फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand cm harish rawat action against state employee

कोर्ट के फैसले से कटघरे में उत्तराखंड सरकार

Sat, 15 Nov 2014 08:47 PM IST
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 15 Nov 2014 08:47 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand cm harish rawat action against state employee

उत्तराखंड में हाईकार्ट के फैसलों ने जहां हड़ताली कर्मचारियों के प्रति कड़ रुख रवैया अपनाया है वहीं राज्य सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया है।

विज्ञापन


बातचीत और अपील के सहारे हड़ताली प्रदेश की छवि बदलने उतरी हरीश रावत सरकार की लाचारी देखकर ही हाईकोर्ट बर्खास्तगी और वैकल्पिक व्यवस्था की बात की है।

न तो सरकार की अपील का असर हो रहा है कि कर्मचारी कुछ समय तक हड़ताल न करें और न ही आपसी बात बन रही है। हड़ताली प्रदेश की छवि बदलने की बात कहने वाली हरीश रावत सरकार भी दस महीने के कार्यकाल में न कर्मचारियों की नाराजगी दूर कर सकी और न ही कड़ाई कर नाराजगी मोल लेना का जोखिम उठाया। हाईकोर्ट के हाल के फैसले सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सीधे तौर पर सवाल खड़े करते हैं।
विज्ञापन


उत्तराखंड को हड़ताली प्रदेश बनाने में सरकार भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। राजनैतिक लाभ और खुश करने के फैसलों ने कर्मचारियों के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है और एक दूसरे के बराबर आने की मशक्कत ही बार-बार हड़तालें कराती हैं। सरकार का हाईकोर्ट को धन्यवाद देना साबित करता है कि जो काम सरकार का था कोर्ट ने किया। रावत सरकार प्रदेश नई कार्य संस्कृति विकसित तो करना चाहती है लेकिन कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अल्टीमेटम के साथ हड़तालियों पर कार्रवाई

uttarakhand cm harish rawat action against state employee

पूरी कैबिनेट ने सचिवालय में कामकाज का तरीका बदलने के लिए एक कड़ा फैसला जरूर लिया लेकिन उसे लागू करने का जीओ आज तक जारी नहीं हुआ। इसे भी सरकार की कमजोरी से जोड़कर देखा जा रहा है। क्या सरकार को नहीं पता था कि इस फैसले से क्या होने वाला है।

यह भी चूक हुई कि सरकार ने सचिवालय कर्मचारियों को भरोसे में नहीं लिया। सरकार को अगर यह फैसला लागू ही करावना था तो जीओ जारी कर पहले ही दिन अल्टीमेटम के साथ हड़तालियों पर कार्रवाई करनी थी। दरअसल सरकार अपने फैसले को रोककर उसकी प्रतिक्रिया देखना चाहती थी।

कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली और नई कार्य संस्कृति को लेकर हाईकोर्ट ने हाल फिलहाल तीन अहम फैसले लिए हैं। मिनिस्ट्रियल कर्मियों की लंबी चली हड़ताल कोर्ट के सीधे हस्तक्षेप पर टूटी।

कोर्ट स्पष्ट निर्देश पर भी सरकार अपील करके खानापूर्ति करती रही। फिर कोर्ट को ही सीधे-सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा। ऐसा ही कुछ सचिवालय कर्मचारियों के मामले में भी हुआ है। आमतौर पर कोर्ट के फैसले सरकारों पर दबाव बनाते हैं लेकिन उत्तराखंड सरकार के लिए कोर्ट के फैसलों को इस तरह ले रही है जैसे उसकी मुंह मांगी मुराद पूरी हुई है।

बहुगुणा सरकार में साकेत निपटते थे हड़तालियों से

uttarakhand cm harish rawat action against state employee

हाईकोर्ट ने सरकार से 21 नवंबर तक उन अधिकारियों की जानकारी मांगी है जो कैंप कार्यालय या अटैचमेंट के नाम पर पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते हैं। सरकार इस मोर्चे पर भी फेल हुई है।

मैदान में डटे अधिकारियों को पहाड़ पर भेजने के लिए पूर्व सीएस सुभाष कुमार के कई निर्देशों और अल्टीमेंटम के बावजूद अधिकारी टस से मस नहीं हुए। जो सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। सरकार को अब हाईकोर्ट से उम्मीद है कि वही यह भी तय कर दे कि मैदान में डटे इन अधिकारियों को पहाड़ भेजा जाए।

विजय बहुगुणा सरकार का कार्यकाल भी हड़ताली कर्मचारियों से निपटते बीता है। इस दौरान सीएम के पुत्र साकेत बहुगुणा इसी काम में लगे रहे। हड़ताल खुलवाने और हड़तालियों को उनकी मांगे मंगवाने के लिए साकेत ही सरकार के बीच सेतु की भूमिका निभाई। प्रदेश में नारायण दत्त की सरकार के बाद से कर्मचारियों की हड़ताल का सिलसिला शुरू हुआ तो लगभग सभी मुख्यमंत्री इस प्रभावित रहे। सीएम बदले गए, कर्मचारियों की मांगे बदल गई लेकिन हड़ताल की प्रवृत्ति बनी रही।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed