लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli ›   Uttarakhand chamoli: Tourism minister satpal maharaj said investigation should do for Nuclear device lost in the Nanda Devi area

चमोली आपदा के बाद बोले पर्यटन मंत्री, नंदा देवी क्षेत्र में खो गए न्यूक्लियर डिवाइस की भी हो पड़ताल 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 17 Feb 2021 12:05 AM IST
सार

  • 1965 में बर्फ में दब गया था यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला उपकरण
    क्षेत्र से निकलने वाली नदियों में रेडियोधर्मिता की जांच की मांग 

पर्यटन और सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज
पर्यटन और सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

चमोली आपदा के कारण को लेकर जारी मंथन के बीच प्रदेश के पर्यटन और सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि नंदा देवी क्षेत्र में 1965 में बर्फ में दब गए न्यूक्लियर डिवाइस की अलग से जांच होनी चाहिए। 



महाराज के मुताबिक वे यह नहीं कह रहे हैं कि इस न्यूक्लियर डिवाइस की वजह से चमोली की नीति घाटी में आपदा आई है। यह डिवाइस रेडियोएक्टिव है और इसकी वजह से नदियों का पानी दूषित हो सकता है।


महाराज के मुताबिक 1965 में चीन की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नंदा देवी क्षेत्र में एक डिवाइस स्थापित किया गया था। इस डिवाइस को लगाने वाले दल के पास न्यूक्लियर ऊर्जा से चलने वाली बैटरी भी थी। बर्फ के तूफान के कारण यह बैटरी इसी क्षेत्र में कहीं दब कर रह गई थी। 

यह भी पढ़ें:  Uttarakhand Chamoli : आपदा में मृतकों के आश्रितों को 20 लाख का मुआवजा मिलना शुरू

महाराज ने कहा कि वे इसकी खोज और नदियों के पानी की जांच की मांग लगातार करते आ रहे हैं। इस बार चमोली जिले की नीति घाटी में आई आपदा का क्षेत्र भी वही है जो इस बैटरी के गुम होने का है।

ऐसे में न्यूक्लियर डिवाइस से कारण उत्सर्जित रेडियो एक्टिव प्रभाव की भी जांच होनी चाहिए। महाराज ने बताया कि जिस समय वे रक्षा समिति में थे, उस समय सैन्य अधिकारियों ने इस घटना की उन्हें जानकारी दी थी। 

सिंचाई विभाग में सेटेलाइट अध्ययन का अलग प्रकोष्ठ बनाया
महाराज के मुताबिक चमोली आपदा ने एक बार फिर ग्लेशियरों को केंद्र में कर दिया है। ऐसे में सिंचाई विभाग को कहा गया है कि वह सेटेलाइट डाटा के आधार पर ग्लेशियरों की निगरानी का काम भी शुरू करे। इस काम के लिए अलग से प्रकोष्ठ भी गठित कर दिया गया है। प्रदेश में सिंचाई विभाग की ओर से भी जल विद्युत परियोजनाएं बनाई जाती हैं लिहाजा सिंचाई विभाग भी नदियों की निगरानी अपने स्तर पर करता है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00