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योजना आयोग के खात्मे का उत्तराखंड ने किया विरोध

Sun, 07 Dec 2014 10:21 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 07 Dec 2014 10:21 PM IST
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uttarakhand cm oppose center on planning commission.

योजना आयोग की जगह नई संस्था (नीति आयोग) बनाने के मोदी सरकार की पहल का उत्तराखंड ने कड़ा विरोध किया है।

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नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि योजना आयोग को खत्म करने के बजाय आयोग को संवैधानिक दर्जा देना चाहिए। साथ ही इसे पुनर्गठित कर और अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए।

राज्यों को भी इसमें उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। आयोग को खत्म करने से ग्रीन बोनस का मसला भी अधर में रह जाएगा। योजना आयोग इस पर काम कर रहा था।

मुख्यमंत्री के मुताबिक आयोग को खत्म करने का केंद्र सरकार को एकतरफा फैसला नहीं करना चाहिए था। कोई भी फैसला लेने से पहले राज्यों की राय भी ली जानी चाहिए थी।

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आयोग का काम मंत्रालय को देने का विरोध

uttarakhand cm oppose center on planning commission.

रावत ने कहा कि योजना आयोग को समाप्त करने का हिमालयी राज्यों को नुकसान होगा। योजना आयोग केंद्र, राज्यों और अन्य संस्थाओं के बीच विमर्श का एक मंच रहा है।

संसाधनों के आवंटन का काम योजना आयोग के पास ही रहना चाहिए। यह काम किसी मंत्रालय पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। रावत ने यह भी कहा कि योजनाओं की निगरानी और अनुपालन का काम भी योजना आयोग के पास ही रहना चाहिए। हिमालयी राज्यों के लिए केंद्रीय योजना आयोग में एक अलग से प्रकोष्ठ स्थापित होना चाहिए।

कुछ नहीं मिलता उत्तराखंड को
रावत के अनुसार एक आकलन के मुताबिक उत्तराखंड पर्यावरण के रूप में करीब 161921 करोड़ रुपये की सेवाएं अन्य प्रदेशों और देश को दे रहा है। इसके एवज में प्रदेश को कुछ देने की कोई व्यवस्था योजना नहीं है।

योजना आयोग को मजबूती देने की मांग

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सीएम ने कहा कि योजना आयोग के ही सदस्य बीके चतुर्वेदी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने भी राज्य को कुल बजट सहायता का दो प्रतिशत ग्रीन बोनस के रूप में दिए जाने की संस्तुति की थी।

पर्यावरण के नाम पर प्रदेश की कई ऊर्जा परियोजनाओं को बंद कर दिया गया। इससे प्रदेश को करीब 1800 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना आयोग में राज्यों की समस्याओं और शिकायतों का निवारण करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

बोले सीएम
उत्तर पूर्वी राज्य और हिमालयी राज्य अभी मूलभूत स्वास्थ्य सेवा, पेयजल, सीवरेज, सड़क संपर्क आदि से ही जूझ रहे हैं। सीमांत क्षेत्रों से पलायन और खाली स्थानों पर पड़ोसी देशों के लोगों के बसने की समस्या भी इन राज्यों के सामने हैं। खुले बाजार पर समावेशी विकास को नहीं छोड़ा जा सकता।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
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