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Uttarakhand Chunav 2022: दिसंबर तक पूरा होगा चारधाम परियोजना का काम, उत्तराखंड से होगी कैलास मानसरोवर यात्रा

Wed, 09 Feb 2022 08:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 09 Feb 2022 08:50 PM IST
सार

गडकरी ने कहा कि इस वर्ष के अंत तक चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना के साथ ही टनकपुर-लिपुलेख सड़क परियोजना भी पूरी हो जाएगी। इसके बाद लोग चीन नहीं उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से कैलास मानसरोवर की यात्रा कर सकेंगे।

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Uttarakhand Chunav 2022: Gadkari said - Chardham project work will be completed by December, Kailash Mansarovar Yatra will be done from Uttarakhand
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

Uttarakhand Chunav 2022: दिसंबर तक पूरा होगा चारधाम परियोजना काम, उत्तराखंड से होगी कैलास मानसरोवर यात्रा

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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा का दृष्टि पत्र जारी करते हुए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री ने नितिन गडकरी ने सड़क, जलमार्ग, वायुमार्ग से लेकर रोपवे तक का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत तक चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना के साथ ही टनकपुर-लिपुलेख सड़क परियोजना भी पूरी हो जाएगी।

इसके बाद लोग चीन नहीं उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से कैलास मानसरोवर की यात्रा कर सकेंगे। गडकरी ने भविष्य में पर्वतमाला योजना के तहत बदरीनाथ से केदारनाथ पर्वत शृंखला के मध्य बीचोबीच जोड़ने की योजना का भी सपना दिखाया।
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उन्होंने कहा कि चारधाम परियोजना में एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा, इसके लिए ट्रासप्लांट तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके जरिए युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। 
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दृष्टि पत्र जारी करते हुए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री ने नितिन गडकरी ने इसे इथिक्स, इकोनॉमी, इकोलॉजी और इंवायरमेंट का समावेश बताया।

 कहा कि जब हम लाखों करोड़ों रुपये की योजनाओं की बात करते हैं तो लोग पूछते हैं पैसा कहां से आएगा। पिछले सात सात में वह 50 लाख करोड़ रुपये के काम करा चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में पैसे की कमी नहीं है, बल्कि की दृष्टि की कमी है।

गडकरी ने उत्तराखंड में नमामि गंगे के तहत किए जा रहे कामों का जिक्र करते हुए कहा कि दस शहरों में 33 एसटीपी परियोजनाओं के माध्यम से गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए काम किया जा रहा है। गंगा हमारी आस्था का केंद्र है और हम इसकी रक्षा के प्रतिबद्ध हैं। 

गडगरी ने कहा कि पहले चारधाम यात्रा छह माह ही होती थी। भूस्खलन के कारण लगातार हादसे होते थे। तब उन्होंने स्विट्जरलैंड से कंसल्टेंट बुलाए। इसके बाद उत्तराखंड की 12500 करोड़ रुपये की 825 किमी की चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना बनी। वर्तमान में 563 किमी की सड़क बनकर तैयार हो चुकी है।

सौ प्रतिशत पेड़ों का ट्रांसप्लांट किया जाएगा

176 किलोमीटर की सड़क में 20 टनल का काम बहुत तेजी से चल रहा है। बीच में मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया था। हमने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सामरिक दृष्टि से भी यह रोड बेहद महत्वपूर्ण है। दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत को याद करते हुए गडकरी ने कहा कि उन्होंने उनसे से भी इस बारे में चर्चा की। पर्यावरण और पारिस्थितिकी महत्वपूर्ण है, लेकिन सीमा पर सेना का बड़ा बेड़ा कैसे पहुंचेगा।

इसके बाद सेना की तरफ से भी सुप्रीम कोर्ट में तथ्य रखे गए। इस मामले सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक कमेटी बनाई गई है। लेकिन हमने पहले ही यह निर्णय ले लिया था कि हम इस परियोजना में आगे एक भी पेड़ नहीं काटेंगे। सौ प्रतिशत पेड़ों का ट्रांसप्लांट किया जाएगा। 

उन्होंने उदाहरण दिया कि वह दिल्ली में 10 किमी का द्वारिका एक्सप्रेस-वे बना रहे हैं। जिसकी लागत 30 हजार करोड़ रुपये है। इस परियोजना में 12 हजार पेड़ ट्रासप्लांट किए गए। अच्छी बात यह है कि सभी पेड़ जिंदा हैं। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड के युवाओं को पेड़ ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग देंगे।

उत्तराखंड के पर्यावरण की किसी भी दशा में हानि नहीं होने दी जाएगी
उन्होंने युवाओं से इस क्षेत्र में काम करने के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि इस परियोजना में एक पेड़ कटेगा तो हम उसके बदले पांच नए पेड़ लगाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्यावरण की किसी भी दशा में हानि नहीं होने दी जाएगी। 

उन्होंने कहा कि चारधाम परियोजना एक तरफ से इस प्रदेश की लाइफ लाइन है। ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम 253 किमी, जिसकी लागत 48 सौ करोड़ रुपये है। ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग तक 125 किमी सड़क का काम 1066 करोड़ रुपये किया जा रहा है। जिसमें छह सौ मीटर सड़क एलीवेटेड रोड है। इसमें से 120 किमी सड़क का काम पूरा हो चुका है।

24 किमी सड़क को 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।
पांच किमी सड़क का काम भी अप्रैल 2022 तक पूरा हो जाएगा। गडकरी ने कहा कि रुद्रप्रयाग-कर्णप्रयाग-चमोली से माणा गांव तक 128 किमी सड़क का काम 1735 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इसमें से 33 किमी सड़क बन गई है। शेष 95 किमी सड़क का काम चालू है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि 2022 तक चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना का काम पूरा कर लिया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि ऋषिकेश से रुद्रप्रयाग गौरीकुंठ तक दो सौ किमी और रुद्रप्रयाग से गौरीकुंठ तक 76 किमी सड़क का कार्य किया जा रहा है। इसमें से 52 किमी सड़क का काम पूरा हो चुका है। 24 किमी सड़क को 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।

ऋषिकेश से गंगोत्री धरासू तक 142 किमी सड़क का काम 16 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इसमें से 134 किमी सड़क का काम पूरा हो चुका है। बाकी आठ किमी का काम भी वर्ष 2022 तक पूरा जा जाएगा। गडकरी ने बताया कि ऋषिकेश से यमुनोत्री तक 218 किमी सड़क बननी है। जिसका काम भी बहुत तेजी से किया जा रहा है। जून 2022 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। 

टिहरी झील में उतरेगा सी-प्लेन

नितिन गडकरी ने कहा कि इस साल के अंत तक कैलास मानसरोवर मार्ग भी बनकर तैयार हो जाएगा। इसके लिए टनकपुर से लिपुलेख तक 366 किमी सड़क का जारी है। 
टनकपुर से पिथौरागढ़ तक 162 किमी सड़क का काम 1640 करोड़ रुपये में किया जा रहा है। इसमें से 125 किमी का काम पूरा हो चुका है। 

गडकरी ने उत्तराखंड में जल मार्ग की संभावनों पर भविष्य का रोडमैप रखा। इसके अलावा सी-प्लेन की परिकल्पना को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि अब तक देश में 102 नदियों को जलमार्ग में बदला गया है। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब आगार में यमुना से उड़कर सी-प्ले टिहरी डेम की झील में उतरेगा।

रोपवे कनेक्टिविटी बढ़ाएंगे
गडकरी ने कहा कि उत्तराखंड में सात रोपवे परियोजनाओं को शुरू किया जाएगा। केदारनाथ में में 985 करोड़ रुपये की लागत से 13 किमी रोपवे का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा हेमकुंड साहिब में 764 करोड़ रुपये की लागत से 12.6 किमी रोपवे निर्माण के लिए टेंडर हो गए हैं। इसके अलावा पांच अन्य रोपवे पर भी काम शुरू किया जाएगा। 

बदरीनाथ-केदारनाथ को जोड़ने की योजना
नितिन गडकरी ने पर्वतमाला योजना के तहत ऊपर ही ऊपर बदरीनाथ को केदारनाथ से जोड़ने की योजना का भी सपना दिखाया। उन्होंने कहा कि यदि आपके पास दृष्टि है तो सबकुछ संभव है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत राज्य के 10 पहाड़ी जिलों में रोपवे परिवहन नेटवर्क का निर्माण किया जाएगा।

कांग्रेस ने भाजपा के दृष्टि पत्र को दृष्टिदोष पत्र बताया 

कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के दृष्टि पत्र को दृष्टिदोष पत्र बताया है। कहा कि इसमें उत्तराखंड की मूलभूत समस्याओं के हल के लिए कहीं कोई जिक्र नहीं है। दृष्टि दोष पत्र में कुछ वाक्य और योजनाएं तो भाजपा की वर्ष 2017 के दृष्टि दोष से अक्षरस: ली गई हैं, जिनमें मात्रा बिंदी तक की गलतियां दोहराई गई हैं। साफ है कि भाजपा सरकार ने भी अप्रत्यक्ष रूप से ये मान लिया कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने, महंगाई और पलायन की समस्या से निजात दिलाने के लिए विगत पांच वर्षों में उसने कुछ नहीं किया है।

भाजपा का घोषणा पत्र जारी होने के बाद बुधवार देर शाम राजीवभवन में मीडिया कर्मियों से बीतचीत करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि आखिर चुनावों के चार दिन पहले भाजपा को दृष्टि दोष पत्र जारी करने की याद आ ही गई। इसमें उत्तराखंड के लोग जिन तीन समस्याओं बेरोजगारी, महंगाई व पलायन से जूझ रहे हैं, उनके बारे में एक भी ठोस नीति का उल्लेख नहीं किया गया है। भाजपा ने पिछले पांच साल में कितने रोजगार के सृजन किए और आगे क्या करेगी, इसका कहीं उल्लेख नहीं है। जब उत्तराखंड में महंगाई की दर राष्ट्रीय औसत से 30 प्रतिशत से ज्यादा है, ऐसे में उत्तराखंड वासियों को इस डबल महंगाई से कैसे निजात दिलाया जाएगा, उसके बारे में भी दृष्टि पत्र में एक भी शब्द नहीं लिखा गया है। 

प्रो. गौरव ने कहा कि भाजपा ने पिछले पांच सालों में सिर्फ और सिर्फ घोटालों का कोहराम मचाया है। चाहे वह मुख्यमंत्री के संरक्षण में चल रहे अवैध खनन के मामले हों या धर्मनगरी हरिद्वार में कोरोना टेस्टिंग का घोटाला हो। इस दृष्टि दोष पत्र में मुख्यमंत्री की नई फोटो के अलावा नया कुछ नहीं है। जिस दृष्टि पत्र में उत्तराखंड राज्य की तीन बड़ी समस्याओं के बारे में एक भी ठोस वाक्य नहीं हो, तो उसे क्या दृष्टि दोष पत्र कहना उचित नहीं होगा।

कुछ चुनिंदा लोगों को तीन निशुल्क सिलिंडर देने का एक नया जुमला जोड़ा गया है। इस योजना से भी चुनिंदा परिवारों को ही फायदा पहुंचेगा। कांग्रेस ने पांच सौ रुपये की भीतर राज्य के सभी परिवारों को गैस सिलिंडर उपलब्ध कराने की योजना लांच की है। यह घोषणा ठीक वैसी ही है, जैसे देश में दो करोड़ नौकरियां देने का झांसा दिया गया था और 15 लाख रुपये हर व्यक्ति के खाते में आने का वादा किया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा के दृष्टि पत्र में राज्य के हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज की बात 2017 में भी कही गई थी। इस बार इसे फिर दोहरा दिया गया। जबकि कांग्रेस ने दुर्गम इलाकों में ड्रोन से दवाइयों की डिलीवरी, दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में एयर एंबुलेंस, बाइक एंबुलेंस की सेवा व 24 घंटे सातों दिन टेलीमेडिसिन सेवा दूरस्थ इलाकों के मरीजों तक पहुंचाने की प्रतिज्ञा ली है।

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