फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   uttarakhand cm completes two years.

CM हरिश रावत के दो साल, समन्वय नहीं बना पाए हरदा

Tue, 02 Feb 2016 10:08 AM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 02 Feb 2016 10:08 AM IST
विज्ञापन
uttarakhand cm completes two years.

दो साल में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कभी अपनों के नश्तर झेले तो कभी कैबिनेट विस्तार के नाम पर कांग्रेसियों को छकाया।

विज्ञापन


सर्वसम्मति से कैबिनेट में निर्णय लेने के बजाय विचलन से फैसले लेने का प्रचलन इस दौरान ज्यादा बढ़ा। अगर हरीश रावत किसी मोर्चे पर खेत रहे तो वह सरकार और कांग्रेस संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने का था। संगठन और सरकार दोनों की राहें अलग थीं। कई बार संगठन ने सरकार को सांसत में डाला।

हरीश रावत ने दो साल पहले एक फरवरी 2014 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो शुरुआत विरोध के साथ हुई। पहले ही दिन से अपने कैबिनेट सहयोगियों को महीने भर तक बगैर किसी पोर्टफोलियो के रखने से विरोध और बढ़ा। यहां तक कि विधानसभा का एक सत्र बगैर किसी मंत्री को विभाग दिए ही पूरा कर लिया।
विज्ञापन


बाहर राजनीतिक मोर्चे पर भले ही हरीश रावत भाजपा के साथ ही कांग्रेस के भीतर भी अपने विरोधियों से जूझते रहे हों। अपने राज्याभिषेक के कुछ ही दिन बाद हरीश ने ऐसी स्पीड पकड़ी कि पूरी कैबिनेट हाशिए पर चली गई और सरकार वन मैन आर्मी स्टाइल में चलने लगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो साल बीते, लेकिन हरीश रावत ने लाख दबाव के बावजूद कैबिनेट में ना तो फेरबदल किया और ना ही किसी को एंट्री दी। इस चक्कर में राजनीतिक रूप से हरीश ने अपने कुछ मजबूत सिपहसालार भी खो दिए। उनके खांटी समर्थक रहे पिथौरागढ़ विधायक मयूख महर समेत कई लोग उनसे दूर होते चले गए।

खास बात यह रही कि हरीश रावत कैबिनेट की बैठक कर निर्णय लेने के बजाय विचलन से ज्यादा फैसले लेने के हिमायती हो गए। पिछले दिनों राजभवन ने इस बात को लेकर एतराज भी जताया। मुख्यमंत्री बनने के बाद हरीश रावत ने एक काम जरूर किया। जिले में तैनात कमिश्नर, डीएम, डीआईजी व एसएसपी जैसे अफसरों को तैनाती में स्थिरता दी। जल्दी-जल्दी नहीं हटाने के उनके फैसले ने अधिकारियों को काम करने का मौका दिया।

इन फैसलों ने हरदा को डाला परेशानी में
- सीएम के सचिव का स्टिंग हुआ तो असहज हो गई सरकार
- एफएल-2 पर बदनामी हुई तो वापस लेना पड़ा शासनादेश
- अल्मोड़ा के नैनीसार में जिंदल ग्रुप को जमीन देने की मुसीबत अभी भी जारी
- अवैध खनन रोकने में पूरी तरह विफलता हाथ लगी

हरीश रावत के दो साल पर क्या बोलूं। कुछ किया हो तो प्रतिक्रिया भी दूं। यहां तो केवल दुकानदारी हुई और जनता के हितों पर कुठाराघात हुआ। कोई विधानसभा सत्र ऐसा नहीं गुजरा जिसमें सरकार की शिकस्त ना हुई हो। दो सालों में सरकार पर माफिया हावी रहे। वो चाहे भूमाफिया हो या फिर खनन माफिया। सरकार ने कोई ऐसी कोशिश नहीं की जिससे आम जन का हित जुड़ा हो।
- अजय भट्ट, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

बहुत उम्मीदें थी हरीश सरकार से : बसपा
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश कुमार ने कहा कि हरीश रावत सरकार बहुत सफल नहीं रही। सरकार राज्य में विकास कार्यों को लेकर दावे कुछ भी करें, लेकिन हकीकत यह है कि आमजन को बिजली, पानी, सड़क, चिकित्सा व शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को मुहैया कराने में सरकार नाकाम साबित रही है। राज्य के विकास को लेकर सरकार की नीतियां कितनी विफल साबित हुई इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तमाम प्रयासोें के बावजूद पहाड़ों से पलायन नहीं रुक पा रहा है। गांव के गांव खाली हो रहे हैं।

फ्लैगशिप योजना : पटरी से उतरी एमएसबीवाई
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पदभार संभालने के बाद उनकी पहली घोषणाओं में एक प्रदेश की जनता को स्वास्थ्य बीमा कवर देने की रही। घोषणा के एक वर्ष मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना लांच तो हुई लेकिन अब तक कारगर ढंग से योजना लागू नहीं हुई।

योजना के तहत पचास हजार का बीमा कवर गैर सरकारी कर्मियों और इन्कम टैक्स नहीं देने वालों के परिवार शामिल किये गए। लगभग 12.5 लाख लाभार्थियों को इसमें शामिल किया जाना है, लेकिन अभी तक सभी के कार्ड नहीं बन पाए। इतना ही नहीं सीएम हरीश रावत की योजना के तहत बीमा कवर पचास हजार से पौने दो लाख रुपये करने की घोषणा अक्टूबर 2014 से लागू होनी थी, लेकिन अभी तक मामला अधर में लटका है।

एमएसबीवाई सीएम की फ्लैगशिप योजनाओं में से एक है। अप्रैल 2014 में लांचिंग के बाद से योजना पटरी से उतर गई। कई महीने तक तो लाभार्थी चिन्हित नहीं हुए जो फाइनल सूची तैयार हुई उसमें अभी तक समस्त लोगों के कार्ड नहीं बन पाए।

किसी तरह योजना अक्टूबर 2014 तक चली। योजना के तहत पौने दो लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा लाभ देने के लिए घोषणा तो हुई लेकिन अभी तक टेंडर की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है। ऐसे में नए लाभार्थियों को जोड़ना तो दूर पुरानों भी लाभ से वंचित हैं। कई प्राइवेट अस्पताल बकाया भुगतान नहीं होने से योजना के तहत निशुल्क इलाज से हाथ खींच चुके हैं।

फौजियों को नहीं हुआ कल्याण
सैन्य बाहुल्य प्रदेश में सरकार फौजियों के सम्मान और कल्याण की घोषणाएं तो करती रही, लेकिन उनको अमल में नहीं लाया गया। उल्लेखनीय सेवाओं के लिए अलंकृत सैनिकों की वार्षिक सम्मान राशि बढ़ाने की घोषणा के बावजूद नहीं बढ़ी।

पूर्व सैनिकों की बेटियों के विवाह और बच्चों की छात्रवृति योजना में बढ़ोतरी की घोषणा भी पूरी नहीं हुई। अर्द्धसैनिक बलों के रिटायर जवानों और अधिकारियों के लिए अलग निदेशालय बनाने का शासनादेश तक जारी कर दिया गया, लेकिन एक वर्ष बाद भी बजट आवंटित नहीं हुआ।

दो साल में पेंशन के लिए नहीं मिला पुरोहित
हरीश रावत सरकार के दो सालों में घोषणाओं के अनुरूप काम नहीं हुआ। मुख्यमंत्री बनने के कुछ दिन के बाद प्रदेश में पुरोहित पेंशन की घोषणा हुई, लेकिन दो साल में समाज कल्याण, संस्कृति विभाग पुरोहित की परिभाषा ही तय नहीं कर पाया। गांवों तक पानी पहुंचाने की बात तो दूर लिफ्ट पेयजल योजना पर ही बट्टा लग गया।

रावत सरकार ने अपनी प्राथमिकता पर पेंशन को रखा था। इसके लिए प्रशासन ने पेंशन पट्टे बांटे, लेकिन लोग उन पट्टों को लेकर अभी तक दौड़ रहे हैं। पुरोहित पेंशन सर्वेक्षणों तक ही सीमित रही। यह तय नहीं हो पाया कि सिर्फ पुरोहितों को पेंशन मिलेगी या दूसरे धर्म गुरुओं को भी। सबसे अधिक दिक्कत पीने के पानी की रही है। पेयजल से संबंधित घोषणाओं पर कोई काम नहीं हो पाया।


दो साल के अंदर सरकार ने विभिन्न जिलों में संपर्क मार्ग और मोटर मार्ग बनाने का वादा किया लेकिन बहुत से स्थानों पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया। मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए खड़ंजा मार्ग तक नहीं है। इसी तरह वन्य जीवों से सुरक्षा के लिए दीवार, खाई और पावर फेंसिंग की घोषणा की गई थी, लेकिन अभी तक प्रस्ताव शासन में अटके हुए हैं और लोग परेशान घूम रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed