेने वाले समूह ग व घ के सभी कर्मचारियों की वेतन कटौती का फैसला भी वापस लेना चाहिए। प्रदेश भर के कर्मचारियों में सरकार के फैसले को लेकर नाराजगी है। संगठन सरकार से लगातार वेतन कटौती वापस लेने की मांग कर रहा है। हमारी मांग है कि सरकार तत्काल त्रिस्तरीय बैठक बुलाकर वेतन कटौती ही नहीं सभी लंबित मसलों के समाधान करे।
- पंचम सिंह बिष्ट, प्रदेश महामंत्री, उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन

हम न्यायालय की कार्यवाही का समर्थन करते हैं। सरकार को वेतन कटौती के फैसले पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। सरकार ने वेतन काटने से पहले विधायकों की सहमति ली। लेकिन कर्मचारियों के मामले में एकतरफा फैसला किया। किसी भी फंड में दान स्वेच्छा से दिया जाता है, दान देने के लिए कोई किसी को बाध्य नहीं कर सकता। मंच रुख स्पष्ट है। कोरोनाकाल समाप्त होने के बाद मंच फैसले के विरोध में आंदोलन करेगा।
- पूर्णानंद नौटियाल, प्रदेश प्रवक्ता, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच

सरकार को कर्मचारियों के वेतन काटने का अधिकार नहीं है। वेतन कर्मचारी की निजी संपत्ति है। सरकार ने कर्मचारी के मौलिक अधिकारों में हस्तक्षेप किया। मैंने न्यायालय में यही पक्ष रखा है। हम नोटिस जारी कर सरकार से जवाब मांगने के न्यायालय के कदम का स्वागत करते हैं।
- दीपक बेनीवाल, कर्मचारी नेता व याचिकाकर्ता

किसी भी फंड में दान स्वेच्छा दिया जाता है। लेकिन कर्मचारियों के मामले में सरकार ने मनमाना फैसला कर लिया। अधिक व निम्न वेतनमान वाले कर्मचारियों में भी फर्क नहीं किया। अल्पवेतन भोगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बारे में भी विचार नहीं किया गया। सरकार को कम वेतन वाले कर्मचारियों के वेतन से कटौती नहीं करनी चाहिए। पूरे प्रदेश में 45 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मियों में भारी नाराजगी है।
- बनवारी सिंह रावत, प्रदेश महामंत्री चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी महासंघ

अच्छा होता यदि सरकार कर्मचारी संगठनों से राय मशविरा कर निर्णय लेती। वेतन कटौती कर्मचारियों के इच्छा पर छोड़ दिया जाना चाहिए था। इस बात की भी संभावना थी कि बहुत से कर्मचारी अपनी वेतन कटौती से अधिक धनराशि का योगदान देते। मामला न्यायालय में है, इसलिए अब वहीं से तय होगा कि सरकार का फैसला न्यायिक दृष्टि से कितना उचित है।
- दीपक जोशी, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन
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