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अब चारधाम के यात्रियों को हादसों से बचाएगा 'मेटल बीम क्रैश बैरियर'

Wed, 13 Jan 2016 01:52 PM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 13 Jan 2016 01:52 PM IST
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uttarakhand char dham yatra route will be safe.

अब सैलानियों के वाहनों के लिए उत्तराखंड का चारधाम रूट सुरक्षित रहेगा। समुद्र तल से हजारों मीटर ऊंचे पर्वतीय रास्तों से नीचे खाई में वाहनों के गिरने से लोगों की मौत नहीं होगी।

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चारधाम रूट और दूसरे पर्वतीय रास्तों को वाहनों के खाई में गिरने से सुरक्षित बनाया जा रहा है। अगर वाहन सड़क के किनारे खाई की तरफ आएगा भी तो मेटल बीम क्रैश बैरियर उसे गिरने से बचा लेगा।
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केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने पैरापिट वॉल और बीम क्रैश बैरियर बनाने की योजना को फाइनल कर दिया है। जल्दी ही ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर काम शुरू हो जाएगा।

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लगाई जाएगी पैरापिट वॉल और मेटल बीम क्रैश बैरियर

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पर्वतीय क्षेत्रों के रास्तों के एक किनारे तो पहाड़ होता है और दूसरी तरफ हजारों मीटर गहरी खाई। वाहनों का जरा सा संतुलन बिगड़ने पर वाहन गहरी खाई में चले जाते हैं। कई लोगों की मौत हो जाती है और बहुत से गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।

आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण विभाग के पांच साल के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि वाहनों के खाई में गिरने के सबसे अधिक हादसे टिहरी गढ़वाल, पौड़ी और चमोली क्षेत्र में हुए हैं। सैलानी और चारधाम यात्री इन्हीं रूटों से दर्शन के लिए जाते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारों पर पैरापिट वॉल और मेटल बीम क्रैश बैरियर लगाया जा रहा है। अभी तक कुछ ही स्थानों पर पैरापिट वॉल हैं। क्रैश बैरियर से वाहन अगर तेजी से टकराएगा भी तो मेटल बीम टेढ़ी हो जाएगी, लेकिन वाहन को नीचे नहीं गिरने देगी।

ऋषिकेश से बदरीनाथ हाईवे पर शुरू होगा काम

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सड़क किनारे पैरापिट वॉल और मेटल बीम क्रैश बैरियर लगाए जाने के संबंध में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो गई है। इसी महीने इसके टेंडर फाइनल हो जाएंगे। सबसे पहले पैरापिट वॉल और क्रैश बैरियर लगाने का कार्य ऋषिकेश से बदरीनाथ हाईवे पर शुरू होगा। इसके साथ ही मंत्रालय अन्य मार्गों पर इन्हें बनवाएगा।

वाहनों के आए दिन खाई में गिरने के हादसे होते हैं। पैरापिट वॉल और मेटल बीम क्रैश बैरियर बनाने का कार्य जल्दी ही शुरू हो जाएगा। इसमें प्रति किमी तकरीबन 30 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। इनके बन जाने से लोगों की यात्रा सुरक्षित रहेगी।
- पीके मौर्या, प्रोजेक्ट प्रभारी उत्तराखंड, राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय

हादसों के आंकड़े
वर्ष 2010
कुल हादसे-180
मौत-378
घायल-835

वर्ष 2011
कुल हादसे-144
मौत-251
घायल-749

वर्ष 2012
कुल हादसे-217
मौत-361
घायल-929

वर्ष 2013
कुल हादसे-183
मौत-290
घायल-718

वर्ष 2014
कुल हादसे-150
मौत-253
घायल-624

वर्ष 2015

कुल हादसे-207
मौत-329
घायल-799

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